22 जुलाई 2026
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राहुल गांधी का केंद्र पर हमला: नीट पेपर लीक पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग

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राहुल गांधी का केंद्र पर हमला: नीट पेपर लीक पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग

सारांश

राहुल गांधी ने एक दशक में 152 पेपर लीक का हवाला देते हुए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा माँगा। छात्रों पर बल प्रयोग, आत्महत्याएँ और बढ़ती परीक्षा लागत — कांग्रेस ने इन तीन माँगों के साथ सरकार को सीधे कठघरे में खड़ा किया।

मुख्य बातें

राहुल गांधी ने 22 जुलाई को केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग दोहराई।
उनके अनुसार पिछले एक दशक में 152 बार विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक हुए, किसी को सज़ा नहीं मिली।
छात्रों की तीन माँगें: शिक्षा मंत्री का इस्तीफा , बल प्रयोग के दोषियों की जवाबदेही, और सरकार की सार्वजनिक माफी ।
राहुल गांधी का दावा — नीट तैयारी पर अभिभावकों का खर्च केंद्र के पूरे शिक्षा बजट के बराबर।
कांग्रेस ने छात्रों की माँगों का पूर्ण समर्थन घोषित किया।

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने 22 जुलाई को केंद्र सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए नीट सहित अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में हुए पेपर लीक और छात्र आंदोलन के मुद्दे पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का तत्काल इस्तीफा माँगा। उन्होंने आरोप लगाया कि देश की शिक्षा प्रणाली गंभीर भरोसे के संकट में है और छात्रों की न्यायसंगत माँगों का जवाब बल प्रयोग से दिया जा रहा है।

पेपर लीक का दशक भर का सिलसिला

राहुल गांधी ने दावा किया कि पिछले एक दशक में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में 152 बार पेपर लीक हुए — यानी औसतन हर महीने एक बड़ी घटना। उनका कहना था कि इतनी घटनाओं के बावजूद अब तक किसी भी मामले में दोषियों को सज़ा नहीं मिली, जो व्यवस्था में गहरी खामियों का संकेत है। उन्होंने कहा, 'यदि इतने मामलों में एक भी दोषी नहीं ठहराया गया, तो यह सिस्टम की विफलता है।'

छात्रों पर दोहरी मार — मानसिक और आर्थिक

राहुल गांधी ने रेखांकित किया कि परीक्षा से ठीक पहले पेपर लीक की खबर मिलने से छात्रों की वर्षों की मेहनत पर पानी फिर जाता है। उन्होंने कहा कि इस मानसिक दबाव के कारण कई छात्र आत्महत्या तक कर चुके हैं। आर्थिक पहलू पर उनका दावा था कि हर साल नीट की तैयारी और उससे जुड़ी प्रक्रियाओं पर अभिभावक लगभग उतनी ही राशि खर्च करते हैं, जितना केंद्र सरकार पूरे शिक्षा बजट पर व्यय करती है। यह स्थिति मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों के लिए विशेष रूप से कठिन है।

छात्रों की तीन प्रमुख माँगें

राहुल गांधी ने आंदोलनरत छात्रों की माँगों को पूरी तरह जायज़ बताते हुए तीन बिंदुओं का उल्लेख किया। पहला, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाया जाए, क्योंकि वे शिक्षा व्यवस्था को प्रभावी ढंग से संचालित करने में विफल रहे। दूसरा, छात्रों के खिलाफ कथित बल प्रयोग के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और आदेश देने वालों की जवाबदेही तय की जाए। तीसरा, सरकार पूरे घटनाक्रम के लिए छात्रों से सार्वजनिक रूप से माफी माँगे।

कांग्रेस का रुख और व्यापक संदर्भ

राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस इन माँगों का पूर्ण समर्थन करती है। उन्होंने कहा कि कभी दुनिया की बेहतर शिक्षा प्रणालियों में गिनी जाने वाली भारतीय शिक्षा व्यवस्था आज भरोसे के संकट से जूझ रही है। गौरतलब है कि नीट विवाद इस वर्ष देश के सबसे बड़े शिक्षा-संकट के रूप में उभरा है, जिसमें लाखों छात्र प्रभावित हुए और सर्वोच्च न्यायालय तक में सुनवाई हुई।

आगे क्या

राहुल गांधी ने चेतावनी दी कि यदि परीक्षा प्रणाली पर छात्रों का भरोसा खत्म होता है, तो इसका असर पूरे देश के भविष्य पर पड़ेगा। फिलहाल केंद्र सरकार की ओर से इस्तीफे की माँग पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। संसद के मानसून सत्र में यह मुद्दा गर्माने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

शून्य सज़ा' वाला आँकड़ा राजनीतिक रूप से धारदार है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या विपक्ष की माँगें ढाँचागत सुधार की दिशा में हैं या केवल मंत्री की बलि तक सीमित। शिक्षा मंत्री का इस्तीफा प्रतीकात्मक जवाबदेही तो दे सकता है, पर परीक्षा एजेंसियों की संरचनात्मक खामियाँ — जो NTA जैसे निकायों में वर्षों से जमी हैं — उससे दूर नहीं होतीं। नीट विवाद ने यह भी उजागर किया कि निजी कोचिंग उद्योग और सरकारी परीक्षा तंत्र के बीच की खाई किस तरह गरीब और मध्यम वर्गीय छात्रों को सबसे ज़्यादा नुकसान पहुँचाती है — यह पहलू संसदीय बहस में अक्सर गायब रहता है।
RashtraPress
22 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राहुल गांधी ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की माँग क्यों की?
राहुल गांधी का आरोप है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान नीट सहित प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार हो रहे पेपर लीक को रोकने में विफल रहे हैं। उनके अनुसार एक दशक में 152 पेपर लीक और एक भी दोषी को सज़ा न मिलना, मंत्रालय की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
नीट पेपर लीक विवाद क्या है?
नीट (राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा) भारत की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा है, जिसमें हाल के वर्षों में पेपर लीक के आरोप लगे हैं। इस विवाद ने लाखों छात्रों को प्रभावित किया और सर्वोच्च न्यायालय तक मामला पहुँचा, जिससे पूरे परीक्षा तंत्र की विश्वसनीयता पर सवाल उठे।
छात्रों की तीन प्रमुख माँगें क्या हैं?
आंदोलनरत छात्रों की तीन माँगें हैं — पहली, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा; दूसरी, छात्रों पर कथित बल प्रयोग के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही; और तीसरी, सरकार द्वारा छात्रों से सार्वजनिक माफी। राहुल गांधी ने इन माँगों को पूरी तरह जायज़ बताया है।
पेपर लीक से छात्रों पर क्या असर पड़ता है?
पेपर लीक होने पर लाखों छात्रों को दोबारा परीक्षा की तैयारी करनी पड़ती है, जिससे उनकी वर्षों की मेहनत बेकार जाती है। राहुल गांधी के अनुसार मानसिक दबाव इतना अधिक है कि कई छात्र आत्महत्या तक कर चुके हैं, और आर्थिक रूप से भी मध्यम वर्ग व गरीब परिवारों पर दोहरी मार पड़ती है।
क्या केंद्र सरकार ने राहुल गांधी की माँगों पर कोई प्रतिक्रिया दी?
अभी तक केंद्र सरकार की ओर से इस्तीफे की माँग पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। संसद के मानसून सत्र में यह मुद्दा और तेज़ होने की संभावना है।
राष्ट्र प्रेस
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