नीट पेपर लीक: बिहार मंत्री रामकृपाल यादव बोले — दोबारा परीक्षा से अभ्यर्थियों के हित सुरक्षित होंगे
सारांश
मुख्य बातें
बिहार सरकार के मंत्री रामकृपाल यादव ने 23 मई को पटना में कहा कि नीट पेपर लीक मामले को केंद्र सरकार ने अत्यंत गंभीरता से लिया है और मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के बाद अब दोबारा परीक्षा कराकर अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस बार की पुनर्परीक्षा में पिछली सभी खामियाँ दूर कर ली जाएंगी।
मुख्य घटनाक्रम
रामकृपाल यादव ने कहा, 'दोबारा परीक्षा लेकर अभ्यर्थियों के हितों को सुरक्षित किया जाएगा। बच्चों को किसी तरह की कोई तकलीफ नहीं होगी।' उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि भविष्य में भी परीक्षार्थियों को इस तरह की परेशानी नहीं उठानी पड़ेगी। यह बयान ऐसे समय में आया है जब नीट पेपर लीक विवाद को लेकर देशभर में छात्र और अभिभावक आक्रोशित हैं।
कानून-व्यवस्था और धामी के बयान पर प्रतिक्रिया
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सड़क पर नमाज़ संबंधी बयान पर रामकृपाल यादव ने कहा कि किसी भी राज्य के मुख्यमंत्री की पहली प्राथमिकता कानून-व्यवस्था बनाए रखना होती है। उन्होंने धामी के इस निर्णय को 'उचित' बताते हुए उसका स्वागत किया।
राम मंदिर, एआई समिट और गौ-तस्करी पर विचार
श्रीराम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण के बाद श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या पर यादव ने प्रसन्नता व्यक्त की। बिहार एआई समिट के उद्घाटन को लेकर उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के प्रयासों से आयोजित यह समिट 'स्वागतयोग्य कदम' है और इसके ज़रिये बिहार भी वैश्विक तकनीकी परिदृश्य में अपनी जगह बनाएगा। महाराष्ट्र सरकार द्वारा गौ-तस्करों पर महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण कानून (मकोका) के तहत कार्रवाई को उन्होंने 'बड़ा निर्णय' करार दिया और कहा कि गौ-माता की सुरक्षा अनिवार्य है।
हरभजन सिंह के भाजपा में आने पर प्रतिक्रिया
सांसद हरभजन सिंह द्वारा आम आदमी पार्टी (AAP) पर लगाए गए आरोपों के संदर्भ में रामकृपाल यादव ने उनके भारतीय जनता पार्टी (BJP) में आने का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि हरभजन सिंह 'बड़े खिलाड़ी और गंभीर व्यक्तित्व' हैं। यादव ने आगे दावा किया कि AAP की 'सच्चाई सामने आ चुकी है' और अगले चुनाव में भगवंत मान भी सत्ता से बाहर हो जाएंगे।
आगे क्या होगा
नीट की पुनर्परीक्षा की तिथि और प्रक्रिया को लेकर केंद्र सरकार के अगले कदम पर सबकी नज़रें टिकी हैं। लाखों मेडिकल अभ्यर्थियों का भविष्य इस फैसले पर निर्भर है और विशेषज्ञ माँग कर रहे हैं कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए ठोस संरचनात्मक सुधार किए जाएँ।