30 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

तिब्बत बाढ़-भूस्खलन: लापता विदेशी नागरिकों के लिए 24 घंटे हेल्पलाइन शुरू, 16 मौतें, 546 लापता

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
तिब्बत बाढ़-भूस्खलन: लापता विदेशी नागरिकों के लिए 24 घंटे हेल्पलाइन शुरू, 16 मौतें, 546 लापता

सारांश

तिब्बत में 26 अगस्त को ग्लेशियर टूटने से आई बाढ़ और भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई — 16 मौतें, 546 लापता। भारतीय दूतावास ने परिजनों के लिए दो 24 घंटे अंग्रेजी हेल्पलाइन जारी कीं। नेपाल में भी त्रिशूली नदी सामान्य से तीन मीटर ऊपर, अलर्ट जारी।

मुख्य बातें

26 अगस्त 2025 को तिब्बत में ग्लेशियर टूटने से आई बाढ़ और भूस्खलन में कम से कम 16 मौतें , 546 लोग लापता ।
बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास ने लापता विदेशी नागरिकों के परिजनों के लिए हेल्पलाइन नंबर 0086-891-6817165 और 0086-183-0802-6705 जारी किए।
हेल्पलाइन 24 घंटे सक्रिय हैं और अंग्रेजी भाषा में सेवा देती हैं।
नेपाल में NDRRMA ने रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग और चितवन जिलों के लिए बाढ़ चेतावनी जारी की।
त्रिशूली नदी का जलस्तर धाडिंग जिले में सामान्य से करीब तीन मीटर ऊपर पहुँचा।

चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र (TAR) में 26 अगस्त 2025 को आई अचानक बाढ़ और भूस्खलन के बाद लापता विदेशी नागरिकों की तलाश जारी है। बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास ने जानकारी दी है कि TAR के अधिकारियों ने लापता विदेशी नागरिकों के परिजनों की सहायता के लिए दो विशेष 24 घंटे अंग्रेजी भाषा हेल्पलाइन सक्रिय की हैं। इस आपदा में चीन की ओर अब तक कम से कम 16 लोगों की मौत हो चुकी है और 546 लोग लापता बताए गए हैं।

हेल्पलाइन नंबर और दूतावास की अपील

भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए बताया कि TAR के अधिकारियों ने लापता विदेशी नागरिकों के बारे में जानकारी पाने के इच्छुक परिवारों की सहायता के लिए ये हेल्पलाइन शुरू की हैं। परिजन हॉटलाइन नंबर 0086-891-6817165 और 0086-183-0802-6705 पर संपर्क कर सकते हैं। ये नंबर विशेष रूप से उन परिवारों के लिए उपयोगी हैं जो चीन के बाहर रहते हैं और अपने प्रियजनों की खोज-खबर लेना चाहते हैं।

आपदा का विवरण और व्यापक नुकसान

यह विनाशकारी आपदा 26 अगस्त, बुधवार को हिमालयी क्षेत्र में एक ग्लेशियर के टूटने के बाद आई, जिससे तेज़ बाढ़ का पानी और मलबा चीन-नेपाल सीमा से लगे इलाकों में फैल गया। कई सड़कें, पुल और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए, जिससे प्रभावित क्षेत्रों तक राहत पहुँचाना बेहद मुश्किल हो गया है। गौरतलब है कि हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर पिघलने की बढ़ती दर के चलते इस तरह की आकस्मिक बाढ़ की घटनाएँ पिछले कुछ वर्षों में अधिक बार देखी जा रही हैं।

नेपाल में भी बाढ़ का खतरा बरकरार

पड़ोसी देश नेपाल में भी स्थिति गंभीर बनी हुई है। नेपाल की राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) ने रविवार को बाढ़ संबंधी चेतावनी जारी करते हुए बताया कि रसुवा जिले की भोटेसी नदी का जलस्तर खतरनाक स्तर तक बढ़ गया है। प्राधिकरण ने रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग और चितवन जिलों में खोज, बचाव और राहत कार्यों में लगे सभी लोगों तथा नदी किनारे रहने वाले नागरिकों से सतर्क रहने का अनुरोध किया है।

नेपाल के जल एवं मौसम विज्ञान विभाग के अंतर्गत आने वाले बाढ़ पूर्वानुमान प्रभाग के अनुसार, धाडिंग जिले के गल्छी क्षेत्र में त्रिशूली नदी का जलस्तर सामान्य स्तर से करीब तीन मीटर ऊपर पहुँच गया है। लगातार खराब मौसम और वर्षा के कारण स्थिति और बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है।

राहत एवं बचाव कार्य

चीनी और नेपाली अधिकारी प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव अभियान जारी रखे हुए हैं, हालाँकि क्षतिग्रस्त सड़कों और पुलों के कारण दुर्गम इलाकों तक पहुँचना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। यह ऐसे समय में आया है जब हिमालयी क्षेत्र में मानसून का मौसम अभी भी सक्रिय है, जिससे और अधिक बारिश और संभावित भूस्खलन का खतरा बना हुआ है।

आगे की स्थिति

अधिकारियों ने नदी किनारे बसे समुदायों और राहत कर्मियों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। भारतीय दूतावास की ओर से जारी इस एडवाइजरी से भारतीय नागरिकों और उनके परिजनों को तिब्बत में लापता हुए विदेशी नागरिकों की जानकारी प्राप्त करने में सहायता मिलने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ ग्लेशियर पिघलने की दर तेज़ होने से आकस्मिक बाढ़ें अब असामान्य नहीं रहीं। 546 लापता लोगों का आँकड़ा चिंताजनक है, और दुर्गम भूगोल के कारण वास्तविक संख्या और अधिक हो सकती है। भारतीय दूतावास द्वारा हेल्पलाइन नंबर जारी करना एक ज़रूरी कदम है, लेकिन यह सवाल भी उठता है कि क्या भारत-चीन-नेपाल के बीच आपदा प्रबंधन में वास्तविक समय की सूचना-साझेदारी का कोई ठोस तंत्र मौजूद है।
RashtraPress
30 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तिब्बत में आई बाढ़ और भूस्खलन की हेल्पलाइन नंबर क्या हैं?
तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र के अधिकारियों ने दो 24 घंटे अंग्रेजी हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं: 0086-891-6817165 और 0086-183-0802-6705। ये नंबर लापता विदेशी नागरिकों के परिजनों के लिए हैं।
तिब्बत बाढ़ में कितने लोग मारे गए और कितने लापता हैं?
26 अगस्त 2025 को आई बाढ़ और भूस्खलन में चीन की ओर अब तक कम से कम 16 लोगों की मौत हो चुकी है और 546 लोग लापता बताए गए हैं। सड़कों और पुलों के क्षतिग्रस्त होने से राहत कार्य बाधित हो रहा है।
तिब्बत में बाढ़ कैसे आई?
हिमालयी क्षेत्र में एक ग्लेशियर के टूटने के बाद अचानक बाढ़ और भूस्खलन आया, जिसने चीन-नेपाल सीमा से लगे इलाकों को बुरी तरह प्रभावित किया। यह आपदा 26 अगस्त, बुधवार को आई थी।
नेपाल में बाढ़ की स्थिति क्या है?
नेपाल की NDRRMA ने रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग और चितवन जिलों के लिए बाढ़ चेतावनी जारी की है। धाडिंग जिले के गल्छी क्षेत्र में त्रिशूली नदी का जलस्तर सामान्य से करीब तीन मीटर ऊपर पहुँच गया है।
भारतीय दूतावास ने इस आपदा में क्या भूमिका निभाई है?
बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास ने एक्स पर पोस्ट कर TAR के अधिकारियों द्वारा जारी 24 घंटे हेल्पलाइन नंबर भारतीय नागरिकों और परिजनों तक पहुँचाए हैं। दूतावास ने इन नंबरों के ज़रिए लापता विदेशी नागरिकों की जानकारी लेने की अपील की है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 13 घंटे पहले
  2. 13 घंटे पहले
  3. कल
  4. कल
  5. 2 दिन पहले
  6. 3 दिन पहले
  7. 3 दिन पहले
  8. 3 दिन पहले