नीट पेपर लीक पर संसद में चर्चा को तैयार सरकार, नड्डा बोले — विपक्ष शर्तें बदलना बंद करे
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने नीट पेपर लीक विवाद पर संसद में विस्तृत बहस कराने की पेशकश की है। राज्यसभा में नेता सदन और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के अध्यक्ष जेपी नड्डा ने 22 जुलाई को नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट किया कि सरकार इस गंभीर मुद्दे पर 12 से 18 घंटे तक की चर्चा के लिए भी तैयार है। साथ ही उन्होंने विपक्ष से अपील की कि वह बार-बार अपनी माँगों और शर्तों में बदलाव न करे और संसदीय मंच पर सकारात्मक संवाद के ज़रिये समाधान तलाशे।
सरकार का प्रस्ताव
नड्डा ने कहा, 'सरकार चाहती है कि संसद में पेपर लीक के मुद्दे पर चर्चा हो। चर्चा कितने समय तक होनी चाहिए, यह विपक्ष और बिजनेस एडवाइजरी कमेटी तय कर सकती है। विपक्ष चाहे तो 12 घंटे या 18 घंटे तक चर्चा कर सकता है और सरकार इसके लिए तैयार है।' उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि संसद ही वह सबसे उपयुक्त मंच है जहाँ ऐसे गंभीर विषयों के सभी पहलुओं पर विचार किया जा सकता है।
छात्रों के भविष्य की चिंता
नड्डा ने कहा, 'बच्चे हमारे भी हैं, आपके भी हैं और देश का भविष्य भी हैं। देश के भविष्य की चिंता करना हमारी जिम्मेदारी है।' उन्होंने विपक्ष से आग्रह किया कि वह आरोप-प्रत्यारोप से ऊपर उठकर स्थायी समाधान की दिशा में आगे बढ़े। नीट आंदोलन के राजनीतिकरण पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि छात्रों की माँगों को राजनीतिक हथियार नहीं बनाया जाना चाहिए।
विपक्ष पर पलटवार
कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा संसद में दिए गए प्रस्तुतीकरण पर प्रतिक्रिया देते हुए नड्डा ने कहा, 'यह जाँच का विषय है। पेपर लीक की घटनाएँ केवल एक राज्य या एक सरकार तक सीमित नहीं रही हैं।' उन्होंने जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, तेलंगाना, तमिलनाडु, पंजाब, केरल और कर्नाटक सहित कई राज्यों में पेपर लीक के मामलों का उल्लेख किया। नड्डा ने कहा कि यदि विपक्ष वास्तव में छात्रों के हितों को लेकर चिंतित है, तो उसे सभी राज्यों और सभी सरकारों के कार्यकाल में हुई घटनाओं पर एकसमान रूप से चर्चा करनी चाहिए।
अन्य मुद्दों पर प्रतिक्रिया
सीजेपी के विरोध प्रदर्शन के संदर्भ में नड्डा ने कहा कि बातचीत सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई है और यदि लिखित रूप में कोई बात आती है तो उस पर विचार किया जाएगा। सोनम वांगचुक से मुलाकात के बारे में उन्होंने बताया कि उनसे मिलकर हालचाल जाना गया और उनके द्वारा एक पत्र भी लिखा गया है। केंद्रीय मंत्री के इस्तीफे की माँग पर नड्डा ने कहा कि ऐसे मुद्दे इस तरह नहीं उठाए जाते और सरकार संसद में बहस के ज़रिये ही समाधान निकालने के पक्ष में है।
आगे क्या होगा
यह ऐसे समय में आया है जब नीट-यूजी 2024 पेपर लीक को लेकर देशभर में छात्र आंदोलन तेज़ हो गया है और विपक्ष संसद में सरकार को घेरने की कोशिश में है। गौरतलब है कि बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की सहमति के बाद ही संसद में चर्चा की तारीख और अवधि तय होगी। सरकार की इस पेशकश के बाद अब गेंद विपक्ष के पाले में है कि वह संसदीय बहस को स्वीकार करता है या नहीं।