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नीट विवाद: धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक संसद में चर्चा नहीं — राहुल गांधी का माइक फिर बंद

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नीट विवाद: धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक संसद में चर्चा नहीं — राहुल गांधी का माइक फिर बंद

सारांश

नीट पेपर लीक विवाद अब संसद के भीतर सीधे टकराव में बदल गया है। कांग्रेस ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को चर्चा की पूर्वशर्त बना दिया है, राहुल गांधी ने माइक बंद होने का आरोप लगाया, और विपक्ष ने 12 वर्षों में 150 से अधिक पेपर लीक का हवाला देते हुए सरकार को कटघरे में खड़ा किया।

मुख्य बातें

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि 24 जुलाई को संसद में किरेन रिजिजू के बयान का जवाब देते समय उनका माइक बंद कर दिया गया।
कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक नीट पेपर लीक मामले पर किसी भी संसदीय चर्चा में भाग नहीं लिया जाएगा।
विपक्ष की तीन मांगें: शिक्षा मंत्री की बर्खास्तगी, छात्रों पर कथित हिंसा के दोषियों पर कार्रवाई, और PM मोदी की सार्वजनिक माफी।
कांग्रेस सांसद हिबी ईडन ने दावा किया कि पिछले 12 वर्षों में 150 से अधिक पेपर लीक की घटनाएं हुईं।
कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने फास्ट-ट्रैक कोर्ट के सुझाव पर सवाल उठाते हुए न्यायिक बुनियादी ढांचे की व्यवस्था पर स्पष्टीकरण मांगा।

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने 24 जुलाई को आरोप लगाया कि केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के बयान का जवाब देने के लिए जब वे खड़े हुए, तब सदन में उनका माइक बंद कर दिया गया और उन्हें बोलने का अवसर नहीं दिया गया। संसद के मॉनसून सत्र के बीच कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से नहीं हटाया जाता, विपक्ष नीट पेपर लीक मामले पर किसी भी संसदीय चर्चा में भाग नहीं लेगा।

विपक्ष की तीन प्रमुख मांगें

राहुल गांधी ने पत्रकारों से बात करते हुए छात्रों की ओर से तीन मांगें सामने रखीं। पहली, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तत्काल पद से हटाया जाए। दूसरी, छात्रों पर कथित हिंसा और कार्रवाई के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं। तीसरी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी छात्रों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगें।

उन्होंने कहा कि संसदीय परंपरा के अनुसार यदि किसी सदस्य का नाम लिया जाता है तो उसे जवाब देने का अधिकार होता है, लेकिन उनके मामले में इस परंपरा का पालन नहीं किया गया।

फास्ट-ट्रैक कोर्ट के सुझाव पर सवाल

कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने प्रधानमंत्री के वीडियो संदेश और फास्ट-ट्रैक कोर्ट के सुझाव पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि न छात्रों ने और न ही विपक्ष ने इस तरह की कोर्ट की मांग उठाई थी। उनके अनुसार सरकार उन मुद्दों पर बात कर रही है जो मांगे ही नहीं गए, जबकि वास्तविक मांगों — शिक्षा मंत्री का इस्तीफा और कथित पुलिस कार्रवाई पर जवाबदेही — पर कोई स्पष्ट उत्तर नहीं दिया जा रहा।

कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने कहा कि फास्ट-ट्रैक कोर्ट केवल भवन नहीं होते — उनके लिए न्यायाधीश, कोर्ट मास्टर और सहायक स्टाफ की भी आवश्यकता होती है। उन्होंने सरकार से पूछा कि ये व्यवस्थाएं कब तक पूरी की जाएंगी।

जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग

कांग्रेस सांसद नसीर हुसैन ने कहा कि नीट सहित अन्य परीक्षाओं में हुई कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और सभी राजनीतिक दलों, छात्रों व सांसदों की यही माँग है कि इस पूरे मामले में जवाबदेही तय हो।

कार्ति चिदंबरम ने यह भी कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि भविष्य में प्रश्नपत्र तैयार होने से लेकर परीक्षा संपन्न होने तक पेपर लीक रोकने के लिए क्या ठोस तंत्र बनाया जाएगा, ताकि छात्रों का भरोसा बहाल हो सके।

पिछले १२ वर्षों में १५० से अधिक पेपर लीक का दावा

कांग्रेस सांसद हिबी ईडन ने प्रधानमंत्री से संसद में उपस्थित होकर इस मुद्दे पर विस्तृत बयान देने की माँग की। उन्होंने दावा किया कि पिछले 12 वर्षों में विभिन्न परीक्षाओं में 150 से अधिक पेपर लीक की घटनाएं हुईं, लेकिन सरकार ने कभी प्रभावी कार्रवाई नहीं की।

हिबी ईडन के अनुसार, इस विषय को पहले भी संसद में उठाया गया था और जांच समिति बनाने का सुझाव दिया गया था, परंतु उस पर कोई कदम नहीं उठाया गया। यह ऐसे समय में आया है जब देश भर के छात्र, अभिभावक और आम नागरिक परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को लेकर गहरी चिंता में हैं।

गौरतलब है कि नीट पेपर लीक विवाद अब केवल परीक्षा प्रणाली की खामियों का सवाल नहीं रहा — यह संसद के भीतर सत्ता और विपक्ष के बीच टकराव का केंद्र बन चुका है। आने वाले दिनों में सरकार की प्रतिक्रिया और विपक्ष की रणनीति यह तय करेगी कि मॉनसून सत्र किस दिशा में जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर चर्चा' का रुख रणनीतिक रूप से समझ में आता है, लेकिन इसका एक जोखिम भी है — यह सरकार को यह कहने का मौका देता है कि विपक्ष संसदीय कार्यवाही को बाधित कर रहा है। माइक बंद करने का आरोप गंभीर है और इसे स्वतंत्र रूप से सत्यापित किया जाना चाहिए, क्योंकि संसदीय प्रक्रिया की विश्वसनीयता दोनों पक्षों की जवाबदेही पर टिकी है। हिबी ईडन का '12 वर्षों में 150 पेपर लीक' का दावा यदि प्रमाणित होता है तो यह किसी एक सरकार की नहीं, बल्कि परीक्षा प्रशासन की संरचनात्मक विफलता को उजागर करता है। असली सवाल यह है कि क्या यह विवाद किसी ठोस सुधार की ओर जाएगा या केवल राजनीतिक श्रेय-दोष के खेल में सिमट जाएगा।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राहुल गांधी ने संसद में माइक बंद होने का आरोप क्यों लगाया?
राहुल गांधी के अनुसार जब वे केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के बयान का जवाब देने के लिए खड़े हुए, तब उनका माइक बंद कर दिया गया। संसदीय परंपरा के तहत यदि किसी सदस्य का नाम लिया जाता है तो उसे जवाब देने का अधिकार होता है, जिसका कथित तौर पर पालन नहीं किया गया।
कांग्रेस ने नीट विवाद पर संसद में चर्चा से इनकार क्यों किया?
कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से नहीं हटाया जाता, विपक्ष नीट पेपर लीक मामले पर किसी भी संसदीय चर्चा में भाग नहीं लेगा। विपक्ष का मानना है कि मंत्री की जवाबदेही तय किए बिना की गई चर्चा निरर्थक होगी।
विपक्ष की नीट मामले में तीन मुख्य मांगें क्या हैं?
राहुल गांधी ने तीन मांगें रखी हैं: पहली, धर्मेंद्र प्रधान को शिक्षा मंत्री पद से हटाया जाए; दूसरी, छात्रों पर कथित हिंसा के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो; तीसरी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी छात्रों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगें।
फास्ट-ट्रैक कोर्ट के सुझाव पर विपक्ष ने क्या आपत्ति जताई?
कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि न छात्रों ने और न विपक्ष ने फास्ट-ट्रैक कोर्ट की मांग उठाई थी। कार्ति चिदंबरम ने यह भी कहा कि ऐसी अदालतों के लिए न्यायाधीश, कोर्ट मास्टर और स्टाफ की भी जरूरत होती है और सरकार को बताना चाहिए कि ये व्यवस्थाएं कब पूरी होंगी।
हिबी ईडन ने पेपर लीक के बारे में क्या दावा किया?
कांग्रेस सांसद हिबी ईडन ने दावा किया कि पिछले 12 वर्षों में विभिन्न परीक्षाओं में 150 से अधिक पेपर लीक की घटनाएं हुईं, लेकिन सरकार ने कभी प्रभावी कार्रवाई नहीं की। उन्होंने यह भी कहा कि संसद में पहले भी जांच समिति बनाने का सुझाव दिया गया था, जिस पर कोई कदम नहीं उठाया गया।
राष्ट्र प्रेस
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