राज्यसभा में जेपी नड्डा का विपक्ष पर हमला: 'संसदीय मर्यादाओं को किया जा रहा तार-तार'
सारांश
मुख्य बातें
राज्यसभा में नेता सदन जगत प्रकाश नड्डा ने 22 जुलाई को विपक्ष के आचरण पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि सदन में जो व्यवहार हो रहा है वह 'बेहद गैरज़िम्मेदाराना' है और लोकतांत्रिक मूल्यों के सर्वथा विरुद्ध है। नड्डा ने आरोप लगाया कि संसद की मर्यादाओं को तार-तार किया जा रहा है और लोकतांत्रिक परंपराओं का खुला उल्लंघन हो रहा है।
हंगामे की पृष्ठभूमि
यह विवाद नीट परीक्षा और कथित प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर उपजा है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) सहित तमाम विपक्षी दल इस मुद्दे पर तत्काल चर्चा और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की माँग कर रहे हैं। सुबह के हंगामे के बाद राज्यसभा की कार्यवाही दोपहर 2 बजे पुनः आरंभ हुई।
सरकार का रुख: चर्चा के लिए तैयार, शर्तें नामंज़ूर
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने स्पष्ट किया कि सरकार मानसून सत्र के पहले दिन से ही नीट और कथित पेपर लीक पर चर्चा के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि चर्चा किस नियम के तहत और किस स्वरूप में होगी, यह सभी पक्षों से बातचीत कर तय किया जा सकता है — लेकिन 'चर्चा से बचने के लिए शर्तें लगाना उचित नहीं।'
रिजिजू ने विपक्ष से सदन सुचारु रूप से चलाने की अपील करते हुए कहा कि सरकार युवाओं और छात्रों के भविष्य से जुड़े इस महत्वपूर्ण विषय पर विस्तार से चर्चा कराने को तैयार है। उन्होंने यह भी कहा कि चर्चा की अवधि और स्वरूप का निर्णय पीठासीन अधिकारी कर सकते हैं और सरकार उसे स्वीकार करेगी।
नड्डा का विपक्ष पर सीधा आरोप
नेता सदन नड्डा ने कहा कि संसदीय कार्य मंत्री पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि सरकार हर मुद्दे — नीट परीक्षा, कथित प्रश्नपत्र लीक और उससे जुड़े सभी पहलुओं — पर विस्तृत चर्चा के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि यह एक पारदर्शिता के साथ काम करने वाली सरकार है जो हमेशा जनहित में निर्णय लेती है।
नड्डा ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह नारेबाज़ी के ज़रिए सदन की कार्यवाही बाधित कर सार्थक चर्चा से बचने का प्रयास कर रहा है। उनके अनुसार, 'विपक्ष के आचरण से यह प्रतीत होता है कि उसे लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और संसदीय मूल्यों पर विश्वास नहीं है।'
आम जनता और छात्रों पर असर
गौरतलब है कि नीट विवाद लाखों मेडिकल अभ्यर्थियों के भविष्य से सीधे जुड़ा है। सदन में चर्चा न होने से न केवल संसदीय समय बर्बाद होता है, बल्कि छात्रों को भी सरकारी जवाबदेही से वंचित रहना पड़ता है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में नीट परीक्षा की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
आगे क्या होगा
सरकार और विपक्ष के बीच चर्चा के स्वरूप को लेकर गतिरोध बना हुआ है। सरकार बिना पूर्व शर्त के बहस के लिए तैयार है, जबकि विपक्ष शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की माँग पर अड़ा है। आने वाले दिनों में सर्वदलीय बैठक या सभापति के हस्तक्षेप से इस गतिरोध के टूटने की संभावना जताई जा रही है।