नीट पेपर लीक: अनिल विज ने धर्मेंद्र प्रधान का बचाव किया, राहुल गांधी की इस्तीफा मांग को बताया 'आसान राजनीति'
सारांश
मुख्य बातें
हरियाणा के कैबिनेट मंत्री अनिल विज ने 17 मई 2026 को अंबाला में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के पक्ष में मोर्चा संभाला, जब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने नीट पेपर लीक मामले में प्रधान का इस्तीफा माँगा। विज ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि धर्मेंद्र प्रधान सरकार के सबसे काबिल मंत्रियों में से एक हैं और उन्होंने मामला सामने आते ही तत्काल कार्रवाई की।
अनिल विज का पलटवार
विज ने कहा, 'आजकल इस्तीफे की मांग करना एक आम राजनीतिक चलन बन गया है, जबकि असली मुद्दा काम करके दिखाने का होता है।' उन्होंने यह भी कहा कि 'खड़े होकर इस्तीफा मांग लेना आसान है, लेकिन जिम्मेदारी निभाना और ठोस कार्रवाई करना ज्यादा महत्वपूर्ण है।' उनके अनुसार सरकार इस मामले में पूरी गंभीरता से काम कर रही है — दोषियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा रहा है और यह पता लगाया जा रहा है कि कमियाँ कहाँ रह गईं।
राहुल गांधी का आरोप
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दो अलग-अलग पोस्ट में सरकार पर निशाना साधा। पहली पोस्ट में उन्होंने 2024 और 2026 के नीट पेपर लीक की तुलना करते हुए लिखा — 'साल 2024 में नीट पेपर लीक हुआ। परीक्षा रद्द नहीं हुई। मंत्री ने इस्तीफा नहीं दिया। सीबीआई ने जांच बिठाई। एक कमेटी बनी। दूसरी ओर, साल 2026 में नीट पेपर लीक हुआ। परीक्षा रद्द हुई। मंत्री ने फिर इस्तीफा नहीं दिया। सीबीआई फिर जांच कर रही है। एक और कमेटी बनेगी।'
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीधे सवाल पूछे — 'बार-बार पेपर लीक क्यों हो रहे हैं? बार-बार इस परीक्षा पे चर्चा पर आप चुप क्यों हैं? बार-बार फेल हो रहे शिक्षा मंत्री को आप बर्खास्त क्यों नहीं कर रहे हैं?'
गांधी का दूसरा आरोप — जवाबदेही का फॉर्मूला
दूसरी पोस्ट में राहुल गांधी ने लिखा कि 'मोदी सरकार में जिम्मेदारी नहीं होती। सिर्फ जालसाजी का एक तय फॉर्मूला है — पहले लंबी खामोशी, फिर गुनहगारों को संरक्षण, फिर सवाल पूछने वालों पर हमला।' उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि 2024 में एनटीए के महानिदेशक को हटाया गया और अब उन्हें मुख्यमंत्री का प्रमुख सचिव बना दिया गया है।
नीट विवाद की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि नीट पेपर लीक का मुद्दा 2024 से राष्ट्रीय राजनीति में बार-बार उठता रहा है। 2026 में एक बार फिर परीक्षा रद्द होने के बाद विपक्ष ने सरकार पर शिक्षा व्यवस्था की विफलता का आरोप लगाया है। यह मामला लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ा है, जो मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी में महीनों-वर्षों की मेहनत लगाते हैं।
आगे क्या
केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) इस मामले की जाँच जारी रखे हुए है और सरकार ने संकेत दिया है कि दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई जारी रहेगी। राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच यह देखना होगा कि क्या सरकार परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए कोई संरचनात्मक सुधार की घोषणा करती है।