नीट आंदोलन: छात्रों के केस वापस लेने पर बिहार में NDA-विपक्ष के बीच श्रेय की जंग
सारांश
मुख्य बातें
बिहार सरकार ने 28 जुलाई 2026 को नीट पेपर लीक मामले के विरोध में हुए प्रदर्शनों के दौरान गिरफ्तार और हिरासत में लिए गए छात्रों के खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस लेने तथा उन्हें रिहा करने का निर्णय लिया। इस फैसले के बाद पटना की राजनीति में तीखी बहस छिड़ गई है — विपक्ष इसे अपने दबाव की जीत बता रहा है, जबकि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने इस दावे को पूरी तरह नकार दिया है।
सरकार का पक्ष: NDA की उदारता, विपक्ष का दबाव नहीं
बिहार सरकार के मंत्री दिलीप जायसवाल ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय छात्रों के हित में लिया गया है। उन्होंने कहा, 'सरकार ने विरोध प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ दर्ज मामले वापस लेने का फैसला किया है। विपक्ष का काम आरोप लगाना है।'
मंत्री राम कृपाल यादव ने विस्तार से बताया कि जो छात्र नेता वास्तव में आंदोलन का नेतृत्व कर रहे थे, उन्होंने सरकार के साथ बातचीत की थी और एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस भी आयोजित हुई थी। उन्होंने कहा, 'यह फैसला विपक्ष के नेता या किसी अन्य राजनीतिक दल के दबाव में नहीं लिया गया है, जिन्होंने हिंसा के जरिए आंदोलन को बदनाम करने की हरसंभव कोशिश की।'
जेडीयू की तेजस्वी यादव पर पलटवार
जनता दल (यूनाइटेड) के प्रवक्ता नीरज कुमार ने राजद नेता तेजस्वी यादव के उस दावे पर सीधा निशाना साधा, जिसमें उन्होंने कहा था कि उनकी आंदोलन की चेतावनी के कारण सरकार ने छात्रों को रिहा किया। नीरज कुमार ने कहा, 'मैं पूछना चाहता हूं कि क्या असम में भी इन्हीं की चेतावनी का असर हो गया?'
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह निर्णय 26 तारीख की शाम 5 बजे तक की परिस्थितियों और नाबालिगों को ध्यान में रखकर लिया गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि जिन लोगों के खिलाफ प्रमाण मिले हैं और जिनकी जिम्मेदारी तय हुई है, वे कानून के दायरे से नहीं बचेंगे।
विपक्ष का दावा: आंदोलन का दबाव काम आया
विपक्षी दलों का कहना है कि बिहार सरकार ने उनके लगातार दबाव और जन-आंदोलन की चेतावनी के कारण यह कदम उठाया। हालांकि सरकार ने इस व्याख्या को सिरे से खारिज किया है और इसे NDA की 'उदारता' करार दिया है। यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब नीट पेपर लीक प्रकरण पहले से ही राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक तनाव का केंद्र बना हुआ है।
आगे क्या: दोषियों पर कार्रवाई जारी रहेगी
नीरज कुमार ने स्पष्ट किया कि छात्रों के मामले वापस लेने का अर्थ यह नहीं कि सभी गिरफ्तार लोगों को राहत मिलेगी। 26 जुलाई की शाम 5 बजे के बाद हुई गिरफ्तारियाँ इस फैसले के दायरे से बाहर हैं। सरकार का रुख है कि जो वास्तव में दोषी हैं, उन्हें कानूनी प्रक्रिया का सामना करना होगा। गौरतलब है कि नीट पेपर लीक मामले की जाँच अभी भी जारी है और यह पूरा प्रकरण देशभर के लाखों छात्रों की परीक्षा प्रणाली में विश्वास से जुड़ा हुआ है।