28 जुलाई 2026
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नीट आंदोलन: छात्रों के केस वापस लेने पर बिहार में NDA-विपक्ष के बीच श्रेय की जंग

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नीट आंदोलन: छात्रों के केस वापस लेने पर बिहार में NDA-विपक्ष के बीच श्रेय की जंग

सारांश

नीट पेपर लीक आंदोलन में गिरफ्तार छात्रों को रिहा करने और मुकदमे वापस लेने के बिहार सरकार के फैसले ने नई राजनीतिक जंग छेड़ दी है — NDA इसे अपनी उदारता बता रहा है, विपक्ष इसे अपने दबाव की जीत। श्रेय की यह लड़ाई बताती है कि नीट विवाद अब सिर्फ परीक्षा का मुद्दा नहीं, बिहार की राजनीति का केंद्र बन चुका है।

मुख्य बातें

बिहार सरकार ने 28 जुलाई 2026 को नीट आंदोलन में शामिल छात्रों के खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस लेने और हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा करने का निर्णय लिया।
मंत्री राम कृपाल यादव ने कहा कि यह फैसला छात्र नेताओं के साथ हुई बातचीत और उनकी माँगों के आधार पर लिया गया, न कि विपक्षी दबाव में।
जेडीयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने तेजस्वी यादव के दावे को खारिज करते हुए कहा कि यह NDA सरकार की उदारता है।
26 जुलाई शाम 5 बजे के बाद गिरफ्तार लोग इस राहत के दायरे से बाहर हैं; जिन पर प्रमाण हैं, उन पर कार्रवाई जारी रहेगी।
विपक्ष ने इस फैसले को अपने आंदोलन की जीत बताया, जिसे NDA ने पूरी तरह नकार दिया।

बिहार सरकार ने 28 जुलाई 2026 को नीट पेपर लीक मामले के विरोध में हुए प्रदर्शनों के दौरान गिरफ्तार और हिरासत में लिए गए छात्रों के खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस लेने तथा उन्हें रिहा करने का निर्णय लिया। इस फैसले के बाद पटना की राजनीति में तीखी बहस छिड़ गई है — विपक्ष इसे अपने दबाव की जीत बता रहा है, जबकि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने इस दावे को पूरी तरह नकार दिया है।

सरकार का पक्ष: NDA की उदारता, विपक्ष का दबाव नहीं

बिहार सरकार के मंत्री दिलीप जायसवाल ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय छात्रों के हित में लिया गया है। उन्होंने कहा, 'सरकार ने विरोध प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ दर्ज मामले वापस लेने का फैसला किया है। विपक्ष का काम आरोप लगाना है।'

मंत्री राम कृपाल यादव ने विस्तार से बताया कि जो छात्र नेता वास्तव में आंदोलन का नेतृत्व कर रहे थे, उन्होंने सरकार के साथ बातचीत की थी और एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस भी आयोजित हुई थी। उन्होंने कहा, 'यह फैसला विपक्ष के नेता या किसी अन्य राजनीतिक दल के दबाव में नहीं लिया गया है, जिन्होंने हिंसा के जरिए आंदोलन को बदनाम करने की हरसंभव कोशिश की।'

जेडीयू की तेजस्वी यादव पर पलटवार

जनता दल (यूनाइटेड) के प्रवक्ता नीरज कुमार ने राजद नेता तेजस्वी यादव के उस दावे पर सीधा निशाना साधा, जिसमें उन्होंने कहा था कि उनकी आंदोलन की चेतावनी के कारण सरकार ने छात्रों को रिहा किया। नीरज कुमार ने कहा, 'मैं पूछना चाहता हूं कि क्या असम में भी इन्हीं की चेतावनी का असर हो गया?'

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह निर्णय 26 तारीख की शाम 5 बजे तक की परिस्थितियों और नाबालिगों को ध्यान में रखकर लिया गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि जिन लोगों के खिलाफ प्रमाण मिले हैं और जिनकी जिम्मेदारी तय हुई है, वे कानून के दायरे से नहीं बचेंगे।

विपक्ष का दावा: आंदोलन का दबाव काम आया

विपक्षी दलों का कहना है कि बिहार सरकार ने उनके लगातार दबाव और जन-आंदोलन की चेतावनी के कारण यह कदम उठाया। हालांकि सरकार ने इस व्याख्या को सिरे से खारिज किया है और इसे NDA की 'उदारता' करार दिया है। यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब नीट पेपर लीक प्रकरण पहले से ही राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक तनाव का केंद्र बना हुआ है।

आगे क्या: दोषियों पर कार्रवाई जारी रहेगी

नीरज कुमार ने स्पष्ट किया कि छात्रों के मामले वापस लेने का अर्थ यह नहीं कि सभी गिरफ्तार लोगों को राहत मिलेगी। 26 जुलाई की शाम 5 बजे के बाद हुई गिरफ्तारियाँ इस फैसले के दायरे से बाहर हैं। सरकार का रुख है कि जो वास्तव में दोषी हैं, उन्हें कानूनी प्रक्रिया का सामना करना होगा। गौरतलब है कि नीट पेपर लीक मामले की जाँच अभी भी जारी है और यह पूरा प्रकरण देशभर के लाखों छात्रों की परीक्षा प्रणाली में विश्वास से जुड़ा हुआ है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इस पर छिड़ी श्रेय की राजनीति यह उजागर करती है कि दोनों पक्ष छात्रों की पीड़ा को असली मुद्दे से ज्यादा राजनीतिक हथियार मान रहे हैं। असली सवाल यह है कि नीट पेपर लीक के लिए जिम्मेदार लोगों को सज़ा कब मिलेगी — जो अभी तक अनुत्तरित है। '26 जुलाई शाम 5 बजे' की कट-ऑफ लाइन भी स्पष्टीकरण माँगती है: यह प्रशासनिक तर्क है या राजनीतिक सुविधा? जब तक पेपर लीक के मूल दोषियों पर कार्रवाई दिखाई नहीं देती, तब तक यह 'उदारता' महज़ राजनीतिक प्रबंधन लगती है।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिहार सरकार ने नीट आंदोलन के छात्रों के केस क्यों वापस लिए?
बिहार सरकार ने नीट पेपर लीक विरोध प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस लेने और हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा करने का फैसला किया। सरकार के अनुसार यह निर्णय छात्र नेताओं के साथ हुई बातचीत और उनकी माँगों के आधार पर लिया गया है।
NDA और विपक्ष के बीच श्रेय का विवाद क्या है?
विपक्षी दलों, विशेषकर राजद नेता तेजस्वी यादव, का दावा है कि उनके आंदोलन की चेतावनी के कारण सरकार ने छात्रों को रिहा किया। NDA नेताओं ने इसे सिरे से नकारते हुए कहा कि यह सरकार की अपनी उदारता है और विपक्ष ने हिंसा के जरिए आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश की।
क्या सभी गिरफ्तार छात्रों को रिहा किया जाएगा?
नहीं। जेडीयू प्रवक्ता नीरज कुमार के अनुसार यह राहत 26 जुलाई की शाम 5 बजे तक की परिस्थितियों और नाबालिगों को ध्यान में रखकर दी गई है। इसके बाद हुई गिरफ्तारियाँ इस फैसले के दायरे से बाहर हैं और जिन पर प्रमाण मिले हैं, उन पर कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।
नीट पेपर लीक आंदोलन की पृष्ठभूमि क्या है?
नीट पेपर लीक प्रकरण ने देशभर में छात्रों में भारी आक्रोश पैदा किया था। बिहार में भी छात्रों ने व्यापक विरोध प्रदर्शन किए, जिनके दौरान कई छात्र हिरासत में लिए गए और उन पर मुकदमे दर्ज किए गए। यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने वाला बन गया।
आगे नीट मामले में क्या होगा?
सरकार ने स्पष्ट किया है कि छात्रों के मामले वापस लेने का मतलब दोषियों को बचाना नहीं है। पेपर लीक के लिए जिम्मेदार लोगों पर जाँच और कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी। राजनीतिक श्रेय की बहस के बीच मूल मामले की जाँच का भविष्य अभी अनिश्चित बना हुआ है।
राष्ट्र प्रेस
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