राहुल गांधी का केंद्र पर हमला: नीट पेपर लीक पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग
सारांश
मुख्य बातें
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने 22 जुलाई को केंद्र सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए नीट सहित अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में हुए पेपर लीक और छात्र आंदोलन के मुद्दे पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का तत्काल इस्तीफा माँगा। उन्होंने आरोप लगाया कि देश की शिक्षा प्रणाली गंभीर भरोसे के संकट में है और छात्रों की न्यायसंगत माँगों का जवाब बल प्रयोग से दिया जा रहा है।
पेपर लीक का दशक भर का सिलसिला
राहुल गांधी ने दावा किया कि पिछले एक दशक में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में 152 बार पेपर लीक हुए — यानी औसतन हर महीने एक बड़ी घटना। उनका कहना था कि इतनी घटनाओं के बावजूद अब तक किसी भी मामले में दोषियों को सज़ा नहीं मिली, जो व्यवस्था में गहरी खामियों का संकेत है। उन्होंने कहा, 'यदि इतने मामलों में एक भी दोषी नहीं ठहराया गया, तो यह सिस्टम की विफलता है।'
छात्रों पर दोहरी मार — मानसिक और आर्थिक
राहुल गांधी ने रेखांकित किया कि परीक्षा से ठीक पहले पेपर लीक की खबर मिलने से छात्रों की वर्षों की मेहनत पर पानी फिर जाता है। उन्होंने कहा कि इस मानसिक दबाव के कारण कई छात्र आत्महत्या तक कर चुके हैं। आर्थिक पहलू पर उनका दावा था कि हर साल नीट की तैयारी और उससे जुड़ी प्रक्रियाओं पर अभिभावक लगभग उतनी ही राशि खर्च करते हैं, जितना केंद्र सरकार पूरे शिक्षा बजट पर व्यय करती है। यह स्थिति मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों के लिए विशेष रूप से कठिन है।
छात्रों की तीन प्रमुख माँगें
राहुल गांधी ने आंदोलनरत छात्रों की माँगों को पूरी तरह जायज़ बताते हुए तीन बिंदुओं का उल्लेख किया। पहला, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाया जाए, क्योंकि वे शिक्षा व्यवस्था को प्रभावी ढंग से संचालित करने में विफल रहे। दूसरा, छात्रों के खिलाफ कथित बल प्रयोग के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और आदेश देने वालों की जवाबदेही तय की जाए। तीसरा, सरकार पूरे घटनाक्रम के लिए छात्रों से सार्वजनिक रूप से माफी माँगे।
कांग्रेस का रुख और व्यापक संदर्भ
राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस इन माँगों का पूर्ण समर्थन करती है। उन्होंने कहा कि कभी दुनिया की बेहतर शिक्षा प्रणालियों में गिनी जाने वाली भारतीय शिक्षा व्यवस्था आज भरोसे के संकट से जूझ रही है। गौरतलब है कि नीट विवाद इस वर्ष देश के सबसे बड़े शिक्षा-संकट के रूप में उभरा है, जिसमें लाखों छात्र प्रभावित हुए और सर्वोच्च न्यायालय तक में सुनवाई हुई।
आगे क्या
राहुल गांधी ने चेतावनी दी कि यदि परीक्षा प्रणाली पर छात्रों का भरोसा खत्म होता है, तो इसका असर पूरे देश के भविष्य पर पड़ेगा। फिलहाल केंद्र सरकार की ओर से इस्तीफे की माँग पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। संसद के मानसून सत्र में यह मुद्दा गर्माने की संभावना है।