नीट पेपर लीक पर संसद में घमासान: BJP ने कांग्रेस को घेरा, विपक्ष ने शिक्षा मंत्री का इस्तीफा माँगा
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, 23 जुलाई — नीट पेपर लीक विवाद को लेकर संसद परिसर में राजनीतिक तापमान चरम पर पहुँच गया, जब सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसदों ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) पर संसद की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाया, जबकि विपक्षी दलों ने एकजुट होकर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग दोहराई। दोनों पक्षों के बीच यह गतिरोध उस वक्त और गहरा गया जब सरकार ने चर्चा के लिए सहमति जताई, लेकिन विपक्ष ने इस्तीफे को पूर्व शर्त बनाए रखा।
वित्त मंत्री का विपक्ष पर पलटवार
संसद परिसर में मीडिया से बातचीत में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि नीट पेपर लीक मामला देश के भविष्य — यानी छात्रों — से जुड़ा है। उन्होंने कहा, 'अभी तक पेपर लीक करने वालों को गिरफ्तार किया जा चुका है। प्रधानमंत्री फास्ट ट्रैक कोर्ट के ज़रिए दोषियों पर कार्रवाई करेंगे।' सीतारमण ने यह भी कहा कि पेपर लीक के बाद दोबारा परीक्षा हुई और नतीजे सामने आए, अब बच्चे आगे की तैयारी में जुटे हैं।
उन्होंने विपक्ष पर तीखा प्रहार करते हुए कहा, 'सरकार के चर्चा के लिए हामी भरने के बाद भी संसद की कार्यवाही क्यों बाधित की जा रही है? कांग्रेस का छात्रों के हित से कोई लेना-देना नहीं है — राजनीति करना और व्यवधान खड़ा करना ही इनका मकसद है।'
BJP और सहयोगी दलों की प्रतिक्रिया
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री ने छात्रों को भरोसा दिया है और बिना पेपर लीक हुए परीक्षा दोबारा संपन्न हो चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया, 'विपक्ष छात्रों के कंधे पर सवार होकर राजनीतिक बंदूक चलाने की कोशिश कर रहा है।' गिरिराज सिंह ने यह भी याद दिलाया कि राजस्थान में अशोक गहलोत के मुख्यमंत्री रहते और कांग्रेस सरकार के दौरान भी पेपर लीक की घटनाएँ हुई थीं।
मेरठ से BJP सांसद अरुण गोविल ने कहा कि सरकार जितने समय के लिए चर्चा चाहिए, उसके लिए तैयार है, फिर भी विपक्ष जिद पर अड़ा है। शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे ने कहा कि सरकार एक नहीं, दो नहीं, बल्कि तीन दिन तक चर्चा के लिए तैयार है, 'लेकिन विपक्ष सिर्फ हंगामा करना चाहता है।'
विपक्ष की माँग — इस्तीफा पहले, चर्चा बाद में
कांग्रेस सांसद उज्जवल रमन सिंह ने स्पष्ट किया, 'हम चाहते हैं कि संसद चले, लेकिन धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद ही चर्चा होनी चाहिए। छात्रों की माँग के साथ विपक्ष एकजुट है।' उन्होंने यह भी कहा कि इस्तीफे के अगले दिन ही चर्चा हो सकती है।
शिवसेना (UBT) सांसद अरविंद सावंत ने सरकार को 'असंवेदनशील' बताते हुए कहा कि कथनी और करनी में अंतर है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों के साथ पुलिस के व्यवहार पर भी सवाल उठाए और कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के साथ दुर्व्यवहार किया गया। तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद कीर्ति आजाद ने महंगाई और अन्य मुद्दों पर भी चर्चा की माँग उठाई।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
यह ऐसे समय में आया है जब नीट पेपर लीक मामले की जाँच केंद्रीय जाँच एजेंसियाँ कर रही हैं और सर्वोच्च न्यायालय भी इस पर नज़र रखे हुए है। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी को लेकर संसद ठप हुई हो — आलोचकों का कहना है कि परीक्षा प्रणाली में संरचनात्मक सुधार के बिना ऐसे विवाद बार-बार उठते रहेंगे।
आगे क्या होगा
फिलहाल दोनों पक्षों के बीच गतिरोध बना हुआ है। सरकार चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष के इस्तीफे की शर्त पर अड़ा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फास्ट ट्रैक कोर्ट के ज़रिए दोषियों को जल्द सज़ा दिलाने का वादा किया है। संसद सत्र के शेष दिनों में यह मुद्दा केंद्र में बना रहने की संभावना है।