30 अगस्त 2026
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ओडिशा सरकार का बड़ा फैसला: गुजारा भत्ता न देने वाले सरकारी कर्मचारियों की सैलरी से सीधे कटेगी रकम

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ओडिशा सरकार का बड़ा फैसला: गुजारा भत्ता न देने वाले सरकारी कर्मचारियों की सैलरी से सीधे कटेगी रकम

सारांश

ओडिशा में अब न्यायालय का आदेश होने के बावजूद गुजारा भत्ता न देने वाले सरकारी कर्मचारियों की सैलरी से सीधे रकम काटी जाएगी। CM माझी का यह कदम उन महिलाओं और बच्चों की लड़ाई को प्रशासनिक ताकत देता है जो हर शिकायत सुनवाई में न्याय माँगते आ रहे थे।

मुख्य बातें

ओडिशा सरकार ने 30 अगस्त को नई गाइडलाइन जारी की — न्यायालय का आदेश होने पर सरकारी कर्मचारी की सैलरी से सीधे गुजारा भत्ता कटेगा।
DDO (ड्राइंग एंड डिस्बर्सिंग ऑफिसर) को मासिक वेतन बिल से कटौती कर पत्नी-बच्चों के खाते में इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसफर की जिम्मेदारी दी गई।
राज्य स्तरीय शिकायत सुनवाई में हर बार 2-3 शिकायतें गुजारा भत्ता न मिलने की आती थीं।
HRMS से एकीकरण का निर्देश — प्रक्रिया को स्वचालित और पारदर्शी बनाने का लक्ष्य।
CM मोहन चरण माझी ने कोर्ट आदेश की अवहेलना को 'पूरी तरह अस्वीकार्य' करार दिया।

ओडिशा सरकार ने उन सरकारी कर्मचारियों के विरुद्ध कड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है जो न्यायालय के स्पष्ट आदेश के बावजूद अपनी पत्नी या बच्चों को गुजारा भत्ता अदा नहीं करते। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के निर्देश पर जारी नई गाइडलाइन के तहत अब ऐसे कर्मचारियों के मासिक वेतन से न्यायालय-निर्धारित राशि सीधे काटकर पत्नी और बच्चों के बैंक खातों में इलेक्ट्रॉनिक रूप से अंतरित की जाएगी। मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) की ओर से रविवार, 30 अगस्त को यह बयान जारी किया गया।

शिकायतों की पृष्ठभूमि

राज्य स्तरीय शिकायत सुनवाई के दौरान प्रत्येक बैठक में दो से तीन ऐसी शिकायतें नियमित रूप से सामने आ रही थीं, जिनमें महिलाएँ और बच्चे सरकारी कर्मचारियों द्वारा भरण-पोषण राशि न देने की पीड़ा लेकर आते थे। तलाक से जुड़े मामलों में एलिमनी न मिलने की भी इसी प्रकार की शिकायतें दर्ज हुईं। यह ऐसे समय में आया है जब महिला सुरक्षा और न्यायिक आदेशों के अनुपालन को लेकर देशभर में बहस तेज है।

नई गाइडलाइन: DDO की जिम्मेदारी

नई व्यवस्था के अनुसार, विभागीय ड्राइंग एंड डिस्बर्सिंग ऑफिसर (DDO) को कटौती की सीधी जिम्मेदारी सौंपी गई है। जैसे ही भरण-पोषण के भुगतान का न्यायालय-आदेश प्राप्त होगा, DDO मासिक वेतन बिल तैयार करते समय निर्धारित राशि काटकर उसे संबंधित परिवार के बैंक खाते में इलेक्ट्रॉनिक रूप से जमा कर देगा। इससे पीड़ित पक्ष को बार-बार दफ्तरों के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं रहेगी।

HRMS से एकीकरण का निर्देश

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि न्यायालय-निर्देशित भरण-पोषण के सभी मामलों को ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट सिस्टम (HRMS) से जोड़ा जाए। इसका उद्देश्य प्रक्रिया को स्वचालित और पारदर्शी बनाना है, ताकि न्यायिक आदेशों का समय पर पालन सुनिश्चित हो सके और मानवीय हस्तक्षेप पर निर्भरता घटे।

मुख्यमंत्री की कड़ी चेतावनी

मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने इस मसले पर स्पष्ट शब्दों में कहा, 'राज्य का सरकारी कर्मचारी होते हुए कोर्ट के आदेश की अवहेलना करना और अपनी पत्नी और बच्चों के साथ ऐसा अन्याय करना राज्य सरकार के लिए पूरी तरह अस्वीकार्य है।' गौरतलब है कि सरकारी कर्मचारियों द्वारा न्यायालय के आदेशों की अनदेखी एक दीर्घकालिक प्रशासनिक चुनौती रही है, और ओडिशा इसे वेतन प्रणाली से सीधे जोड़ने वाले अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है।

आगे की राह

HRMS एकीकरण लागू होने के बाद यह व्यवस्था पूरी तरह स्वचालित हो जाएगी और किसी भी नए न्यायालय-आदेश के आते ही अगले वेतन चक्र से कटौती स्वतः शुरू हो जाएगी। महिला अधिकार संगठनों ने इस कदम को सकारात्मक बताया है, हालाँकि क्रियान्वयन की गति और HRMS की तकनीकी तैयारी पर नज़र रखी जाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा HRMS एकीकरण की रफ्तार और DDO-स्तर पर जवाबदेही की होगी — क्योंकि भारत में प्रशासनिक सुधारों की घोषणा और उनका जमीनी क्रियान्वयन अक्सर दो अलग कहानियाँ रहे हैं। यह भी ध्यान देने योग्य है कि यह आदेश केवल सरकारी कर्मचारियों पर लागू होता है, जबकि निजी क्षेत्र में गुजारा भत्ता न मिलने की समस्या कहीं अधिक व्यापक है। मुख्यधारा की कवरेज इस सीमा को नज़रअंदाज़ कर रही है। फिर भी, वेतन प्रणाली को न्यायिक अनुपालन से जोड़ने का यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए एक व्यावहारिक उदाहरण बन सकता है।
RashtraPress
30 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ओडिशा सरकार का गुजारा भत्ता कटौती का नया नियम क्या है?
ओडिशा सरकार ने आदेश दिया है कि जो सरकारी कर्मचारी न्यायालय के आदेश के बावजूद पत्नी या बच्चों को गुजारा भत्ता नहीं देते, उनके मासिक वेतन से सीधे वह राशि काटकर संबंधित परिवार के बैंक खाते में भेजी जाएगी। यह जिम्मेदारी विभागीय DDO को सौंपी गई है।
यह नियम कब से लागू होगा और इसकी प्रक्रिया क्या होगी?
30 अगस्त को जारी गाइडलाइन के अनुसार, न्यायालय का आदेश प्राप्त होते ही अगले वेतन चक्र से DDO कटौती शुरू कर देगा। HRMS से एकीकरण के बाद यह प्रक्रिया पूरी तरह स्वचालित हो जाएगी।
HRMS से एकीकरण का क्या मतलब है?
ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट सिस्टम (HRMS) से जुड़ने के बाद गुजारा भत्ता कटौती के सभी मामले डिजिटल रूप से ट्रैक होंगे और मानवीय हस्तक्षेप की जरूरत कम होगी। इससे न्यायिक आदेशों का समय पर पालन सुनिश्चित होगा।
यह नियम किन कर्मचारियों पर लागू होगा?
यह नियम केवल ओडिशा के राज्य सरकारी कर्मचारियों पर लागू होगा जिनके विरुद्ध न्यायालय ने भरण-पोषण या एलिमनी का आदेश दिया हो। निजी क्षेत्र के कर्मचारी इस गाइडलाइन के दायरे में नहीं आते।
CM मोहन चरण माझी ने यह फैसला क्यों लिया?
राज्य स्तरीय शिकायत सुनवाई में हर बैठक में 2-3 शिकायतें गुजारा भत्ता न मिलने की आती थीं। CM माझी ने इसे गंभीरता से लेते हुए कहा कि सरकारी कर्मचारी का कोर्ट आदेश की अनदेखी करना 'पूरी तरह अस्वीकार्य' है।
राष्ट्र प्रेस
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