पीयूष गोयल: भारत-उज्बेकिस्तान व्यापार तीन साल में दोगुना हो, खनन-टेक्सटाइल में बड़े अवसर
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार, 3 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में आयोजित भारत-उज्बेकिस्तान बिजनेस फोरम में कहा कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार की अपार संभावनाएं अभी तक पूरी तरह नहीं भुनाई जा सकी हैं। उन्होंने स्पष्ट आह्वान किया कि अगले तीन वर्षों में दोनों देशों को अपना द्विपक्षीय कारोबार दोगुना करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
मौजूदा व्यापार और संभावित विस्तार
गोयल ने बताया कि फिलहाल दोनों देशों के बीच व्यापार लगभग 1.5 अरब डॉलर तक पहुँच चुका है, लेकिन यह आँकड़ा उस वास्तविक क्षमता का एक छोटा-सा हिस्सा मात्र है जिसे दोनों अर्थव्यवस्थाएं मिलकर हासिल कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि भारत उज्बेकिस्तान को एक बड़ा और तेज़ी से बढ़ता बाज़ार, एक भरोसेमंद साझेदार, कुशल एवं युवा कार्यबल और नवाचार-आधारित विकास का एक मज़बूत मंच प्रदान करता है।
प्रमुख क्षेत्र जहाँ सहयोग की संभावना
मंत्री ने कई ऐसे क्षेत्रों की पहचान की जो द्विपक्षीय सहयोग के लिए सबसे अधिक संभावनाशील हैं। खनन (माइनिंग) क्षेत्र में उन्होंने कहा कि उज्बेकिस्तान भारतीय निवेश के लिए बड़े अवसर प्रस्तुत करता है। टेक्सटाइल के मोर्चे पर उन्होंने उज्बेकिस्तान की कपास उत्पादन में मज़बूती और भारत की टेक्सटाइल उद्योग में अग्रणी भूमिका को एक-दूसरे का पूरक बताया। इसके अलावा गारमेंट मैन्युफैक्चरिंग, डिज़ाइन और वैश्विक बाज़ारों में साझा विस्तार के अवसरों पर भी उन्होंने ज़ोर दिया। हेल्थकेयर और मेडिकल डिवाइस क्षेत्र भी उनके द्वारा रेखांकित प्रमुख क्षेत्रों में शामिल रहे।
द्विपक्षीय निवेश संधि का महत्व
गोयल ने हाल ही में दोनों देशों के बीच संपन्न हुई द्विपक्षीय निवेश संधि का उल्लेख करते हुए कहा कि यह समझौता निवेशकों का भरोसा बढ़ाएगा और दोनों देशों के कारोबारियों को एक-दूसरे की अर्थव्यवस्थाओं में निवेश करने तथा दीर्घकालिक साझेदारी बनाने के लिए प्रोत्साहित करेगा। उन्होंने दोनों देशों के व्यवसायियों से आग्रह किया कि वे मिलकर निवेश करें, मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाएं और नवाचार को बढ़ावा दें।
रणनीतिक साझेदारी का साझा विजन
इस फोरम में उज्बेकिस्तान के निवेश, उद्योग एवं व्यापार मंत्री लाजिज कुद्रातोव भी उपस्थित थे। गोयल ने कहा कि दोनों देशों के बीच आपसी भरोसे, सम्मान और साझा समृद्धि के विजन पर आधारित रणनीतिक साझेदारी व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग को नई ऊँचाइयों तक ले जाने के व्यापक अवसर प्रदान करती है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत मध्य एशियाई देशों के साथ अपने आर्थिक संबंधों को व्यापक रणनीतिक ढाँचे में मज़बूत कर रहा है।
आगे की राह
दोनों देशों के कारोबारी समुदाय से उम्मीद की जा रही है कि बिजनेस फोरम में हुई चर्चाओं के बाद ठोस निवेश प्रस्ताव सामने आएंगे। गौरतलब है कि वर्तमान द्विपक्षीय व्यापार स्तर को देखते हुए तीन वर्षों में दोगुना करने का लक्ष्य महत्वाकांक्षी है, और इसकी सफलता दोनों पक्षों की नीतिगत प्रतिबद्धता और निजी क्षेत्र की सक्रियता पर निर्भर करेगी।