नीट-यूजी 2026 दोबारा परीक्षा: देशभर में कड़ी सुरक्षा, छात्राओं ने कहा — 'पेपर लीक ने तोड़ा आत्मविश्वास'
सारांश
मुख्य बातें
नीट-यूजी 2026 की पुनर्परीक्षा 22 जून 2026 को रविवार के दिन पूरे देश में आयोजित की गई, जिसमें जम्मू-कश्मीर के 127 केंद्रों पर 50,000 से अधिक उम्मीदवार शामिल हुए। पेपर लीक के बाद उत्पन्न विवाद की पृष्ठभूमि में यह परीक्षा सख्त सुरक्षा प्रबंधों के बीच संपन्न हुई, और छात्रों में तनाव तथा आत्मविश्वास की कमी साफ देखी गई।
छात्रों की प्रतिक्रिया
मध्य प्रदेश के जबलपुर से परीक्षा में शामिल होने वाली छात्रा अपेक्षा ठाकुर ने कहा, 'पेपर लीक होने के बाद तनाव हो गया है। हमने अच्छी तैयारी की है। उम्मीद है कि आज का पेपर अच्छा जाएगा।' वहीं एक अन्य छात्रा निहारिका तिवारी ने कहा, 'पहले पेपर लीक होने से काफी तनाव का माहौल है। अब भी डर का माहौल है। पेपर लीक होने से आत्मविश्वास कमज़ोर हो गया है।' यह ऐसे समय में आया है जब नीट को लेकर देशभर में परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
सुरक्षा व्यवस्था
जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में परीक्षा केंद्रों पर बहुस्तरीय सुरक्षा तैनात की गई। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में 9 केंद्रों पर कड़ी निगरानी रखी गई और प्रश्न पत्रों को पुलिस व आईटीबीपी की सुरक्षा में केंद्रों तक पहुँचाया गया। गौरतलब है कि पिछली परीक्षा में पेपर लीक के आरोपों के बाद इस बार प्रशासन ने सुरक्षा प्रोटोकॉल को कई गुना सख्त किया।
नेताओं की प्रतिक्रिया
मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री दिलीप अहिरवार ने परीक्षार्थियों को शुभकामनाएँ देते हुए कहा, 'ईश्वर से प्रार्थना है कि जो बच्चे परीक्षा में शामिल हो रहे हैं उनको सफलता मिले।' हरियाणा सरकार में मंत्री आरती राव ने भी छात्रों को शुभकामनाएँ दीं और अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद जताई। जनता दल (यूनाइटेड) के नेता राजीव रंजन ने कहा कि चाक-चौबंद व्यवस्था की गई है और छात्रों को अपना बेहतर प्रदर्शन करना चाहिए।
राजनीतिक विवाद
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक सीपी सिंह ने कहा, 'हम लोगों की कोशिश है कि परीक्षा अच्छी तरह से संपन्न हो जाए। पिछली बार पेपर लीक होने की बात सामने आई थी। पहली बार ऐसा नहीं हुआ है — आरोप लगाने वालों को बताना चाहिए कि उनके शासन में ऐसा नहीं हुआ क्या? ऐसी गड़बड़ी नहीं होनी चाहिए। सब चीजों के लिए कानून बनाए गए हैं।' यह टिप्पणी विपक्ष द्वारा परीक्षा तंत्र पर उठाए जा रहे सवालों के जवाब में आई।
आगे क्या
पुनर्परीक्षा के परिणाम और उसकी पारदर्शिता इस बात का पैमाना बनेगी कि परीक्षा प्रणाली में छात्रों का भरोसा बहाल हो पाता है या नहीं। आलोचकों का कहना है कि जब तक पेपर लीक की जड़ों तक जाँच नहीं होती और दोषियों पर कठोर कार्रवाई नहीं होती, तब तक केवल सुरक्षा कड़ी करना पर्याप्त नहीं होगा।