नीट यूजी 2026 रद्द: तेजस्वी यादव का BJP पर हमला, 23 लाख छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने नीट यूजी 2026 परीक्षा रद्द होने पर केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने मंगलवार, 12 मई को कहा कि देशभर में पेपर लीक का अंतहीन सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा और 23 लाख छात्रों के भविष्य के साथ एक बार फिर खिलवाड़ किया गया है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने पुष्टि की है कि 3 मई को आयोजित नीट परीक्षा रद्द कर दी गई है और पुनर्परीक्षा की तारीख अभी घोषित नहीं की गई है।
परीक्षा रद्द होने की पृष्ठभूमि
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के अनुसार, 3 मई 2026 को देशभर के 552 शहरों के सैकड़ों परीक्षा केंद्रों पर आयोजित नीट यूजी परीक्षा पेपर लीक की आशंका के चलते रद्द कर दी गई। अब इस परीक्षा को पुनः आयोजित किया जाएगा, हालाँकि नई तारीख की घोषणा अभी तक नहीं हुई है। यह ऐसे समय में आया है जब देश में परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पहले से ही सवालों के घेरे में है।
तेजस्वी यादव का सरकार पर सीधा हमला
तेजस्वी यादव ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "पेपर लीक के कारण 2026 की परीक्षा रद्द कर दी गई है। 23 लाख छात्रों के भविष्य से एक बार फिर खिलवाड़ किया गया। देश में पेपर लीक का अंतहीन सिलसिला खत्म ही नहीं हो रहा है। क्या भाजपा की सरकारों में इतनी भी प्रशासनिक क्षमता, योग्यता, इच्छाशक्ति व कौशल नहीं है कि एक सामान्य परीक्षा को बिना पेपर लीक हुए सुनियोजित ढंग से आयोजित कर सकें?" उन्होंने आगे तंज कसते हुए सवाल किया कि क्या यह भी कोई 'संयोग और प्रयोग वाला दांव' है जिससे देश की रुलाई में भी सत्ता की मलाई मिलती रहे।
जवाबदेही और पारदर्शिता पर सवाल
तेजस्वी यादव ने सरकार को नसीहत देते हुए कहा कि "सत्ता संरक्षण में लगातार होते 'पेपर लीक' से सरकार की नीति और नीयत पर ही सवाल उठ रहा है। दिखावटी जांच की औपचारिकता की बजाय सरकार को 'आत्मनिरीक्षण' करने की जरूरत है।" उन्होंने यह भी कहा कि खाली जुबानी खर्च करने से देश नहीं चलता — शासन-प्रशासन में पारदर्शिता के साथ जवाबदेही तय होनी चाहिए।
छात्रों और परिवारों पर आर्थिक व मानसिक असर
तेजस्वी यादव ने यह भी रेखांकित किया कि जब 23 लाख छात्र पुनर्परीक्षा देने के लिए दोबारा देशभर के 552 शहरों के परीक्षा केंद्रों पर जाएंगे, तो लाखों लीटर ईंधन की बर्बादी होगी और छात्रों तथा उनके परिजनों को भारी आर्थिक नुकसान के साथ-साथ शारीरिक और मानसिक कष्ट भी उठाना पड़ेगा। उन्होंने सवाल किया कि क्या प्रधानमंत्री ने इस नुकसान का मूल्यांकन और विश्लेषण किया है।
आगे क्या होगा
फिलहाल NTA ने पुनर्परीक्षा की तारीख घोषित नहीं की है। लाखों छात्र और उनके परिवार नई तारीख की प्रतीक्षा में हैं। यह मामला आने वाले दिनों में राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर और तेज होने की संभावना है।