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नीट पेपर लीक: विपक्ष की तीन मांगें — संसद में चर्चा, धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, छात्रों की एफआईआर वापस

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नीट पेपर लीक: विपक्ष की तीन मांगें — संसद में चर्चा, धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, छात्रों की एफआईआर वापस

सारांश

नीट पेपर लीक पर विपक्ष की संसद में तीखी आवाज — कांग्रेस, TMC, राजद और निर्दलीय सांसदों ने एकजुट होकर शिक्षा मंत्री के इस्तीफे, छात्रों की एफआईआर वापसी और सदन में चर्चा की मांग की। सरकार लगातार तीन दिनों से स्थगन प्रस्ताव ठुकराती रही।

मुख्य बातें

22 जुलाई को संसद परिसर में विपक्षी सांसदों ने नीट पेपर लीक पर एकजुट प्रदर्शन किया।
विपक्ष की तीन मांगें: सदन में चर्चा, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, और प्रदर्शनकारी छात्रों की एफआईआर वापसी ।
कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल के अनुसार, पिछले तीन दिनों से स्थगन प्रस्ताव लाया जा रहा है लेकिन सरकार स्वीकार नहीं कर रही।
राजद सांसद सुधाकर सिंह ने दावा किया कि सरकार ने बड़ी संख्या में केंद्रीय सुरक्षा बल तैनात किए।
निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने चेतावनी दी कि मांगें न मानी गईं तो विरोध के अन्य रास्ते अपनाए जाएंगे।

नई दिल्ली, 22 जुलाई को नीट पेपर लीक मामले पर विपक्षी दलों ने संसद परिसर में एकजुट होकर केंद्र सरकार के खिलाफ अपना आंदोलन और तेज कर दिया। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) सहित कई विपक्षी दलों के सांसदों ने तीन प्रमुख मांगें दोहराईं — सदन में विस्तृत चर्चा, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, और प्रदर्शनकारी छात्रों पर दर्ज एफआईआर वापस लेना। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में पेपर लीक की घटनाओं को लेकर छात्रों और अभिभावकों में रोष बढ़ता जा रहा है।

मुख्य घटनाक्रम

कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि पिछले तीन दिनों से विपक्ष नीट पेपर लीक मामले पर चर्चा के लिए स्थगन प्रस्ताव ला रहा है, लेकिन सरकार उनकी मांग स्वीकार नहीं कर रही। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार किस नियम के तहत चर्चा के लिए तैयार है और एक संरचित बहस से उसे क्या आपत्ति है।

कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने कहा कि जब छात्र अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, तो जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है कि वे उनकी आवाज उठाएं। उन्होंने सत्ता पक्ष से भी आग्रह किया कि वह छात्रों के साथ खड़े होने का संदेश दे।

सांसदों के आरोप

कांग्रेस सांसद अमर सिंह ने आरोप लगाया कि शिक्षा और नीट जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर संसद में चर्चा नहीं हो रही। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर लाठीचार्ज किया गया और विपक्ष द्वारा प्रधानमंत्री आवास के बाहर किए गए प्रदर्शन को भी नजरअंदाज किया गया।

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने नीट मामले पर अपनी मांग नहीं बदली है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सभी पक्षों की बात सुनी जानी चाहिए।

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) सांसद सुधाकर सिंह ने दावा किया कि सरकार ने बड़ी संख्या में केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की है। उन्होंने कहा कि देशभर में पेपर लीक की घटनाओं को लेकर चिंता बढ़ रही है, इसलिए विपक्ष को छात्रों के समर्थन में आगे आना पड़ा।

अन्य दलों की प्रतिक्रिया

तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा कि जनप्रतिनिधि होने के नाते वे छात्रों की लड़ाई लड़ेंगे और शिक्षा मंत्री को इस्तीफा देना चाहिए।

राजद सांसद मनोज कुमार झा ने कहा कि विपक्ष के काले कपड़े पहनकर किए गए प्रदर्शन का संदेश पूरे देश में गया है। उन्होंने केंद्र सरकार पर विपक्ष की आवाज दबाने का आरोप लगाया।

पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने चेतावनी दी कि अगर सदन में विपक्ष की बात नहीं सुनी गई, तो विरोध के अन्य रास्ते अपनाने पड़ेंगे। उन्होंने कहा कि छात्रों के भविष्य की रक्षा करना सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए।

आम जनता और छात्रों पर असर

गौरतलब है कि नीट-यूजी 2024 परीक्षा में कथित अनियमितताओं के बाद से देशभर के लाखों मेडिकल अभ्यर्थी अनिश्चितता में हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों पर दर्ज एफआईआर को लेकर भी व्यापक आक्रोश है, जिसे विपक्ष अपनी मांगों का केंद्र बना रहा है।

आगे क्या होगा

विपक्ष ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी तीनों मांगें — संसद में चर्चा, शिक्षा मंत्री का इस्तीफा और छात्रों की एफआईआर वापसी — पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा। सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन यह मामला संसद सत्र के शेष दिनों में भी गरमाया रहने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

इस्तीफा और एफआईआर वापसी — राजनीतिक रूप से सुसंगत हैं, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह आंदोलन छात्रों को ठोस राहत दिला सकता है या केवल संसदीय हंगामे तक सीमित रहेगा। सरकार का लगातार तीन दिन स्थगन प्रस्ताव न मानना प्रक्रियागत रूप से उसके अधिकार में है, लेकिन यह जवाबदेही से बचने का संकेत भी देता है। पेपर लीक की यह घटना अकेली नहीं है — पिछले कुछ वर्षों में कई राज्यों में परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल उठे हैं, और बिना संस्थागत सुधार के केवल मंत्री के इस्तीफे से समस्या हल नहीं होगी।
RashtraPress
22 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नीट पेपर लीक मामले में विपक्ष की क्या मांगें हैं?
विपक्ष की तीन मुख्य मांगें हैं: संसद में नीट पेपर लीक पर विस्तृत चर्चा, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, और प्रदर्शनकारी छात्रों पर दर्ज एफआईआर वापस लेना। कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल के अनुसार, यह मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
सरकार ने विपक्ष के स्थगन प्रस्ताव पर क्या रुख अपनाया है?
कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल के अनुसार, सरकार लगातार तीन दिनों से विपक्ष के स्थगन प्रस्ताव को स्वीकार नहीं कर रही। सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं आया है कि वह किस नियम के तहत चर्चा के लिए तैयार है।
नीट पेपर लीक विवाद क्या है?
नीट-यूजी 2024 परीक्षा में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं के आरोप लगे, जिसके बाद देशभर के लाखों मेडिकल अभ्यर्थियों का भविष्य अनिश्चितता में पड़ गया। इस मामले ने देश की परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
छात्रों पर दर्ज एफआईआर का मामला क्या है?
विपक्षी सांसदों का आरोप है कि नीट मामले में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर एफआईआर दर्ज की गई और लाठीचार्ज भी किया गया। विपक्ष इन एफआईआर को वापस लेने की मांग कर रहा है, जिसे वह छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन मानता है।
इस मामले में कौन-कौन से दल और नेता शामिल हैं?
कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस (TMC), राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और निर्दलीय सांसद इस आंदोलन में शामिल हैं। प्रमुख नाम हैं — कांग्रेस के केसी वेणुगोपाल, इमरान प्रतापगढ़ी, अमर सिंह, इमरान मसूद; TMC के कल्याण बनर्जी; राजद के सुधाकर सिंह और मनोज कुमार झा; तथा निर्दलीय पप्पू यादव।
राष्ट्र प्रेस
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