नीट पेपर लीक: विपक्ष की तीन मांगें — संसद में चर्चा, धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, छात्रों की एफआईआर वापस
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, 22 जुलाई को नीट पेपर लीक मामले पर विपक्षी दलों ने संसद परिसर में एकजुट होकर केंद्र सरकार के खिलाफ अपना आंदोलन और तेज कर दिया। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) सहित कई विपक्षी दलों के सांसदों ने तीन प्रमुख मांगें दोहराईं — सदन में विस्तृत चर्चा, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, और प्रदर्शनकारी छात्रों पर दर्ज एफआईआर वापस लेना। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में पेपर लीक की घटनाओं को लेकर छात्रों और अभिभावकों में रोष बढ़ता जा रहा है।
मुख्य घटनाक्रम
कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि पिछले तीन दिनों से विपक्ष नीट पेपर लीक मामले पर चर्चा के लिए स्थगन प्रस्ताव ला रहा है, लेकिन सरकार उनकी मांग स्वीकार नहीं कर रही। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार किस नियम के तहत चर्चा के लिए तैयार है और एक संरचित बहस से उसे क्या आपत्ति है।
कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने कहा कि जब छात्र अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, तो जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है कि वे उनकी आवाज उठाएं। उन्होंने सत्ता पक्ष से भी आग्रह किया कि वह छात्रों के साथ खड़े होने का संदेश दे।
सांसदों के आरोप
कांग्रेस सांसद अमर सिंह ने आरोप लगाया कि शिक्षा और नीट जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर संसद में चर्चा नहीं हो रही। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर लाठीचार्ज किया गया और विपक्ष द्वारा प्रधानमंत्री आवास के बाहर किए गए प्रदर्शन को भी नजरअंदाज किया गया।
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने नीट मामले पर अपनी मांग नहीं बदली है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सभी पक्षों की बात सुनी जानी चाहिए।
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) सांसद सुधाकर सिंह ने दावा किया कि सरकार ने बड़ी संख्या में केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की है। उन्होंने कहा कि देशभर में पेपर लीक की घटनाओं को लेकर चिंता बढ़ रही है, इसलिए विपक्ष को छात्रों के समर्थन में आगे आना पड़ा।
अन्य दलों की प्रतिक्रिया
तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा कि जनप्रतिनिधि होने के नाते वे छात्रों की लड़ाई लड़ेंगे और शिक्षा मंत्री को इस्तीफा देना चाहिए।
राजद सांसद मनोज कुमार झा ने कहा कि विपक्ष के काले कपड़े पहनकर किए गए प्रदर्शन का संदेश पूरे देश में गया है। उन्होंने केंद्र सरकार पर विपक्ष की आवाज दबाने का आरोप लगाया।
पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने चेतावनी दी कि अगर सदन में विपक्ष की बात नहीं सुनी गई, तो विरोध के अन्य रास्ते अपनाने पड़ेंगे। उन्होंने कहा कि छात्रों के भविष्य की रक्षा करना सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए।
आम जनता और छात्रों पर असर
गौरतलब है कि नीट-यूजी 2024 परीक्षा में कथित अनियमितताओं के बाद से देशभर के लाखों मेडिकल अभ्यर्थी अनिश्चितता में हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों पर दर्ज एफआईआर को लेकर भी व्यापक आक्रोश है, जिसे विपक्ष अपनी मांगों का केंद्र बना रहा है।
आगे क्या होगा
विपक्ष ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी तीनों मांगें — संसद में चर्चा, शिक्षा मंत्री का इस्तीफा और छात्रों की एफआईआर वापसी — पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा। सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन यह मामला संसद सत्र के शेष दिनों में भी गरमाया रहने की संभावना है।