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बिहार सरकार ने NEET आंदोलन के मामले वापस लिए, गिरफ्तार छात्रों की रिहाई का आदेश

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बिहार सरकार ने NEET आंदोलन के मामले वापस लिए, गिरफ्तार छात्रों की रिहाई का आदेश

सारांश

बिहार सरकार ने NEET/UG अनियमितता आंदोलन से जुड़े सभी मामले वापस लेने और गिरफ्तार प्रदर्शनकारियों को रिहा करने का आदेश दिया। राजद ने इसे तेजस्वी प्रसाद यादव के अल्टीमेटम की जीत बताया, जबकि सरकार ने छात्रों की चिंताओं को आधार बताया।

मुख्य बातें

बिहार सरकार ने 27 जुलाई 2026 को NEET/UG छात्र आंदोलन से जुड़े सभी मामले वापस लेने का निर्णय लिया।
26 जुलाई 2026 की शाम 6 बजे तक दर्ज सभी FIR, परिवाद और कारण बताओ नोटिस वापस लिए जाएंगे।
गिरफ्तार और हिरासत में लिए गए सभी प्रदर्शनकारियों को शीघ्र रिहा करने का आश्वासन दिया गया।
सरकार ने स्पष्ट किया कि आंदोलन से जुड़े किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कोई दंडात्मक या प्रतिशोधात्मक कार्रवाई नहीं होगी।
राजद नेता एजाज अहमद ने इसे नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव के अल्टीमेटम का परिणाम बताया।

बिहार सरकार ने 27 जुलाई 2026 को नीट/यूजी परीक्षा में कथित अनियमितताओं के विरोध में उठे छात्र आंदोलन से जुड़े प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी मामलों को वापस लेने का निर्णय लिया है। गृह विभाग की आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, 26 जुलाई 2026 की शाम 6 बजे तक दर्ज सभी प्राथमिकी, परिवाद और कारण बताओ नोटिस वापस लेने की प्रक्रिया तत्काल शुरू की जाएगी और हिरासत में लिए गए सभी लोगों को शीघ्र रिहा किया जाएगा।

सरकार का फैसला: क्या-क्या मिली राहत

गृह विभाग की विज्ञप्ति में स्पष्ट किया गया है कि सरकार छात्र आंदोलन में शामिल किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कोई दंडात्मक, प्रतिशोधात्मक या प्रतिकूल कानूनी कार्रवाई नहीं करेगी। 26 जुलाई की शाम 6 बजे से पहले दर्ज मामलों में भविष्य में भी प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं होगी।

इसके साथ ही सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि आंदोलन के दौरान गिरफ्तार या हिरासत में लिए गए सभी लोगों को जल्द से जल्द रिहा किया जाएगा। यह राहत उन सभी पर लागू होगी जिन पर आंदोलन से संबंधित मामलों में कानूनी कार्रवाई की गई थी।

राजद का दावा: विपक्ष के दबाव में झुकी सरकार

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने इस फैसले को विपक्ष की जीत बताया। राजद नेता एजाज अहमद ने फेसबुक पर लिखा कि नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव के अल्टीमेटम के बाद राज्य सरकार को झुकना पड़ा। उन्होंने लिखा, 'नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव के अल्टीमेटम के बाद राज्य सरकार ने छात्र आंदोलन में दर्ज प्राथमिकी तत्काल वापस लेने के लिए गृह विभाग की ओर से नोटिस जारी कर सकारात्मक दिशा में सहमति व्यक्त की है। अंततः सरकार को अपने फैसले वापस लेने पड़े।' उन्होंने यह भी टिप्पणी की, 'झुकती है सरकार, झुकाने वाला चाहिए।'

गौरतलब है कि राजद के इस दावे पर बिहार सरकार की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक खंडन सामने नहीं आया है। सरकार ने अपने बयान में छात्रों की चिंताओं और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की माँगों को इस निर्णय का आधार बताया है।

आंदोलन की पृष्ठभूमि

यह निर्णय ऐसे समय आया है जब नीट/यूजी परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर बिहार समेत देशभर में छात्रों का विरोध प्रदर्शन जारी था। परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की माँग को लेकर प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर उतरकर आवाज़ उठाई थी, जिसके बाद पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया था।

यह ऐसे समय में आया है जब नीट विवाद राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक बहस का केंद्र बना हुआ है और कई राज्यों में छात्र संगठनों ने परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की माँग उठाई है।

आगे क्या होगा

सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार, एफआईआर वापसी की विधिक प्रक्रिया तत्काल प्रभाव से शुरू की जाएगी। हालाँकि, इस प्रक्रिया की समयसीमा और निगरानी तंत्र को लेकर अभी विस्तृत दिशानिर्देश सामने नहीं आए हैं। छात्र संगठनों की नज़र अब इस घोषणा के ज़मीनी क्रियान्वयन पर होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि जिन NEET अनियमितताओं ने आंदोलन को जन्म दिया, उन पर क्या कार्रवाई हुई। FIR वापसी और रिहाई की घोषणा के बाद भी परीक्षा सुधार की माँग अनुत्तरित है। राजद का 'अल्टीमेटम' वाला आख्यान राजनीतिक श्रेय की लड़ाई को उजागर करता है, जो अक्सर असली मुद्दे — परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता — को पीछे धकेल देती है। यह पहली बार नहीं है कि छात्र आंदोलन के बाद मामले वापस लिए गए हों; बिना संरचनात्मक सुधार के ऐसी राहतें अगले विस्फोट की भूमि तैयार करती हैं।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिहार सरकार ने NEET आंदोलन से जुड़े मामले क्यों वापस लिए?
सरकार ने कहा है कि छात्रों की चिंताओं और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की माँगों को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया। राजद ने इसे नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव के अल्टीमेटम के दबाव का परिणाम बताया है।
कौन-से मामले वापस लिए जाएंगे और किसे राहत मिलेगी?
26 जुलाई 2026 की शाम 6 बजे तक आंदोलन के दौरान दर्ज सभी FIR, परिवाद और कारण बताओ नोटिस वापस लिए जाएंगे। गिरफ्तार और हिरासत में लिए गए सभी प्रदर्शनकारियों को भी शीघ्र रिहा किया जाएगा।
NEET/UG छात्र आंदोलन बिहार में क्यों हुआ?
नीट/यूजी परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर बिहार समेत देशभर में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किए। प्रदर्शनकारी परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही की माँग कर रहे थे।
राजद ने इस फैसले पर क्या कहा?
राजद नेता एजाज अहमद ने फेसबुक पर दावा किया कि नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव के अल्टीमेटम के बाद सरकार को झुकना पड़ा। उन्होंने कहा कि 'अंततः सरकार को अपने फैसले वापस लेने पड़े।'
क्या आंदोलन से जुड़े लोगों पर भविष्य में कोई कार्रवाई हो सकती है?
गृह विभाग की विज्ञप्ति के अनुसार, सरकार आंदोलन में शामिल किसी भी व्यक्ति के खिलाफ भविष्य में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से कोई दंडात्मक, प्रतिशोधात्मक या प्रतिकूल कानूनी कार्रवाई नहीं करेगी।
राष्ट्र प्रेस
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