नेपाल बाढ़: NFSU की 10 सदस्यीय टीम ने शुरू की डीएनए पहचान, 734 मौतें, 2,498 लापता
सारांश
मुख्य बातें
नेशनल फोरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी (NFSU), गांधीनगर की 10 सदस्यीय विशेषज्ञ टीम नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के पीड़ितों की डीएनए-आधारित पहचान के लिए नेपाल पहुँच गई है। 30 अगस्त 2026 तक नेपाल में 734 लोगों की मौत और 2,498 लोगों के लापता होने की पुष्टि हो चुकी है, जबकि तिब्बत में 16 मौतें और 546 लापता होने की खबर है।
मिशन की पृष्ठभूमि
टीम की अगुवाई NFSU गांधीनगर कैंपस के 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन डीएनए फोरेंसिक्स' के प्रमुख डॉ. भार्गव पटेल कर रहे हैं। यह दल शनिवार रात गुजरात से रवाना होकर नेपाल पहुँचा। भारत के विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय की संयुक्त देखरेख में स्थानीय नेपाली अधिकारियों के साथ मिलकर 'डिज़ास्टर विक्टिम आइडेंटिफिकेशन' (DVI) प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू कर दी गई है।
यह तैनाती विशेष रूप से उन अज्ञात शवों और मानव अवशेषों की पहचान के लिए की गई है, जिन्हें पारंपरिक दृश्य-पहचान के तरीकों से शिनाख्त करना संभव नहीं है।
डीएनए पहचान प्रक्रिया
DVI पद्धति के तहत बरामद शवों या मानव अवशेषों से लिए गए डीएनए नमूनों का मिलान लापता व्यक्तियों के परिजनों के नमूनों से किया जाएगा। NFSU के अनुसार, गांधीनगर स्थित उसके सेंटर के पास इस ऑपरेशन के लिए आधुनिक उपकरण और पर्याप्त डीएनए किट उपलब्ध हैं।
विशेषज्ञ स्वतंत्र रूप से काम करने के बजाय नेपाली अधिकारियों के साथ समन्वय बनाकर पहचान प्रक्रिया में सहयोग करेंगे। खबरों के अनुसार, नेपाली अधिकारी अज्ञात अवशेषों को सुरक्षित रखने के लिए कई जिलों के अस्पतालों का उपयोग कर रहे हैं।
आपदा का व्यापक असर
रविवार तक कुल मृतक संख्या लगभग 750 तक पहुँच गई थी, जबकि 3,000 से अधिक लोग लापता बताए जा रहे हैं। ऑपरेशन के विशाल पैमाने के कारण शवों को सुरक्षित रखने की सुविधाओं की भी कमी सामने आई है।
गौरतलब है कि जलविद्युत परियोजनाओं में कार्यरत 900 से अधिक कर्मचारियों के लापता होने की भी खबर है, जिससे बचाव और पहचान अभियान में एक और गंभीर चुनौती जुड़ गई है। यह ऐसे समय में आया है जब सर्च टीमें टूटी सड़कों, ध्वस्त पुलों, लगातार बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर जैसी बाधाओं से जूझ रही हैं।
भारत सरकार की भूमिका
विदेश मंत्रालय ने सहायता का समन्वय करने और बाढ़-प्रभावित भारतीय नागरिकों की जानकारी उपलब्ध कराने के लिए 24 घंटे सक्रिय एक नियंत्रण कक्ष (कंट्रोल रूम) स्थापित किया है। नेपाल में हजारों सैनिक और पुलिसकर्मी बचाव कार्य में लगे हुए हैं।
आगे की राह
जैसे-जैसे बचाव और रिकवरी का काम आगे बढ़ेगा और अधिक अवशेष मिलेंगे, NFSU की टीम स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर फोरेंसिक सहायता जारी रखेगी। इस अभियान की सफलता न केवल पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने में बल्कि भविष्य की आपदाओं में भारत-नेपाल फोरेंसिक सहयोग की नींव रखने में भी अहम भूमिका निभाएगी।