तिब्बत बाढ़ त्रासदी: चीन पर आपदा वीडियो डिलीट करने के आरोप, नेपाल में 734 मौतें
सारांश
मुख्य बातें
तिब्बत में 26 अगस्त 2026 को ग्लेशियर टूटने से आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के बाद, रिपोर्टों के अनुसार चीन अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से तबाही को दर्शाने वाले नागरिक वीडियो कथित तौर पर हटा रहा है। इस आपदा की चपेट में नेपाल, तिब्बत और उत्तरी भारत तक के इलाके आए हैं, और संयुक्त रूप से मरने वालों की संख्या 750 को पार कर गई है जबकि 3,000 से अधिक लोग अभी भी लापता हैं।
आपदा का मुख्य घटनाक्रम
रिपोर्टों के अनुसार, ग्लेशियर के टूटने से ल्हेंडे खोला नदी में कीचड़, चट्टान और पानी का विशाल सैलाब आया, जो आगे भोटे कोशी और त्रिशूली नदी प्रणालियों में फैल गया। इससे नेपाल-तिब्बत सीमा पर भारी तबाही हुई। सुरक्षा कैमरों की फुटेज में ग्यिरोंग पोर्ट पर इमारतों पर कीचड़ और मलबे की विशाल दीवार गिरते हुए दिखी, जबकि लोग जान बचाने के लिए भागते नजर आए। इस फुटेज की बाद में अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने पुष्टि की।
हताहतों की संख्या और प्रभावित क्षेत्र
28 अगस्त तक नेपाल में 579 मौतें दर्ज हो चुकी थीं और लगभग 1,924 लोग लापता थे। बाद में अकेले नेपाल में मृतकों की संख्या 734 और लापता लोगों की संख्या 2,498 हो गई। तिब्बत के ग्यिरोंग काउंटी में आधिकारिक तौर पर 5 मौतें और 558 लोगों के लापता होने की सूचना मिली, जिनमें 260 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। उत्तरी भारत में नदियों से 10 शव भी बरामद किए गए।
चीन पर सेंसरशिप के आरोप
एक भूटानी पत्रकार ने चीनी प्लेटफॉर्म से बाढ़ की फुटेज हटाए जाने पर प्रकाश डाला और इस बात पर जोर दिया कि यह सामग्री राजनीतिक विरोध नहीं, बल्कि आपदा का दस्तावेज़ीकरण था। रिपोर्टों के अनुसार, वीबो और डॉयिन जैसे चीनी प्लेटफॉर्म पर नागरिकों द्वारा फिल्माए गए वीडियो हटाए जा रहे थे, जबकि जो सामग्री बची वह मुख्यतः बचाव अभियानों और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के निर्देशों पर केंद्रित आधिकारिक बयान थे। इसके विपरीत, नेपाल में पत्रकारों को प्रभावित इलाकों तक पूरी पहुँच मिली।
आपदा के कारणों पर सवाल
शुरुआती रिपोर्टों में भूकंप को कारण बताया गया था, लेकिन अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) ने शुरू में 4.4 तीव्रता की भूकंपीय घटना दर्ज की थी। बाद में पता चला कि यह संकेत भूकंप नहीं, बल्कि भूस्खलन से ही उत्पन्न हुआ था। सैटेलाइट तस्वीरों में ग्लेशियर और चट्टान का बड़ा हिस्सा टूटते हुए दिखा, जिसके बाद बर्फ और चट्टान के हिमस्खलन ने नदी को अस्थायी रूप से अवरुद्ध किया और फिर यह प्राकृतिक बाँध टूट गया। रिपोर्टों में नेपाल में तिब्बती पक्ष से बहकर आए विस्फोटक उपकरणों और संभावित निर्माण या सुरंग-निर्माण गतिविधियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं, हालाँकि इन सवालों के जवाब अभी अनुत्तरित हैं।
तीन देशों तक फैला असर और आगे की चिंताएँ
यह आपदा केवल सीमा पर नहीं रुकती। ल्हेंडे खोला से भोटे कोशी, फिर त्रिशूली और अंततः भारत में गंडक नदी बनने वाली यह जल-प्रणाली तीन देशों को प्रभावित करती है। रिपोर्टों के अनुसार, तिब्बत में विदेशियों की पहुँच पर पाबंदी और नागरिक फुटेज के गायब होने से स्वतंत्र आकलन की संभावना सीमित हो गई है। यह ऐसे समय में आया है जब जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालयी ग्लेशियरों के टूटने की घटनाएँ बढ़ रही हैं और सीमा-पार आपदा प्रबंधन में पारदर्शिता की माँग तेज हो रही है।