गिरिराज सिंह का राहुल गांधी पर हमला: 'अर्बन नक्सल' की भूमिका, संसद में गतिरोध जारी
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने 13 अगस्त को संसद के मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर तीखा प्रहार किया और उन पर 'अर्बन नक्सल' की भूमिका निभाने का आरोप लगाया। यह बयान ऐसे समय आया है जब सदन में नीट पेपर लीक, छात्र आंदोलनों पर पुलिस कार्रवाई और अन्य मुद्दों को लेकर विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच गतिरोध बना हुआ है।
मुख्य घटनाक्रम
संसद के मानसून सत्र में विपक्ष गृह मंत्री अमित शाह से सदन में सीधे जवाब की माँग कर रहा है — खासकर नीट पेपर लीक और विभिन्न राज्यों में छात्र आंदोलनों पर हुई पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर। वहीं सत्ता पक्ष का कहना है कि सरकार चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है, लेकिन विपक्ष अपनी राज्य सरकारों की विफलताओं को छिपाने के लिए सदन से पलायन कर रहा है।
गिरिराज सिंह के तीखे बोल
गिरिराज सिंह ने राहुल गांधी की तुलना 'गाँव के शरारती बच्चे' से करते हुए कहा, 'उनके चेहरे देखिए, उनके भाव देखिए, उनके बात करने के तरीके देखिए। ठीक ही कहा हमारे सांसद ने — वह एक उद्दंड लड़के की तरह काम करते हैं।' उन्होंने आगे कहा, 'वह विपक्ष के नेता हैं और कहते हैं, मैं चुनौती देता हूँ। आप कैसी चुनौती दे रहे हैं? संसदीय प्रणाली की अपनी मर्यादा होती है।'
गिरिराज सिंह ने अमित शाह से तुलना करते हुए कहा, 'उन्होंने काम करके दिखाया है कि कैसे अनुच्छेद 370 और 35ए को हटाया गया और सीएए को लागू किया गया। आप चाहते हैं कि देश में आतंकवाद फैले। आप 'अर्बन नक्सल' की भूमिका निभा रहे हैं। अगर आपमें हिम्मत है, तो संसदीय प्रणाली के अनुरूप बात करें और दूसरों की भी सुनें।'
नीट और राज्यों पर चर्चा का मुद्दा
गिरिराज सिंह ने दावा किया कि राहुल गांधी में नीट पर खुलकर चर्चा करने की हिम्मत नहीं है, क्योंकि ऐसी चर्चा में पंजाब, कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश और झारखंड जैसे कांग्रेस-शासित राज्यों की भी पड़ताल होगी। उन्होंने कहा, 'जब पैलेट गन के मुद्दे पर चर्चा होगी, तो नीट पर भी चर्चा होगी — और तब देश के अन्य राज्यों पर भी बात होगी। इसलिए उनमें हिम्मत नहीं है।'
खड़गे पर निशाना
गिरिराज सिंह ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे पर भी हमला बोला। उनका कहना था कि इतने वरिष्ठ नेता होने के बावजूद खड़गे राहुल गांधी की 'चाटुकारिता' में लगे रहते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यह रवैया कांग्रेस को डुबो देगा और संसदीय प्रणाली को नुकसान पहुँचाएगा।
आगे क्या
गौरतलब है कि मानसून सत्र में यह गतिरोध लगातार बना हुआ है और दोनों पक्षों के बीच सुलह के कोई संकेत अभी नहीं दिख रहे। विपक्ष की माँग है कि गृह मंत्री सदन में आकर जवाब दें, जबकि सत्ता पक्ष नियमों के दायरे में चर्चा पर ज़ोर दे रहा है। आने वाले दिनों में सत्र की दिशा इस गतिरोध के हल पर निर्भर करेगी।