निषाद आरक्षण पर संजय निषाद का बड़ा बयान: OBC से SC में शामिल करो, संवैधानिक पहचान चाहिए
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश सरकार में मत्स्य मंत्री संजय निषाद ने 19 सितंबर 2026 को प्रयागराज में निषाद समाज के आरक्षण और संवैधानिक सुरक्षा को लेकर स्पष्ट रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई किसी पद या कुर्सी के लिए नहीं, बल्कि निषाद समाज की संवैधानिक पहचान और सुरक्षा के लिए है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के साथ गठबंधन में दरार की अटकलों के बीच यह बयान राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मुख्य माँग: OBC से निकालकर SC में शामिल करो
संजय निषाद ने कहा, 'आज हमारे लोगों के हक छीनने वाले लोग एससी-एसटी प्रोटेक्शन एक्ट हटाने की भी बात कर सकते हैं। हमारी माँग है कि हमें OBC से निकालकर SC में शामिल कर प्रमाण पत्र जारी किया जाए और हमें संवैधानिक सुरक्षा दी जाए। हम अपनी जातियों के हक की लड़ाई खुद लड़ रहे हैं।'
उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने इस मामले पर उसी दिन सुबह जिला अधिकारी से वार्ता की, और अधिकारी ने आश्वासन दिया कि दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई होगी तथा भविष्य में ऐसी घटनाएँ नहीं होने दी जाएँगी।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और संवैधानिक विसंगति
मंत्री निषाद ने बताया कि संविधान में निषाद समाज को मझवार और तुरहा के नाम से दर्ज किया गया था, किंतु कालांतर में इन जातियों को OBC सूची में डाल दिया गया, जिससे उनके मूल संवैधानिक अधिकार छिन गए। उन्होंने कहा, 'यह वही निषाद समाज है, जिसने देश को आज़ाद करने में योगदान दिया। संविधान में हमें मझवार, तुरहा के नाम से लिखा गया, लेकिन हमारा नाम OBC में डालकर हमारे हक छीन लिए गए।'
गौरतलब है कि 31 दिसंबर 2016 को तत्कालीन राज्यपाल ने कहा था कि यह जाति अब पिछड़ी नहीं है, परंतु पिछली सरकारों ने नई सूची नहीं बनाई। निषाद ने माँग की कि निषाद समाज को OBC के 27 प्रतिशत आरक्षण से अलग कर SC श्रेणी में शामिल किया जाए और मझवार व तुरहा का प्रमाण पत्र जारी किया जाए।
BJP के साथ गठबंधन पर अटकलें, निषाद ने दिया जवाब
BJP के उत्तर प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े शनिवार को संजय निषाद के आवास पर पहुँचे, जिसके बाद गठबंधन में तनाव की चर्चाएँ तेज हो गईं। हालाँकि निषाद ने इन अटकलों को खारिज करते हुए कहा, 'अगर नाराजगी होती तो मैं बैठक में जाता ही नहीं। मैं दिन में बैठक में शामिल था और शाम को शिष्टाचार के नाते मुलाकात हुई।'
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और गृह मंत्री अमित शाह का उल्लेख करते हुए तावड़े की यात्रा को सामान्य सौजन्य भेंट करार दिया। निषाद ने स्पष्ट किया कि इस भेंट में कोई राजनीतिक चर्चा नहीं हुई, केवल सामाजिक मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ।
SC-ST प्रोटेक्शन एक्ट पर चेतावनी
संजय निषाद ने SC-ST संरक्षण कानून की प्रासंगिकता पर जोर देते हुए कहा कि इस कानून के कारण ही निषाद समाज आज सुरक्षित है। उन्होंने कहा, 'अगर आज हमारा SC-ST प्रोटेक्शन छीन लिया जाए तो कोई भी निषाद समाज के खिलाफ बोलने लगेगा।' उनके अनुसार जो लोग समाज के अधिकार छीनने की कोशिश कर रहे हैं, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा।
आगे क्या होगा
निषाद ने बताया कि उनकी पार्टी 2022 से ही आरक्षण के मुद्दे पर सक्रिय है और RGI (रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया) में रिपोर्ट भी दाखिल की जा चुकी है। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की पृष्ठभूमि में पिछड़े वर्गों का आरक्षण एक संवेदनशील राजनीतिक मुद्दा बनता जा रहा है। निषाद समाज के भविष्य की दिशा बड़े पैमाने पर इस माँग के केंद्र और राज्य सरकार से मिलने वाले आधिकारिक जवाब पर निर्भर करेगी।