नीट हंगामे पर रिजिजू का विपक्ष को कड़ा जवाब: 'सरकार चर्चा चाहती है, विपक्ष भाग रहा है'
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बुधवार, 12 अगस्त को विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि केंद्र सरकार नीट पेपर लीक और छात्र आंदोलन सहित हर मुद्दे पर संसद में खुली चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है, जबकि विपक्ष संवाद से बचकर हंगामे का रास्ता चुन रहा है। मानसून सत्र के दौरान लगातार व्यवधान की पृष्ठभूमि में यह बयान आया है, जब सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित हो रही है।
मंत्री की पीड़ा और असामान्य स्थिति
रिजिजू ने कहा, 'मैं बहुत निराश हूँ। जिंदगी में पहली बार मैं ऐसा दृश्य देख रहा हूँ, जहाँ सरकार सदन में चर्चा चाहती है, लेकिन विपक्ष भाग रहा है।' उन्होंने इसे लोकतंत्र की परंपरा के विपरीत बताया, जिसमें आमतौर पर विपक्ष चर्चा की माँग करता है और सरकार जवाब देती है।
मंत्री ने अपने तीन दशक के संसदीय अनुभव का हवाला देते हुए कहा कि ऐसी परिस्थिति उन्होंने इससे पहले कभी नहीं देखी। उनके अनुसार, 'ऐसा विपक्ष मैंने अपने जीवन में नहीं देखा और न मैं कल्पना कर सकता हूँ कि सरकार चर्चा चाहती है और विपक्ष चर्चा से भाग रहा है।'
गृह मंत्री का लोकसभा अध्यक्ष को पत्र
रिजिजू ने बताया कि स्थिति इतनी असामान्य हो गई कि केंद्रीय गृह मंत्री को लोकसभा अध्यक्ष को एक औपचारिक पत्र लिखना पड़ा, जिसमें विनती की गई कि वे विपक्ष के नेता को चर्चा के लिए मनाएँ। उन्होंने कहा, 'ये आपने कभी सुना है — सरकार खुद हाथ जोड़कर स्पीकर से निवेदन कर रही है कि विपक्षी पार्टी के नेता को मनवाएँ।'
गौरतलब है कि नीट-यूजी पेपर लीक विवाद के बाद देशभर में छात्र आंदोलन तेज हुए थे और विपक्ष ने संसद में इस पर गृह मंत्री का जवाब माँगा था। सरकार का कहना है कि उसने चर्चा की स्वीकृति दी, फिर भी व्यवधान जारी रहा।
विपक्ष की जवाबदेही पर सवाल
रिजिजू ने कहा कि कांग्रेस और कुछ अन्य विपक्षी दलों का यह रवैया न केवल लोकतंत्र के लिए हानिकारक है, बल्कि आम जनता के प्रति भी गैर-जिम्मेदाराना है। उन्होंने कहा, 'जनता भी जानना चाहती है कि आखिर वे चर्चा से क्यों भाग रहे हैं?'
मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि संसद में सरकार अपना पक्ष तभी रख सकती है जब विपक्ष सुनने को तैयार हो। उनके अनुसार, 'वे सुनना नहीं चाहते तो संसद कैसे चलेगी?'
मानसून सत्र पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब मानसून सत्र 2024 के शेष दिनों में महत्वपूर्ण विधायी कार्य लंबित है। लगातार हंगामे के कारण सदन का बहुमूल्य समय नष्ट हो रहा है। रिजिजू ने कहा कि सत्र समाप्त होने से पहले चर्चा न हो पाई तो यह देश के लिए ठीक नहीं होगा।
आने वाले दिनों में सरकार और विपक्ष के बीच इस गतिरोध का हल निकलता है या नहीं, यह मानसून सत्र की उत्पादकता और नीट मुद्दे पर जनता को मिलने वाले जवाबों की दिशा तय करेगा।