गिरिराज सिंह का राहुल गांधी पर पलटवार: 'दलित नहीं, सत्ता की चिंता है उन्हें'
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने 30 अगस्त को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के चाय की दुकान वाले बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी दलित समुदाय की वास्तविक चिंताओं को नज़रअंदाज़ करते हुए केवल सत्ता हासिल करने और समाज में फूट डालने की राजनीति कर रहे हैं।
राहुल गांधी का मूल बयान
राहुल गांधी ने शनिवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि चाय की दुकान पर दो तरह के कप होते हैं — एक कप दलितों को दिया जाता है, जिसे इस्तेमाल के बाद फेंक दिया जाता है, जबकि दूसरा कप सवर्ण समाज के लिए होता है, जिसे दोबारा इस्तेमाल किया जाता है। इस बयान ने राजनीतिक हलकों में तत्काल विवाद खड़ा कर दिया।
गिरिराज सिंह का पलटवार
गिरिराज सिंह ने इस बयान पर कड़ा जवाब देते हुए कहा, 'मुझे लगता है कि आजकल राहुल गांधी के मन में यही चल रहा है। उन्हें शायद चाय की दुकान खोल लेनी चाहिए।' उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो का हवाला देते हुए दावा किया कि जिसमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे राहुल गांधी को पानी दे रहे थे, लेकिन राहुल ने वह पानी नहीं पिया। उन्होंने कहा, 'तो वे खुद ही छुआछूत को बढ़ावा दे रहे हैं, जबकि पूरा देश और समाज छुआछूत के विरोध में है।'
गिरिराज सिंह ने यह भी कहा कि जिस चाय की दुकान की तस्वीर राहुल गांधी साझा कर रहे थे, उसमें वे खुद शीशे के गिलास में चाय पी रहे थे जबकि बाकी सब कागज के गिलास में। उन्होंने इसे 'नौटंकी' करार देते हुए कहा, 'मुझे लगता है ये उन्हीं के दिमाग का खुराफात है। अभी वो कैसे देश में सामाजिक स्तर पर समाज को एक दूसरे से लड़ावें, यही उनके दिमाग में चल रहा है।'
दलित राजनीति पर सीधा आरोप
गिरिराज सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'राहुल गांधी को दलित समुदाय की कोई चिंता नहीं है। उन्हें देश पर शासन करने की चिंता है। और सत्ता पाने की इस होड़ में, चाहे पूरा देश आग की लपटों में घिर जाए या दलितों और गैर-दलितों के बीच फूट पड़ जाए, उन्हें कोई परवाह नहीं है।'
खड़गे पर भी निशाना
केंद्रीय मंत्री ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को लेकर भी बयान दिया। उन्होंने कहा, 'पूरा देश यह जानता है कि खड़गे सिर्फ एक मुखौटा हैं। राहुल गांधी जो कुछ भी कहेंगे, वही वे कहेंगे और वे उससे आगे कुछ नहीं बोल सकते।' उन्होंने पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सीताराम केसरी का उदाहरण देते हुए कहा कि जो नेता पार्टी की इच्छा के विरुद्ध बोलता है, उसका हश्र क्या होता है — यह इतिहास बता चुका है।
आगे क्या
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के बीच दलित राजनीति को लेकर बयानबाज़ी तेज़ हो रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दोनों दलों के बीच यह वाकयुद्ध आगामी चुनावी मौसम में और तीखा होने की संभावना है।