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पेपर लीक पर कड़ा कानून बना चुकी है केंद्र सरकार, विपक्ष छात्रों से नहीं राजनीति से चिंतित: भाजपा

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पेपर लीक पर कड़ा कानून बना चुकी है केंद्र सरकार, विपक्ष छात्रों से नहीं राजनीति से चिंतित: भाजपा

सारांश

पेपर लीक पर सियासी घमासान तेज — भाजपा का दावा है कि सरकार कड़ा कानून बना चुकी है और नीट दोबारा करा चुकी है, जबकि विपक्ष पर आरोप है कि वह छात्रों की आड़ में केवल राजनीति कर रहा है। संसद में बहस की माँग पाँच दिनों से लंबित है।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने 25 जुलाई को कहा कि सरकार पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कानून बना चुकी है।
नीट परीक्षा दोबारा आयोजित की गई और परिणाम शीघ्र घोषित किया गया; प्रवेश प्रक्रिया जारी है।
भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने कहा कि पिछले पाँच दिनों से संसद में बहस की माँग की जा रही है, लेकिन विपक्ष तैयार नहीं।
गिरिराज सिंह ने राहुल गांधी पर आरोप लगाया कि वे विदेश जाकर भारत के खिलाफ एजेंडा फैलाते हैं।
भाजपा ने विपक्ष को याद दिलाया कि कांग्रेस सरकारों के दौर में भी पेपर लीक हुए थे और तब विपक्ष 'खामोश' था।

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने 25 जुलाई को स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कानूनी ढाँचा तैयार कर चुकी है, और विपक्षी दल इस गंभीर मुद्दे का उपयोग छात्रहित के बजाय राजनीतिक लाभ के लिए कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के युवाओं के प्रति पूरी तरह संवेदनशील हैं और सरकार ने बिना देरी के लीक-प्रूफ परीक्षा व्यवस्था की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं।

सरकार के कदम और नीट पुनर्परीक्षा

गिरिराज सिंह ने बताया कि नीट परीक्षा विवाद के बाद दोबारा आयोजित की गई, उसका परिणाम शीघ्रता से घोषित किया गया और अब प्रवेश प्रक्रिया की तैयारियाँ चल रही हैं। उन्होंने विपक्ष को चुनौती देते हुए पूछा कि क्या किसी विपक्षी दल ने प्रधानमंत्री मोदी को कोई ऐसा पत्र लिखा जिसमें छात्रों के हित में कोई ठोस सुझाव दिया गया हो।

उनके अनुसार, सरकार का स्पष्ट संकल्प है कि सभी के सहयोग से प्रतियोगी परीक्षाओं में होने वाली गड़बड़ियों को जड़ से समाप्त किया जाएगा। यह ऐसे समय में आया है जब नीट-यूजी पेपर लीक को लेकर देशभर में छात्रों का आक्रोश चरम पर था।

राहुल गांधी पर सीधा निशाना

गिरिराज सिंह ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर आरोप लगाया कि वे देश में अराजकता का माहौल बनाना चाहते हैं और विदेश जाकर भारत के खिलाफ एजेंडा फैलाते हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष इस मुद्दे को 'राजनीतिक उत्सव' की तरह पेश कर रहा है, जबकि असली ज़रूरत नीतिगत सुधार की है।

रविशंकर प्रसाद की संसद में बहस की माँग

भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने कहा कि पिछले पाँच दिनों से उनकी पार्टी संसद में इस विषय पर खुली चर्चा चाहती है। उन्होंने कहा, 'वे अपनी बात रखें, हम अपनी बात रखेंगे। हमारे पास भी बहुत कुछ कहने के लिए है कि कांग्रेस सरकारों के समय कितने पेपर लीक हुए थे और राजस्थान में क्या हुआ था। उस समय राहुल गांधी और कांग्रेस पूरी तरह खामोश थे।'

प्रसाद ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी के विरोध के कारण राहुल गांधी किसी भी सार्थक संसदीय बहस के लिए तैयार नहीं हैं। उन्होंने विपक्षी दलों पर तंज कसते हुए कहा कि उन्हें छात्रों की चिंता कम और अपनी पार्टी की राजनीतिक स्थिति की चिंता अधिक है।

विपक्ष की स्थिति और ऐतिहासिक संदर्भ

गौरतलब है कि पेपर लीक का मुद्दा केवल वर्तमान सरकार तक सीमित नहीं रहा — विभिन्न राज्यों में अलग-अलग दलों की सरकारों के कार्यकाल में भी परीक्षा घोटाले सामने आए हैं। भाजपा का तर्क है कि मौजूदा केंद्र सरकार ने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए कानून को और सख्त बनाया है, जबकि आलोचकों का कहना है कि कानून बनाने और उसे प्रभावी ढंग से लागू करने में अंतर होता है।

आगे क्या

संसद में इस मुद्दे पर बहस की माँग जारी है। भाजपा और विपक्षी दलों के बीच यह टकराव आने वाले सत्र में और तीखा होने की संभावना है। छात्र संगठनों की नज़र इस पर है कि सरकार पेपर लीक रोकने के लिए बनाए गए कानून को ज़मीनी स्तर पर कितनी तेज़ी और पारदर्शिता से लागू करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

विपक्ष की 'संसद में बहस से बचने' की रणनीति भी उसकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करती है — अगर मुद्दा वाकई छात्रों का है तो सदन के भीतर जवाब माँगना सड़क पर नारेबाज़ी से ज़्यादा प्रभावी होता। पेपर लीक का इतिहास किसी एक दल का नहीं है — राजस्थान से लेकर बिहार तक, अलग-अलग सरकारों में यह बीमारी फैली है। असली सवाल यह है कि परीक्षा एजेंसियों की जवाबदेही तय करने और डिजिटल सुरक्षा ढाँचे को मज़बूत करने की दिशा में ठोस, मापने योग्य कदम कब उठाए जाएँगे।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सरकार ने पेपर लीक रोकने के लिए कौन-सा कानून बनाया है?
केंद्र सरकार ने प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी रोकने के लिए सख्त कानूनी प्रावधान किए हैं, जिनके तहत दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का प्रावधान है। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह के अनुसार यह कानून लीक-प्रूफ परीक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है।
नीट पेपर लीक मामले में सरकार ने क्या कदम उठाए?
सरकार ने नीट परीक्षा दोबारा आयोजित कराई और उसका परिणाम शीघ्रता से घोषित किया। अब प्रवेश प्रक्रिया की तैयारियाँ चल रही हैं और दोषियों के खिलाफ जाँच व कार्रवाई जारी बताई जा रही है।
भाजपा विपक्ष पर राजनीति का आरोप क्यों लगा रही है?
भाजपा का कहना है कि विपक्षी दलों ने छात्रहित में कोई ठोस सुझाव नहीं दिया और संसद में बहस से भी बच रहे हैं। रविशंकर प्रसाद के अनुसार, विपक्ष को छात्रों की नहीं बल्कि अपनी राजनीतिक पार्टी की चिंता अधिक है।
संसद में पेपर लीक पर बहस क्यों नहीं हो पा रही?
भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद के अनुसार पिछले पाँच दिनों से वे संसद में इस विषय पर चर्चा चाहते हैं, लेकिन विपक्ष तैयार नहीं है। उनका आरोप है कि प्रधानमंत्री मोदी के विरोध के कारण राहुल गांधी किसी सार्थक बहस से बच रहे हैं।
क्या पहले भी कांग्रेस सरकारों में पेपर लीक हुए थे?
भाजपा ने दावा किया है कि कांग्रेस सरकारों के कार्यकाल में भी पेपर लीक की घटनाएँ हुई थीं, विशेष रूप से राजस्थान का उदाहरण देते हुए। रविशंकर प्रसाद ने कहा कि उस समय राहुल गांधी और कांग्रेस पूरी तरह खामोश थे।
राष्ट्र प्रेस
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