नीट पेपर लीक: कांग्रेस की संसद में व्यापक चर्चा और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग
सारांश
मुख्य बातें
मानसून सत्र के दौरान कांग्रेस ने 22 जुलाई को संसद में नीट पेपर लीक मामले पर व्यापक चर्चा और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग को लेकर अपना रुख और कड़ा कर लिया। पार्टी सांसदों ने स्पष्ट किया कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के विरोध प्रदर्शन को टकराव नहीं, बल्कि सरकार की जवाबदेही तय करने की कोशिश के रूप में देखा जाना चाहिए।
मुख्य घटनाक्रम
कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने कहा, 'जब संसद खामोश हो जाती है या जब सत्ता में खामोश हो जाती है, तो सड़कें बोलने लगती हैं। यह एक गंभीर मामला है। जब लगभग 7.5 करोड़ लोगों का भविष्य दांव पर हो और अनिश्चित लग रहा हो, तो हमने लगातार ये चिंताएं उठाई हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि राहुल गांधी ने बार-बार पेपर लीक के मुद्दों पर चर्चा की माँग की है और सुधारों की लगातार वकालत की है।
कांग्रेस की जवाबदेही की माँग
भगत ने जिम्मेदारी की रेखा खींचते हुए कहा, 'इस पूरे घटनाक्रम के जिम्मेदार प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और शिक्षा मंत्री हैं। प्रधानमंत्री सदन के नेता हैं और उनके संरक्षण के बिना कुछ नहीं हो सकता। जिस तरह बर्बरतापूर्ण कार्रवाई हुई, उसके लिए गृह मंत्री जिम्मेदार हैं और नीट पेपर लीक पर धर्मेंद्र प्रधान जिम्मेदार हैं।' उन्होंने राहुल गांधी पर बयान बदलने के आरोपों को भी खारिज किया।
छात्र आंदोलन का बचाव
कांग्रेस नेता उदित राज ने छात्रों के नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शनों का बचाव करते हुए कहा कि ये आंदोलन रोजगार और परीक्षा में गड़बड़ियों को लेकर वास्तविक चिंताओं से प्रेरित हैं, न कि किसी राजनीतिक एजेंडे से। उन्होंने कहा, '90 प्रतिशत छात्र अपने भविष्य के लिए आए हैं, वे राजनीतिक लोग नहीं हैं। पेपर लीक हो गया है और उन्हें नौकरी नहीं मिल रही है। वे अपना गुस्सा जाहिर कर रहे हैं।'
उदित राज ने यह भी आरोप लगाया कि 20 जुलाई के मार्च में सभी स्वेच्छा से शामिल हुए थे। उन्होंने बताया कि उन्होंने करीब 50 युवाओं से बातचीत की और सभी अपनी मर्जी से आए थे।
प्रदर्शन पर पाबंदी का आरोप
उदित राज ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन की अनुमति माँगने पर भी इनकार किया जा रहा है। उन्होंने कहा, 'एनएसयूआई सदस्यों को लाठीचार्ज का सामना करना पड़ रहा है। जब हम जंतर-मंतर पर विरोध या प्रदर्शन करने की अनुमति माँगते हैं, तो उसे नामंजूर कर दिया जाता है।' उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि राहुल गांधी ने कोटा और देहरादून में हजारों युवाओं से बातचीत की है।
आगे की राह
गौरतलब है कि नीट पेपर लीक विवाद मानसून सत्र की सबसे बड़ी राजनीतिक चुनौतियों में से एक बन चुका है। विपक्ष की एकजुट माँग के बीच यह देखना अहम होगा कि सरकार संसद के भीतर इस मुद्दे पर चर्चा की अनुमति देती है या नहीं।