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पेपर लीक पर फास्ट ट्रैक कोर्ट: बिहार में NDA ने किया स्वागत, विपक्ष बोला — ठोस कार्रवाई चाहिए

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पेपर लीक पर फास्ट ट्रैक कोर्ट: बिहार में NDA ने किया स्वागत, विपक्ष बोला — ठोस कार्रवाई चाहिए

सारांश

पेपर लीक पर फास्ट ट्रैक कोर्ट और सोनम वांगचुक के अनशन समाप्त होने पर PM मोदी के एक्स पोस्ट के बाद बिहार में सियासी तापमान बढ़ा। NDA ने स्वागत किया, विपक्ष ने 10 साल में 152 पेपर लीक का हवाला देकर ठोस कदमों की माँग रखी।

मुख्य बातें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर वीडियो साझा कर पेपर लीक मामलों के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट गठन और सोनम वांगचुक के अनशन समाप्ति का उल्लेख किया।
बिहार के मंत्री संजय पासवान , लेशी सिंह , राम कृपाल यादव और लखेंद्र पासवान ने सरकार के कदम का स्वागत किया।
जेडीयू विधायक विनय चौधरी और चेतन आनंद ने फास्ट ट्रैक कार्रवाई को सकारात्मक पहल बताया।
सीपीआई (एमएल) विधायक संदीप सौरव ने कहा कि पिछले 10 वर्षों में 152 पेपर लीक हुए और आरोपी जमानत पर बाहर आ जाते हैं।
विपक्ष ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और दिल्ली में छात्रों पर लाठीचार्ज पर प्रधानमंत्री की चुप्पी को मुद्दा बनाया।

पटना में 24 जुलाई को पेपर लीक मामलों के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करने के केंद्र सरकार के फैसले और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के भूख हड़ताल समाप्त करने के निर्णय पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा किए गए वीडियो के बाद बिहार की राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। NDA के नेताओं ने इस कदम का स्वागत किया है, जबकि विपक्षी दलों ने आश्वासनों से आगे बढ़कर ठोस कार्रवाई की माँग की है।

NDA नेताओं की प्रतिक्रिया

बिहार सरकार के मंत्री संजय पासवान ने कहा कि सरकार ने छात्रों की समस्याओं के समाधान के लिए बातचीत का रास्ता खुला रखा है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अपनी बात रखने का अधिकार सभी को है, लेकिन हिंसात्मक तरीके से आंदोलन करना उचित नहीं है और छात्रों को किसी के बहकावे में आकर गलत कदम नहीं उठाना चाहिए।

मंत्री लेशी सिंह ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार छात्रों एवं युवाओं के प्रति पूरी तरह संवेदनशील हैं, लेकिन कुछ तत्व आंदोलन को राजनीतिक रंग देने और सरकार को अस्थिर करने का प्रयास कर रहे हैं।

मंत्री राम कृपाल यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री का संदेश छात्रों को भरोसा दिलाने की दिशा में एक सकारात्मक प्रयास है और सरकार संसद में चर्चा के लिए तैयार है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दल छात्रों के मुद्दे को अपने स्वार्थ के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं।

मंत्री लखेंद्र पासवान ने कहा कि पेपर लीक की घटनाओं से छात्रों के साथ-साथ उनके परिवार भी प्रभावित होते हैं। उन्होंने सोनम वांगचुक के अनशन समाप्त करने के निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से समाधान निकालना ही सही मार्ग है।

जेडीयू विधायकों का पक्ष

जनता दल (यूनाइटेड) के विधायक विनय चौधरी ने कहा कि विपक्ष लगातार प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप की माँग कर रहा था, और अब जब प्रधानमंत्री ने छात्रों को कार्रवाई का भरोसा दिया है, तब भी विरोध जारी रखना समझ से परे है।

जेडीयू विधायक चेतन आनंद ने प्रधानमंत्री के संदेश को सकारात्मक पहल बताते हुए कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए सरकार सख्त कदम उठा रही है और फास्ट ट्रैक कार्रवाई की दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने बिहार विधानसभा के मानसून सत्र में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की अनुपस्थिति पर भी सवाल उठाए।

विपक्ष की तीखी आलोचना

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) के विधायक संदीप सौरव ने सरकार के दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि पिछले दस वर्षों में देशभर में 152 पेपर लीक के मामले सामने आए हैं। उन्होंने बिहार के संजीव मुखिया का उदाहरण देते हुए कहा कि पेपर लीक मामले में आरोपी होने के बावजूद उन्हें जमानत मिल गई, जो व्यवस्था की खामी को उजागर करता है।

सौरव ने यह भी सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री ने देश के शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर मौन क्यों साधा और दिल्ली में छात्रों पर हुए लाठीचार्ज पर दुख तक व्यक्त नहीं किया। उन्होंने कहा कि सोनम वांगचुक का अनशन समाप्त होना आंदोलन की समाप्ति नहीं है, क्योंकि देश के युवा किसी एक व्यक्ति के लिए नहीं, बल्कि अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

आम जनता और छात्रों पर असर

गौरतलब है कि पेपर लीक का मुद्दा बिहार समेत पूरे देश में लाखों परीक्षार्थियों को प्रभावित करता है, जो वर्षों की मेहनत के बाद परीक्षाओं में बैठते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब NEET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं को लेकर देशव्यापी आक्रोश चरम पर है।

फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन इस दिशा में एक संस्थागत कदम माना जा रहा है, लेकिन आलोचकों का कहना है कि जब तक जाँच और सज़ा की प्रक्रिया पारदर्शी और समयबद्ध नहीं होगी, तब तक यह व्यवस्था परीक्षार्थियों का भरोसा नहीं जीत पाएगी। आने वाले दिनों में सरकार की कार्रवाई की गति और दिशा ही यह तय करेगी कि यह फैसला महज राजनीतिक संदेश था या वास्तविक बदलाव की शुरुआत।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन सीपीआई (एमएल) का '10 साल में 152 पेपर लीक' का आँकड़ा बताता है कि समस्या की जड़ें गहरी हैं और पिछले प्रयास नाकाफी रहे हैं। असली परीक्षा यह है कि फास्ट ट्रैक अदालतें कितनी जल्दी सज़ा तक पहुँचती हैं — क्योंकि जब तक आरोपी आसानी से जमानत पर बाहर आते रहेंगे, तब तक निवारक प्रभाव सीमित रहेगा। सोनम वांगचुक के अनशन समाप्त होने को राजनीतिक जीत के रूप में पेश करना और दिल्ली में छात्रों पर लाठीचार्ज पर मौन रहना — यह विरोधाभास सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े करता है।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पेपर लीक मामलों के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट क्या होगा?
फास्ट ट्रैक कोर्ट एक विशेष अदालत होती है जो किसी खास श्रेणी के मामलों की सुनवाई त्वरित गति से करती है। पेपर लीक मामलों के लिए इसके गठन का उद्देश्य आरोपियों को शीघ्र सज़ा दिलाना और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए निवारक प्रभाव पैदा करना है।
सोनम वांगचुक ने भूख हड़ताल क्यों खत्म की?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा एक्स पर वीडियो साझा किए जाने और सरकार की ओर से संवाद के संकेत मिलने के बाद सोनम वांगचुक ने अपना अनशन समाप्त किया। हालाँकि, सीपीआई (एमएल) विधायक संदीप सौरव ने कहा कि यह आंदोलन कभी सिर्फ सोनम वांगचुक तक सीमित नहीं था।
बिहार में विपक्ष ने सरकार पर क्या आरोप लगाए?
सीपीआई (एमएल) विधायक संदीप सौरव ने कहा कि पिछले 10 वर्षों में देशभर में 152 पेपर लीक हुए और आरोपी जल्द जमानत पर बाहर आ जाते हैं। उन्होंने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की माँग और दिल्ली में छात्रों पर लाठीचार्ज पर प्रधानमंत्री की चुप्पी को भी मुद्दा बनाया।
बिहार में NDA नेताओं ने इस फैसले पर क्या कहा?
बिहार सरकार के मंत्रियों संजय पासवान, लेशी सिंह, राम कृपाल यादव और लखेंद्र पासवान ने फास्ट ट्रैक कोर्ट के फैसले का स्वागत किया और छात्रों से पढ़ाई पर ध्यान देने की अपील की। जेडीयू विधायकों ने विपक्ष पर छात्र आंदोलन का राजनीतिक फायदा उठाने का आरोप लगाया।
पेपर लीक का मुद्दा छात्रों को कैसे प्रभावित करता है?
पेपर लीक की घटनाएँ उन लाखों परीक्षार्थियों के परिश्रम और भविष्य को सीधे नुकसान पहुँचाती हैं जो वर्षों की तैयारी के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं में बैठते हैं। NEET समेत कई परीक्षाओं में अनियमितताओं के बाद यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर गंभीर चिंता का विषय बन चुका है।
राष्ट्र प्रेस
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