यूसीसी को 'काला कानून' बताते हुए उमंग सिंघार का ऐलान — 2028 में कांग्रेस सरकार बनी तो होगा खात्मा
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने 30 अगस्त 2026 को भोपाल में एक स्पष्ट राजनीतिक चेतावनी दी — यदि 2028 के विधानसभा चुनावों में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) सत्ता में लौटती है, तो समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को निरस्त कर दिया जाएगा। उन्होंने इस कानून को सीधे तौर पर 'काला कानून' करार दिया। यह बयान उस समय आया है जब मध्य प्रदेश में यूसीसी कानून को लेकर राजनीतिक तापमान पहले से ही ऊँचा है।
किस मंच से आया यह बयान
भोपाल में कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद द्वारा आयोजित 'जंग-ए-आज़ादी — उलेमा की कुर्बानी' कार्यक्रम में बोलते हुए सिंघार ने कहा कि कांग्रेस के सत्ता में वापस आने पर यूसीसी कानून को रद्द करना पार्टी की प्राथमिकता होगी। इस कार्यक्रम के मंच और संदर्भ ने बयान को और अधिक राजनीतिक महत्व दे दिया है।
मध्य प्रदेश में यूसीसी का विधायी सफर
मध्य प्रदेश सरकार ने 20 जुलाई को आयोजित एक विशेष कैबिनेट बैठक में यूनिफॉर्म सिविल कोड विधेयक 2026 को मंजूरी दी। इसके अगले ही दिन, 21 जुलाई को, यह विधेयक विधानसभा में पारित हो गया। विधानसभा में पारित होने की प्रक्रिया के दौरान कांग्रेस विधायकों ने विधेयक को प्रवर समिति (सेलेक्ट कमेटी) के पास भेजने की माँग की थी, जिसके चलते सदन में हंगामा भी हुआ था।
कानून के प्रमुख प्रावधान
मध्य प्रदेश के यूसीसी कानून में कई महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल हैं। इनमें बहुविवाह पर प्रतिबंध, विवाह का अनिवार्य पंजीकरण और लिव-इन संबंधों का अनिवार्य पंजीकरण प्रमुख हैं। हालाँकि, अनुसूचित जनजातियों (एसटी) को इस कानून के दायरे से बाहर रखा गया है।
व्यापक रूप से, समान नागरिक संहिता का उद्देश्य धर्म-आधारित व्यक्तिगत कानूनों के स्थान पर विवाह, तलाक, संपत्ति के उत्तराधिकार, भरण-पोषण, गोद लेने और परिवार से जुड़े अन्य मामलों में एक समान कानूनी व्यवस्था लागू करना है। संविधान का अनुच्छेद 44 राज्य को यह निर्देश देता है, यद्यपि यह राज्य के नीति-निर्देशक तत्वों का हिस्सा है और न्यायालय में प्रवर्तनीय नहीं है।
विपक्ष और समर्थकों की दलीलें
कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों का तर्क है कि एक समान कानून विभिन्न समुदायों की धार्मिक और पारंपरिक प्रथाओं को प्रभावित कर सकता है। आलोचकों ने आदिवासी समाज की परंपराओं और उन्हें प्राप्त संवैधानिक संरक्षण पर पड़ने वाले संभावित असर को लेकर भी सवाल उठाए हैं।
दूसरी ओर, राज्य सरकार का कहना है कि यह कानून सभी नागरिकों को समान अधिकार सुनिश्चित करेगा और विशेष रूप से विवाह, तलाक व संपत्ति विवादों में महिलाओं को अधिक कानूनी सुरक्षा प्रदान करेगा। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने यूसीसी का खुलकर समर्थन किया है और इसे समानता तथा सामाजिक सौहार्द से जोड़कर देखा है।
आगे की राजनीतिक राह
सिंघार का यह बयान यूसीसी को 2028 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनावों के लिए एक केंद्रीय राजनीतिक मुद्दे के रूप में स्थापित करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) यूसीसी को अपनी सामाजिक न्याय की पहचान के रूप में प्रस्तुत कर रही है। दोनों पक्षों के बीच यह टकराव आने वाले महीनों में और तेज होने की संभावना है।