नीट-यूजी 2026 पेपर लीक: ओडिशा कांग्रेस अध्यक्ष भक्त चरण दास ने केंद्र को घेरा, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग
सारांश
नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में ओडिशा कांग्रेस अध्यक्ष भक्त चरण दास ने केंद्र सरकार को 'संगठित अपराध' का जिम्मेदार ठहराया। 22-23 लाख छात्रों के भविष्य को खतरे में बताते हुए उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तत्काल इस्तीफे और निष्पक्ष जाँच की माँग की।
मुख्य बातें
ओपीसीसी अध्यक्ष भक्त चरण दास ने 12 मई 2026 को भुवनेश्वर में नीट-यूजी 2026 पेपर लीक को 'शिक्षा में संगठित अपराध' करार दिया।
इस वर्ष नीट परीक्षा में लगभग 22 से 23 लाख छात्र शामिल हुए थे, जिनका भविष्य खतरे में बताया गया।
कांग्रेस ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तत्काल इस्तीफे और निष्पक्ष व स्वतंत्र जाँच की माँग की।
दास ने कहा कि दोबारा परीक्षा से सरकार, जनता और देश पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा और छात्रों के जीवन में अनिश्चितता पैदा होगी।
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि देशभर में छात्र संगठन विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और केंद्रीय मंत्री को निशाना बना रहे हैं।
ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी (ओपीसीसी) के अध्यक्ष भक्त चरण दास ने 12 मई 2026 को भुवनेश्वर में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले को लेकर केंद्र सरकार की कड़ी निंदा की। उन्होंने इसे शिक्षा व्यवस्था के भीतर एक 'संगठित अपराध' करार देते हुए दोषियों के खिलाफ तत्काल और कड़ी कार्रवाई की माँग की। इस परीक्षा में इस वर्ष लगभग 22 से 23 लाख छात्र शामिल हुए थे।
मुख्य आरोप और बयान
दास ने कहा,
संपादकीय दृष्टिकोण
लेकिन ठोस संस्थागत सुधार की बजाय राजनीतिक बयानबाजी तक सिमट जाता है। भक्त चरण दास की माँग वाजिब है — 22-23 लाख छात्रों का भविष्य दाँव पर है — परंतु कांग्रेस को यह भी स्पष्ट करना होगा कि उसके अपने शासनकाल में पेपर लीक की घटनाएँ क्यों नहीं रोकी जा सकीं। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग राजनीतिक दृष्टि से तीखी है, लेकिन असली सवाल यह है कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की संरचनागत खामियों को दूर करने के लिए कोई भी दल दीर्घकालिक विधायी प्रतिबद्धता क्यों नहीं दिखाता।
RashtraPress
13 मई 2026
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामला क्या है?
नीट-यूजी 2026 परीक्षा का प्रश्नपत्र कथित तौर पर परीक्षा से पहले लीक हो गया, जिससे देशभर में लगभग 22 से 23 लाख छात्रों की परीक्षा की विश्वसनीयता पर सवाल उठ गए। इस मामले में भ्रष्ट तत्वों पर भारी मात्रा में पैसा कमाने के आरोप हैं।
ओडिशा कांग्रेस ने इस मामले में क्या माँग की है?
ओपीसीसी अध्यक्ष भक्त चरण दास ने दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी सजा और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तत्काल इस्तीफे की माँग की है। पार्टी ने निष्पक्ष व स्वतंत्र जाँच का रास्ता खोलने की भी अपील की है।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग क्यों की जा रही है?
कांग्रेस का कहना है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री के रूप में धर्मेंद्र प्रधान परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा सुनिश्चित करने में नाकाम रहे हैं। पार्टी ने यह भी कहा कि देशभर में छात्र संगठनों के विरोध प्रदर्शन ओडिशा के आत्म-सम्मान के लिए शर्मनाक स्थिति पैदा कर रहे हैं।
पेपर लीक से छात्रों पर क्या असर पड़ेगा?
लगभग 22 से 23 लाख छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है। दास के अनुसार, दोबारा परीक्षा होने की स्थिति में न केवल छात्रों के जीवन में अनिश्चितता बढ़ेगी, बल्कि सरकार और देश पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी पड़ेगा।
पिछले एक दशक में पेपर लीक की स्थिति कैसी रही है?
कांग्रेस नेताओं के अनुसार, पिछले एक दशक में देश में पेपर लीक की कई घटनाएँ हो चुकी हैं, जो शिक्षा व्यवस्था में गहरी संरचनागत खामियों की ओर इशारा करती हैं। हालाँकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है।