नीट पर चर्चा के लिए सरकार तैयार, रिजिजू बोले — एनडीए के सभी दल चाहते हैं बहस, विपक्ष की शर्तें बाधा
सारांश
मुख्य बातें
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने गुरुवार, 23 जुलाई को राज्यसभा में स्पष्ट किया कि सरकार पहले दिन से ही नीट परीक्षा विवाद पर संसद में चर्चा कराने के पक्ष में है और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के सभी घटक दल भी इस विषय पर गंभीर बहस चाहते हैं। मानसून सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच गतिरोध एक बार फिर उभरकर सामने आया, जब नीट मुद्दे पर चर्चा की माँग को लेकर सदन में हंगामा हुआ।
सरकार का पक्ष: बिना शर्त चर्चा की अपील
रिजिजू ने सदन को बताया कि सरकार की ओर से विपक्ष के वरिष्ठ नेताओं — विशेष रूप से कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और अन्य नेताओं से — पहले ही बातचीत की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि चर्चा की अवधि और स्वरूप आपसी सहमति से तय किया जा सकता है, परंतु चर्चा शुरू करने के लिए कोई पूर्व शर्त नहीं लगाई जानी चाहिए।
संसदीय कार्य मंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक जैसी घटनाओं पर कड़ी कार्रवाई का संदेश पहले ही दे दिया है। उन्होंने बताया कि दोषियों को त्वरित और कड़ी सजा सुनिश्चित करने के लिए फास्ट ट्रैक न्यायालयों की व्यवस्था की जा रही है।
विपक्ष की माँग: शिक्षा मंत्री का इस्तीफा
विपक्षी दलों ने सरकार के सामने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की शर्त रखी है। विपक्षी सांसदों का स्पष्ट कहना था कि परीक्षा में हुई अनियमितताओं की जिम्मेदारी लेते हुए शिक्षा मंत्री को पद छोड़ना चाहिए और जब तक ऐसा नहीं होता, कोई सार्थक चर्चा संभव नहीं है।
रिजिजू ने इस रुख पर पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि विपक्ष चर्चा की बात तो करता है, लेकिन शर्तें लगाकर उसे बाधित करता है। उनके अनुसार, इस रवैये से यह संदेश जाता है कि विपक्ष वास्तव में सदन में बहस नहीं होने देना चाहता।
नीट विवाद की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि नीट-यूजी 2024 परीक्षा में पेपर लीक और अनियमितताओं के आरोपों ने देशभर में छात्रों और अभिभावकों में व्यापक आक्रोश पैदा किया था। सर्वोच्च न्यायालय में भी इस मामले से जुड़ी याचिकाएँ विचाराधीन हैं। यह ऐसे समय में आया है जब विपक्ष चुनाव नतीजों के बाद से ही सरकार पर शिक्षा व्यवस्था की खामियों को लेकर हमलावर है।
संसद में गतिरोध जारी
मानसून सत्र के दौरान लोकसभा और राज्यसभा दोनों में कार्यवाही बाधित होती रही है। रिजिजू ने विपक्ष से पुनः अपील की कि वह अपनी शर्तें वापस ले और नीट मुद्दे पर बिना किसी बाधा के बहस होने दे। हालांकि विपक्षी सांसद अपनी माँगों पर अडिग रहे और सरकार की अपील को अस्वीकार कर दिया।
आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या दोनों पक्ष किसी मध्य मार्ग पर सहमत होते हैं, या मानसून सत्र का बचा हुआ समय भी इसी गतिरोध की भेंट चढ़ जाता है।