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नीट पेपर लीक: स्थगन प्रस्ताव नहीं माना तो आंदोलन जारी रहेगा, विपक्ष ने धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा माँगा

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नीट पेपर लीक: स्थगन प्रस्ताव नहीं माना तो आंदोलन जारी रहेगा, विपक्ष ने धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा माँगा

सारांश

नीट पेपर लीक पर विपक्ष एकजुट — समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस ने मिलकर शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और स्थगन प्रस्ताव की माँग की। देश में 150 से अधिक पेपर लीक के आँकड़े के बीच यह आंदोलन सिर्फ एक परीक्षा नहीं, पूरी शिक्षा व्यवस्था पर सवाल बन गया है।

मुख्य बातें

विपक्ष ने 22 जुलाई को ऐलान किया — स्थगन प्रस्ताव नहीं माना तो नीट पेपर लीक पर आंदोलन जारी रहेगा।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा विपक्ष की प्रमुख माँग।
अखिलेश यादव ने बताया — देश में 150 से अधिक पेपर लीक , अकेले उत्तर प्रदेश में 20 से ज़्यादा मामले।
विपक्ष की चार माँगें: शिक्षा मंत्री का इस्तीफा, स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा, छात्रों के मामले वापस, पुलिस की जाँच।
तृणमूल कांग्रेस ने कांग्रेस के धरने को समर्थन दिया; सौगत रॉय और कीर्ति आज़ाद ने एकजुटता जताई।

नई दिल्ली, 22 जुलाईनीट पेपर लीक विवाद को लेकर विपक्षी दलों ने बुधवार को स्पष्ट किया कि यदि केंद्र सरकार संसद में स्थगन प्रस्ताव स्वीकार नहीं करती, तो केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग को लेकर चल रहा आंदोलन बिना रुके जारी रहेगा। संसद भवन के बाहर एकत्र हुए विपक्षी नेताओं ने एकसुर में सरकार पर छात्रों के प्रति 'संवेदनहीनता' का आरोप लगाया।

मुख्य घटनाक्रम

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने संसद परिसर के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए कहा, 'पहली बात, इस्तीफा होना चाहिए। दूसरी बात, छात्रों और युवाओं की मांगों पर ध्यान दिया जाना चाहिए। तीसरी बात, बच्चों के साथ जैसा बर्ताव किया गया, अगर ऐसा होता रहा तो यह सिलसिला चलता रहेगा।' उन्होंने यह भी कहा कि पेपर लीक का मसला किसी एक परीक्षा तक सीमित नहीं है — देश में 150 से अधिक पेपर लीक हो चुके हैं, जिनमें अकेले उत्तर प्रदेश में 20 से ज़्यादा मामले सामने आए हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब नीट-यूजी 2024 परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर देशभर में छात्र आंदोलित हैं और संसद के मानसून सत्र में विपक्ष इसे केंद्रीय मुद्दा बनाए हुए है।

विपक्ष की चार प्रमुख माँगें

कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने केंद्र सरकार पर 'संवेदनहीन' होने का आरोप लगाते हुए कहा, 'स्थगन प्रस्ताव लाया जाना चाहिए। सदन का सारा कामकाज रोक दिया जाना चाहिए और सीधे इसी प्रस्ताव पर चर्चा होनी चाहिए। मैंने स्पीकर को भी अपनी यह इच्छा बता दी है।' उन्होंने विपक्ष की चार माँगें गिनाईं — शिक्षा मंत्री का इस्तीफा, स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा, छात्रों के खिलाफ दर्ज मामले वापस लेना और पुलिस अधिकारियों के खिलाफ विस्तृत जाँच

प्रियंका गांधी का सवाल

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने दावा किया कि व्यवस्था पूरी तरह विफल हो चुकी है। उन्होंने पत्रकारों से पूछा, 'क्या हमारा लोकतंत्र बचा है? यह कोई आम विरोध-प्रदर्शन नहीं है; यह एक असली मुद्दे और असली समस्या से जुड़ा मामला है। देश के सभी माता-पिता, छात्र और शिक्षक यह बात जानते हैं।' उन्होंने यह भी तर्क दिया कि जब संसद में वंदे मातरम पर 10 घंटे चर्चा हो सकती है, तो स्थगन प्रस्ताव पर विस्तृत बहस क्यों नहीं होनी चाहिए।

तृणमूल कांग्रेस का समर्थन

गौरतलब है कि मंगलवार को प्रधानमंत्री आवास के निकट कांग्रेस के धरने को तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने भी समर्थन दिया। TMC सांसद सौगत रॉय ने कहा, 'मैं राहुल गांधी का पूरा समर्थन करता हूँ कि उन्होंने इस मुद्दे को सबके सामने रखा। केंद्रीय शिक्षा मंत्री को इस्तीफा दे देना चाहिए और नीट पेपर लीक की ठीक से जाँच होनी चाहिए।' TMC सांसद कीर्ति आज़ाद ने कहा, 'राजनीतिक मुद्दे अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन यह मुद्दा हमारे देश और युवाओं के भविष्य से जुड़ा है।'

आगे क्या होगा

विपक्ष का रुख स्पष्ट है — जब तक सरकार स्थगन प्रस्ताव को मंज़ूरी नहीं देती और चारों माँगें नहीं मानती, संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह दबाव बनाए रखा जाएगा। आलोचकों का कहना है कि यह गतिरोध मानसून सत्र की कार्यवाही को और बाधित कर सकता है, जबकि लाखों छात्र परीक्षा प्रणाली में सुधार की प्रतीक्षा में हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह संसदीय दबाव ज़मीनी बदलाव ला सकता है। देश में 150 से अधिक पेपर लीक का आँकड़ा किसी एक सरकार की नाकामी नहीं — यह परीक्षा-प्रशासन की संरचनागत खामी है, जो राज्यों में भी उतनी ही गहरी है। शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की माँग राजनीतिक रूप से तीखी है, लेकिन बिना प्रणालीगत सुधार के यह केवल एक चेहरे की अदला-बदली होगी। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक जाती है वह यह है कि छात्रों के खिलाफ दर्ज मामले और पुलिस कार्रवाई — जो विपक्ष की माँगों में शामिल हैं — अक्सर चर्चा से बाहर रह जाते हैं।
RashtraPress
22 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नीट पेपर लीक पर विपक्ष की प्रमुख माँगें क्या हैं?
विपक्ष की चार माँगें हैं — केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, संसद में स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा, छात्रों के खिलाफ दर्ज मामले वापस लेना और पुलिस अधिकारियों के खिलाफ विस्तृत जाँच। कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने कहा कि जब तक ये माँगें नहीं मानी जातीं, आंदोलन जारी रहेगा।
स्थगन प्रस्ताव क्या होता है और विपक्ष इसे क्यों माँग रहा है?
स्थगन प्रस्ताव संसद की नियमित कार्यवाही रोककर किसी अत्यावश्यक मुद्दे पर तत्काल चर्चा का संसदीय उपकरण है। विपक्ष चाहता है कि नीट पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दे पर सदन का सारा कामकाज स्थगित कर सीधे बहस हो, जिससे सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।
अखिलेश यादव ने पेपर लीक के बारे में क्या कहा?
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि पेपर लीक सिर्फ एक परीक्षा तक सीमित मुद्दा नहीं है — देश में 150 से अधिक पेपर लीक हो चुके हैं, जिनमें अकेले उत्तर प्रदेश में 20 से ज़्यादा मामले सामने आए हैं। उन्होंने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और छात्रों की माँगों पर ध्यान देने की अपील की।
तृणमूल कांग्रेस ने इस आंदोलन में क्या भूमिका निभाई?
तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने मंगलवार को प्रधानमंत्री आवास के निकट कांग्रेस के धरने को समर्थन दिया। TMC सांसद सौगत रॉय ने नीट पेपर लीक की निष्पक्ष जाँच और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की माँग का समर्थन किया, जबकि सांसद कीर्ति आज़ाद ने इसे युवाओं के भविष्य से जुड़ा राष्ट्रीय मुद्दा बताया।
प्रियंका गांधी वाड्रा ने इस विरोध-प्रदर्शन को लेकर क्या कहा?
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने दावा किया कि व्यवस्था पूरी तरह विफल हो चुकी है और यह कोई सामान्य विरोध नहीं बल्कि एक असली समस्या से जुड़ा आंदोलन है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब संसद में वंदे मातरम पर 10 घंटे चर्चा हो सकती है, तो स्थगन प्रस्ताव पर विस्तृत बहस क्यों नहीं होनी चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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