30 अगस्त 2026
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भारत-उज्बेकिस्तान व्यापक रणनीतिक साझेदारी: मोदी ने बौद्ध धरोहर संरक्षण और 2030 तक $5 अरब व्यापार का लक्ष्य रखा

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भारत-उज्बेकिस्तान व्यापक रणनीतिक साझेदारी: मोदी ने बौद्ध धरोहर संरक्षण और 2030 तक $5 अरब व्यापार का लक्ष्य रखा

सारांश

ताशकंद में 15 वर्षों की साझेदारी को नई ऊँचाई मिली — भारत और उज्बेकिस्तान ने व्यापक रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की, बौद्ध धरोहर संरक्षण का संकल्प लिया और 2030 तक व्यापार को $1 अरब से $5 अरब तक ले जाने का लक्ष्य तय किया।

मुख्य बातें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव ने 30 अगस्त 2026 को ताशकंद में द्विपक्षीय संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी का दर्जा देने की घोषणा की।
दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार $5 अरब तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा; वर्तमान में यह $1 अरब से अधिक है।
उज्बेकिस्तान में बौद्ध धरोहर स्थलों के संयुक्त संरक्षण पर सहमति बनी।
उज्बेकिस्तान में हिंदी भाषा के प्रसार के लिए छात्रवृत्तियों की घोषणा की गई।
रक्षा क्षेत्र में संयुक्त उत्पादन और संयुक्त विकास को बढ़ावा देने पर सहमति; आतंकवाद के विरुद्ध 'जीरो टॉलरेंस' की साझा प्रतिबद्धता दोहराई गई।
2026 भारत-उज्बेकिस्तान रणनीतिक साझेदारी का 15वाँ वर्ष है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 30 अगस्त 2026 को ताशकंद में उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव के साथ शिखर वार्ता के बाद घोषणा की कि भारत और उज्बेकिस्तान अपने द्विपक्षीय संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक उन्नत कर रहे हैं। संयुक्त प्रेस वार्ता में मोदी ने कहा कि दोनों देश रक्षा, व्यापार, कृषि, स्वास्थ्य, पारंपरिक चिकित्सा, पर्यटन और सांस्कृतिक क्षेत्रों में सहयोग को नई गहराई देंगे। यह साझेदारी ऐसे समय में आई है जब 2026 दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी का 15वाँ वर्ष है।

बौद्ध विरासत संरक्षण: साझा सभ्यतागत प्रतिबद्धता

शिखर वार्ता का एक उल्लेखनीय बिंदु उज्बेकिस्तान में स्थित बौद्ध धरोहर स्थलों के संयुक्त संरक्षण का संकल्प रहा। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, 'आज हमने अपने साझा विरासत के संबंधों को और मजबूत करने पर विशेष जोर दिया है। हम उज्बेकिस्तान के बौद्ध हेरिटेज साइट्स के संरक्षण के लिए मिलकर काम करेंगे।' गौरतलब है कि मध्य एशिया में बौद्ध धर्म का ऐतिहासिक प्रसार भारत से हुआ था, और उज्बेकिस्तान में कई प्राचीन बौद्ध स्थल हैं जो अभी तक पर्याप्त संरक्षण से वंचित हैं।

व्यापार और आर्थिक सहयोग

प्रधानमंत्री ने बताया कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार $1 अरब का आँकड़ा पार कर चुका है, और अब 2030 तक इसे $5 अरब तक ले जाने का लक्ष्य तय किया गया है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए बाज़ार पहुँच, संपर्क व्यवस्था, बैंकिंग और भुगतान प्रणाली में सुधार पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। बुनियादी ढाँचे के विकास में भी दोनों देश मिलकर काम करेंगे।

कृषि, स्वास्थ्य और पारंपरिक चिकित्सा

मोदी ने रेखांकित किया कि उज्बेकिस्तान की बागवानी विशेषज्ञता और भारत की आधुनिक कृषि पद्धतियाँ एक-दूसरे की पूरक हैं, जो दोनों देशों की खाद्य सुरक्षा को मज़बूत कर सकती हैं। इसी तरह, उज्बेकिस्तान की औषधीय जड़ी-बूटियाँ और भारत का आयुर्वेदिक ज्ञान पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में सहयोग का स्वाभाविक आधार बनाते हैं। दोनों देशों के बीच पारंपरिक चिकित्सा पर एक समझौते पर भी सहमति बनी।

रक्षा, सुरक्षा और आतंकवाद-विरोध

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, 'भारत और उज्बेकिस्तान के बीच करीबी रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग दोनों देशों के बीच गहरे विश्वास को दर्शाता है।' उन्होंने बताया कि आने वाले समय में दोनों देशों के रक्षा उद्योगों के बीच संयुक्त उत्पादन और संयुक्त विकास को प्रोत्साहित किया जाएगा। आतंकवाद, चरमपंथ और अलगाववाद के विरुद्ध मोदी ने कहा, 'तीनों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस हमारी साझा प्रतिबद्धता रही है और आगे भी रहेगी।'

युवा संपर्क और हिंदी भाषा प्रसार

शिखर वार्ता में दोनों देशों के युवाओं, विद्यार्थियों और पेशेवरों के बीच संपर्क को प्राथमिकता देने पर सहमति बनी। मोदी ने उज्बेकिस्तान में हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए छात्रवृत्तियों की घोषणा करते हुए कहा, 'मुझे आज उज्बेकिस्तान में हिंदी भाषा को बढ़ावा देने के लिए छात्रवृत्तियों की घोषणा करते हुए प्रसन्नता हो रही है।' पर्यटन सहयोग के लिए दोनों देशों के बीच 'प्रोग्राम ऑफ कोऑपरेशन' पर भी सहमति बनी। साझेदारी को केवल राजधानियों तक सीमित न रखते हुए, दोनों देश शहरों और राज्यों के स्तर पर भी संपर्क विकसित करेंगे — जो इस कूटनीतिक पहल की व्यापकता को रेखांकित करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

म्यांमार और अब मध्य एशिया में भी आज़मा रहा है। हालाँकि, $1 अरब से $5 अरब व्यापार का लक्ष्य महत्वाकांक्षी है — इसके लिए संपर्क बाधाओं और रुपये-सोम भुगतान प्रणाली की व्यावहारिक चुनौतियों को पहले सुलझाना होगा, जो अभी तक अनसुलझी हैं।
RashtraPress
30 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत और उज्बेकिस्तान की व्यापक रणनीतिक साझेदारी क्या है?
यह दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों का औपचारिक उन्नयन है, जिसकी घोषणा 30 अगस्त 2026 को ताशकंद में प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मिर्जियोयेव की शिखर वार्ता के बाद की गई। इसमें रक्षा, व्यापार, कृषि, स्वास्थ्य, पारंपरिक चिकित्सा, पर्यटन और सांस्कृतिक सहयोग शामिल हैं।
उज्बेकिस्तान में बौद्ध धरोहर संरक्षण में भारत की क्या भूमिका होगी?
दोनों देशों ने उज्बेकिस्तान में स्थित बौद्ध धरोहर स्थलों के संयुक्त संरक्षण पर सहमति जताई है। प्रधानमंत्री मोदी ने इसे साझा सभ्यतागत विरासत का हिस्सा बताते हुए कहा कि दोनों देश मिलकर इन स्थलों की सुरक्षा के लिए काम करेंगे।
भारत-उज्बेकिस्तान व्यापार का 2030 तक क्या लक्ष्य है?
दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को मौजूदा $1 अरब से बढ़ाकर $5 अरब तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए बाज़ार पहुँच, संपर्क व्यवस्था, बैंकिंग और भुगतान प्रणाली में सुधार पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
उज्बेकिस्तान में हिंदी भाषा के प्रसार के लिए क्या घोषणा की गई?
प्रधानमंत्री मोदी ने उज्बेकिस्तान में हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए छात्रवृत्तियाँ देने की घोषणा की। यह युवा संपर्क और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने की व्यापक पहल का हिस्सा है।
भारत-उज्बेकिस्तान रक्षा सहयोग में क्या नया है?
दोनों देशों ने रक्षा उद्योगों के बीच सीधे संपर्क, संयुक्त उत्पादन और संयुक्त विकास को बढ़ावा देने पर सहमति जताई है। साथ ही आतंकवाद, चरमपंथ और अलगाववाद के विरुद्ध 'जीरो टॉलरेंस' की साझा प्रतिबद्धता दोहराई गई।
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