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निषाद आरक्षण पर संजय निषाद का बड़ा बयान: OBC से SC में शामिल करो, संवैधानिक पहचान चाहिए

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निषाद आरक्षण पर संजय निषाद का बड़ा बयान: OBC से SC में शामिल करो, संवैधानिक पहचान चाहिए

सारांश

UP मंत्री संजय निषाद ने प्रयागराज में स्पष्ट किया — यह लड़ाई कुर्सी के लिए नहीं, निषाद समाज को OBC से निकालकर SC में शामिल करने की है। 2016 के राज्यपाल के बयान का हवाला देते हुए उन्होंने पिछली सरकारों पर निशाना साधा और BJP गठबंधन में दरार की अटकलों को खारिज किया।

मुख्य बातें

UP मत्स्य मंत्री संजय निषाद ने 19 सितंबर 2026 को प्रयागराज में निषाद आरक्षण पर बड़ा बयान दिया।
माँग: निषाद समाज को OBC के 27% आरक्षण से अलग कर SC श्रेणी में शामिल किया जाए और मझवार, तुरहा का प्रमाण पत्र जारी हो।
31 दिसंबर 2016 को राज्यपाल ने निषाद जाति को 'अब पिछड़ी नहीं' घोषित किया था, लेकिन नई सूची नहीं बनी।
BJP UP प्रभारी विनोद तावड़े निषाद के आवास पहुँचे; निषाद ने इसे सौजन्य भेंट बताया, गठबंधन में दरार की अटकलें खारिज कीं।
निषाद ने SC-ST प्रोटेक्शन एक्ट को समाज की सुरक्षा की धुरी बताया और इसे हटाने की किसी भी कोशिश का विरोध किया।
RGI में रिपोर्ट दाखिल हो चुकी है; 2022 से यह माँग आधिकारिक रूप से उठाई जा रही है।

उत्तर प्रदेश सरकार में मत्स्य मंत्री संजय निषाद ने 19 सितंबर 2026 को प्रयागराज में निषाद समाज के आरक्षण और संवैधानिक सुरक्षा को लेकर स्पष्ट रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई किसी पद या कुर्सी के लिए नहीं, बल्कि निषाद समाज की संवैधानिक पहचान और सुरक्षा के लिए है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के साथ गठबंधन में दरार की अटकलों के बीच यह बयान राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

मुख्य माँग: OBC से निकालकर SC में शामिल करो

संजय निषाद ने कहा, 'आज हमारे लोगों के हक छीनने वाले लोग एससी-एसटी प्रोटेक्शन एक्ट हटाने की भी बात कर सकते हैं। हमारी माँग है कि हमें OBC से निकालकर SC में शामिल कर प्रमाण पत्र जारी किया जाए और हमें संवैधानिक सुरक्षा दी जाए। हम अपनी जातियों के हक की लड़ाई खुद लड़ रहे हैं।'

उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने इस मामले पर उसी दिन सुबह जिला अधिकारी से वार्ता की, और अधिकारी ने आश्वासन दिया कि दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई होगी तथा भविष्य में ऐसी घटनाएँ नहीं होने दी जाएँगी।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और संवैधानिक विसंगति

मंत्री निषाद ने बताया कि संविधान में निषाद समाज को मझवार और तुरहा के नाम से दर्ज किया गया था, किंतु कालांतर में इन जातियों को OBC सूची में डाल दिया गया, जिससे उनके मूल संवैधानिक अधिकार छिन गए। उन्होंने कहा, 'यह वही निषाद समाज है, जिसने देश को आज़ाद करने में योगदान दिया। संविधान में हमें मझवार, तुरहा के नाम से लिखा गया, लेकिन हमारा नाम OBC में डालकर हमारे हक छीन लिए गए।'

गौरतलब है कि 31 दिसंबर 2016 को तत्कालीन राज्यपाल ने कहा था कि यह जाति अब पिछड़ी नहीं है, परंतु पिछली सरकारों ने नई सूची नहीं बनाई। निषाद ने माँग की कि निषाद समाज को OBC के 27 प्रतिशत आरक्षण से अलग कर SC श्रेणी में शामिल किया जाए और मझवार व तुरहा का प्रमाण पत्र जारी किया जाए।

BJP के साथ गठबंधन पर अटकलें, निषाद ने दिया जवाब

BJP के उत्तर प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े शनिवार को संजय निषाद के आवास पर पहुँचे, जिसके बाद गठबंधन में तनाव की चर्चाएँ तेज हो गईं। हालाँकि निषाद ने इन अटकलों को खारिज करते हुए कहा, 'अगर नाराजगी होती तो मैं बैठक में जाता ही नहीं। मैं दिन में बैठक में शामिल था और शाम को शिष्टाचार के नाते मुलाकात हुई।'

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और गृह मंत्री अमित शाह का उल्लेख करते हुए तावड़े की यात्रा को सामान्य सौजन्य भेंट करार दिया। निषाद ने स्पष्ट किया कि इस भेंट में कोई राजनीतिक चर्चा नहीं हुई, केवल सामाजिक मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ।

SC-ST प्रोटेक्शन एक्ट पर चेतावनी

संजय निषाद ने SC-ST संरक्षण कानून की प्रासंगिकता पर जोर देते हुए कहा कि इस कानून के कारण ही निषाद समाज आज सुरक्षित है। उन्होंने कहा, 'अगर आज हमारा SC-ST प्रोटेक्शन छीन लिया जाए तो कोई भी निषाद समाज के खिलाफ बोलने लगेगा।' उनके अनुसार जो लोग समाज के अधिकार छीनने की कोशिश कर रहे हैं, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा।

आगे क्या होगा

निषाद ने बताया कि उनकी पार्टी 2022 से ही आरक्षण के मुद्दे पर सक्रिय है और RGI (रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया) में रिपोर्ट भी दाखिल की जा चुकी है। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की पृष्ठभूमि में पिछड़े वर्गों का आरक्षण एक संवेदनशील राजनीतिक मुद्दा बनता जा रहा है। निषाद समाज के भविष्य की दिशा बड़े पैमाने पर इस माँग के केंद्र और राज्य सरकार से मिलने वाले आधिकारिक जवाब पर निर्भर करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

इसलिए यह बयान सामाजिक न्याय और चुनावी रणनीति — दोनों का मिश्रण है। BJP के प्रदेश प्रभारी की 'सौजन्य भेंट' को 'कोई राजनीतिक चर्चा नहीं' कहकर खारिज करना एक संतुलन साधने की कोशिश है, लेकिन माँग की तीव्रता बताती है कि यह दबाव की राजनीति है, न केवल सामाजिक चेतना।
RashtraPress
20 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संजय निषाद की निषाद आरक्षण माँग क्या है?
संजय निषाद माँग कर रहे हैं कि निषाद समाज को OBC की 27% आरक्षण सूची से निकालकर SC श्रेणी में शामिल किया जाए और मझवार व तुरहा जाति का प्रमाण पत्र जारी किया जाए। उनका कहना है कि संविधान में इन जातियों को मूल रूप से SC में ही दर्ज किया गया था।
31 दिसंबर 2016 का राज्यपाल का बयान क्या था?
संजय निषाद के अनुसार, 31 दिसंबर 2016 को उत्तर प्रदेश के तत्कालीन राज्यपाल ने कहा था कि निषाद जाति अब पिछड़ी नहीं है। इसके बावजूद पिछली सरकारों ने कोई नई सूची नहीं बनाई, जिससे माँग अधर में लटकी रही।
क्या BJP के साथ निषाद पार्टी के गठबंधन में दरार आई है?
संजय निषाद ने इन अटकलों को स्पष्ट रूप से खारिज किया है। उन्होंने कहा कि अगर नाराजगी होती तो वे BJP की बैठक में जाते ही नहीं। BJP UP प्रभारी विनोद तावड़े की उनके आवास पर आई भेंट को उन्होंने सामाजिक और शिष्टाचार भेंट करार दिया।
SC-ST प्रोटेक्शन एक्ट पर संजय निषाद का क्या रुख है?
संजय निषाद ने इस कानून को निषाद समाज की सुरक्षा की आधारशिला बताया। उन्होंने कहा कि इस कानून के कारण ही समाज सुरक्षित है और इसे हटाने की किसी भी कोशिश का पुरजोर विरोध किया जाएगा।
इस माँग पर अब तक क्या आधिकारिक कदम उठाए गए हैं?
संजय निषाद के अनुसार, उनकी पार्टी 2022 से इस मुद्दे पर सक्रिय है और RGI (रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया) में रिपोर्ट दाखिल की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय पर काम जारी है, लेकिन माँग अभी तक पूरी नहीं हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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