भारत-उज्बेकिस्तान व्यापार 2030 तक $5 बिलियन का लक्ष्य, मोदी को सर्वोच्च राजकीय सम्मान
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उज्बेकिस्तान दौरे पर वहाँ के राष्ट्रपति द्वारा देश के सर्वोच्च राजकीय सम्मान 'ऑर्डर ऑफ फ्रेंडशिप ऑफ द हाईएस्ट डिग्री' से नवाज़ा गया। विदेश सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने बताया कि इस यात्रा में यूरेनियम की दीर्घकालिक आपूर्ति पर सकारात्मक वार्ता हुई और दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 1 बिलियन से बढ़ाकर 5 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँचाने का संकल्प लिया।
दौरे का मुख्य घटनाक्रम
विदेश सचिव सिबी जॉर्ज के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी शनिवार शाम ताशकंद पहुँचे, जहाँ उज्बेकिस्तान गणराज्य के राष्ट्रपति ने हवाई अड्डे पर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। कार्यक्रम के तहत, प्रधानमंत्री ने यंगी उज्बेकिस्तान पार्क स्थित इंडिपेंडेंस मॉन्यूमेंट पर पुष्पांजलि अर्पित की। बाद में राष्ट्रपति ने उनके सम्मान में एक निजी रात्रिभोज का आयोजन किया।
सिबी जॉर्ज ने कहा, 'यह सम्मान उज्बेकिस्तान द्वारा भारत के साथ अपने संबंधों को दी जाने वाली अहमियत और द्विपक्षीय संबंधों को मज़बूत करने में प्रधानमंत्री मोदी के योगदान को दर्शाता है।'
व्यापार और आर्थिक सहयोग
दोनों देशों के बीच फिलहाल व्यापार लगभग 1 बिलियन अमेरिकी डॉलर है। दोनों नेताओं ने इसे 2030 तक पाँच गुना बढ़ाकर 5 बिलियन डॉलर करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। वार्ता का केंद्र खनिज संसाधन, वस्त्र उद्योग, स्वास्थ्य सेवाएँ, फार्मास्यूटिकल्स, कृषि और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में आर्थिक सहयोग को गहरा करना रहा।
गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को विविध स्रोतों से मज़बूत करने की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रहा है। यूरेनियम की दीर्घकालिक आपूर्ति पर सकारात्मक बातचीत इस संदर्भ में विशेष महत्त्व रखती है।
रणनीतिक साझेदारी का नया ढाँचा
विदेश सचिव ने बताया कि दोनों पक्ष विदेश मंत्री स्तर पर एक समन्वय तंत्र स्थापित करने पर सहमत हुए, जो साझेदारी के विभिन्न पहलुओं पर अनुवर्ती कार्रवाई और दिशा-निर्देश सुनिश्चित करेगा। उन्होंने कहा कि इस दौरे ने शिक्षा, व्यापार, संस्कृति, पारंपरिक चिकित्सा, पर्यावरण और खनन सहित कई क्षेत्रों में सहयोग को नई गति दी है।
सिबी जॉर्ज के अनुसार, 'इस दौरे से भारत-उज्बेकिस्तान संबंधों को एक बड़ी रणनीतिक साझेदारी की दिशा में ले जाने का मज़बूत ढाँचा तैयार हुआ है।'
आगे की राह
दोनों नेताओं ने अपने संयुक्त वक्तव्य में कई नई पहलों की घोषणा की, जिनका विवरण आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है। विदेश मंत्री स्तर के समन्वय तंत्र के ज़रिए इन पहलों पर अमल की निगरानी की जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य एशिया में भारत की बढ़ती कूटनीतिक सक्रियता इस क्षेत्र में दीर्घकालिक रणनीतिक हितों को साधने की व्यापक कोशिश का हिस्सा है।