नीट पेपर लीक: राहुल गांधी की तीन मांगें — धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, जवाबदेही और PM से माफी
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 22 जुलाई को नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में नीट परीक्षा पेपर लीक विवाद को लेकर केंद्र सरकार के सामने तीन ठोस मांगें रखीं। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का तत्काल इस्तीफा, दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई और प्रधानमंत्री द्वारा देश के छात्रों से सार्वजनिक माफी की मांग की।
तीन प्रमुख मांगें
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने दायित्वों का निर्वहन करने में पूरी तरह विफल रहे हैं। उनके अनुसार, लगातार पेपर लीक की घटनाओं के बावजूद शिक्षा मंत्रालय कोई प्रभावी कदम नहीं उठा सका, इसलिए मंत्री को पद छोड़ देना चाहिए। दूसरी मांग के तहत उन्होंने कहा कि जवाबदेही केवल निचले स्तर तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि आदेश देने वाले और पूरे तंत्र के लिए जिम्मेदार लोगों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए। तीसरी मांग में उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को छात्रों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए और स्वीकार करना चाहिए कि परीक्षा प्रणाली में गंभीर खामियाँ रही हैं।
पिछले 10 वर्षों में 152 पेपर लीक का दावा
राहुल गांधी ने दावा किया कि पिछले 10 वर्षों में देशभर में 152 पेपर लीक की घटनाएँ हुईं, जिससे करीब 7.5 करोड़ छात्र और उनके परिवार प्रभावित हुए। उन्होंने आरोप लगाया कि इतनी घटनाओं के बावजूद किसी भी आरोपी को सजा नहीं मिली, जो शिक्षा व्यवस्था की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करता है। गौरतलब है कि यह आँकड़े राहुल गांधी के अपने दावे हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।
गरीब और मध्यम वर्ग पर असर
राहुल गांधी ने कहा कि मौजूदा शिक्षा व्यवस्था गरीब और मध्यम वर्ग के छात्रों के साथ अन्याय कर रही है। उनके अनुसार, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में परिवार लाखों रुपये खर्च करते हैं और छात्र वर्षों तक मेहनत करते हैं, लेकिन पेपर लीक जैसी घटनाएँ उनकी पूरी मेहनत को व्यर्थ कर देती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों की आवाज सुनने के बजाय उन्हें दबाने की कोशिश कर रही है।
छात्र आंदोलन को बताया वैध
राहुल गांधी ने छात्रों के चल रहे आंदोलन को पूरी तरह वैध करार दिया। उन्होंने कहा कि छात्र केवल निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली और पारदर्शी शिक्षा व्यवस्था की माँग कर रहे हैं, जो उनका अधिकार है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि छात्रों की माँगों पर संवेदनशीलता से विचार किया जाए। यह ऐसे समय में आया है जब नीट परीक्षा पेपर लीक मामला संसद और सड़क दोनों पर केंद्रीय मुद्दा बना हुआ है।
आगे क्या
केंद्र सरकार की ओर से इन माँगों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। नीट पेपर लीक मामले की जाँच जारी है और विपक्ष इस मुद्दे को संसद के मानसून सत्र में भी उठाने की तैयारी में है।