31 अगस्त 2026
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संजय निषाद का अखिलेश पर पलटवार: 'अपराधी की कोई जाति नहीं, STF स्वतंत्र रूप से काम कर रही है'

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संजय निषाद का अखिलेश पर पलटवार: 'अपराधी की कोई जाति नहीं, STF स्वतंत्र रूप से काम कर रही है'

सारांश

उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री संजय निषाद ने अखिलेश यादव के STF और जातीय भेदभाव के आरोपों पर कड़ा जवाब दिया — 'अपराधी की कोई जाति नहीं होती।' साथ ही योगी आदित्यनाथ के एआई वीडियो को अमर्यादित बताते हुए विपक्ष पर राजनीतिक शिष्टाचार तोड़ने का आरोप लगाया।

मुख्य बातें

संजय निषाद ने 31 अगस्त को लखनऊ में अखिलेश यादव के STF-संबंधी बयान पर पलटवार किया।
निषाद ने कहा — 'अपराधी की कोई जाति नहीं होती; STF अब बिना राजनीतिक संरक्षण के स्वतंत्र रूप से काम कर रही है।' सामाजिक न्याय समिति के आंकड़ों के अनुसार करीब 28 लाख सरकारी नौकरियों में 14 लाख ओबीसी और साढ़े सात लाख एससी वर्ग के लोग हैं।
एसआईआर को सरकार की कवायद बताने के आरोप को निषाद ने खारिज किया, इसे चुनाव आयोग की स्वतंत्र प्रक्रिया बताया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से जुड़े एआई वीडियो को निषाद ने अमर्यादित और अनुचित करार दिया।

उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय निषाद ने 31 अगस्त को लखनऊ में समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव के एसटीएफ कार्रवाई संबंधी बयान पर कड़ा पलटवार किया। निषाद ने स्पष्ट कहा कि अपराधी की कोई जाति नहीं होती और कानून-व्यवस्था बनाए रखना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से जुड़े एआई वीडियो पर भी तीखी आपत्ति दर्ज कराई।

STF और कानून-व्यवस्था पर सरकार का पक्ष

निषाद ने कहा कि एसटीएफ का गठन पूर्ववर्ती सरकारों के कार्यकाल में हुआ था, लेकिन अंतर यह है कि पहले अपराधियों को राजनीतिक संरक्षण मिलता था, जबकि अब एसटीएफ बिना किसी दबाव के स्वतंत्र रूप से कार्रवाई कर रही है। उन्होंने विपक्ष को नसीहत देते हुए कहा कि आरोप लगाने से पहले अपने शासनकाल को याद करना चाहिए।

निषाद ने गोरखपुर के रेल आंदोलन का उल्लेख करते हुए सवाल किया कि जब सपा की सरकार थी, तब आंदोलनकारियों पर गोली क्यों चलाई गई और निषाद समाज के साथ किस तरह का व्यवहार हुआ था। उनका कहना था कि मौजूदा सरकार की नीति 'जीरो टॉलरेंस' की है और सरकार का उद्देश्य लोगों को सुरक्षा, न्याय और सम्मान देना तथा भय का माहौल समाप्त करना है।

ओबीसी-एससी प्रतिनिधित्व के आंकड़े

अखिलेश यादव के जातीय भेदभाव संबंधी आरोपों के जवाब में निषाद ने सामाजिक न्याय समिति के आंकड़ों का हवाला दिया। उन्होंने दावा किया कि करीब 28 लाख सरकारी नौकरियों में लगभग 14 लाख ओबीसी और करीब साढ़े सात लाख एससी वर्ग के लोगों की हिस्सेदारी है। उनके अनुसार, निषाद समुदाय के लोग भूमिहीन और आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण उनके पास उत्पीड़न की शिकायतें अधिक आती हैं, और अब इन शिकायतों को पहले की तुलना में अधिक गंभीरता से सुना जा रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि अधीनस्थ चयन आयोग और लोक सेवा आयोग जैसी संस्थाओं की भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ने से उन समुदायों के लोगों के नाम भी सामने आ रहे हैं, जिन्हें पहले पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिलता था।

एसआईआर पर चुनाव आयोग का बचाव

मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर अखिलेश यादव के आरोपों पर निषाद ने कहा कि यह चुनाव आयोग की स्वतंत्र और संवैधानिक प्रक्रिया है। मृत मतदाताओं के नाम हटाना, नए मतदाताओं को जोड़ना और दोहराव की विसंगतियाँ दूर करना लोकतंत्र की स्वच्छता के लिए जरूरी है। उन्होंने कहा कि इसे सरकार की राजनीतिक कवायद बताना उचित नहीं है, क्योंकि चुनाव आयोग किसी भी बड़े बदलाव से पहले सर्वदलीय बैठक करता है।

योगी के एआई वीडियो पर कड़ी आपत्ति

अखिलेश यादव की प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रदर्शित मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से जुड़े एआई वीडियो पर निषाद ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अयोध्या 'मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम की नगरी' है और सार्वजनिक जीवन में मर्यादित भाषा एवं राजनीतिक प्रचार होना चाहिए। निषाद ने योगी आदित्यनाथ को प्रदेश की जनता द्वारा चुना गया जनप्रतिनिधि और गोरक्षनाथ पीठ का पीठाधीश्वर बताते हुए कहा कि इस तरह का एआई वीडियो अमर्यादित और राजनीतिक शिष्टाचार के विरुद्ध है।

आगे क्या

यह राजनीतिक बयानबाजी ऐसे समय में सामने आई है जब उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारी की पृष्ठभूमि में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच जातीय प्रतिनिधित्व, कानून-व्यवस्था और चुनावी प्रक्रिया को लेकर तीखी नोकझोंक जारी है। गौरतलब है कि निषाद समुदाय उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक निर्णायक वोट बैंक माना जाता है, और डॉ. संजय निषाद का यह बयान उस समुदाय को सत्तापक्ष से जोड़े रखने की व्यापक रणनीति का हिस्सा प्रतीत होता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले निषाद समुदाय को भाजपा-गठबंधन के करीब रखने की सुनियोजित कोशिश है। 'अपराधी की कोई जाति नहीं' जैसा वाक्य सुनने में तटस्थ लगता है, लेकिन इसका निशाना स्पष्ट रूप से सपा की जातीय राजनीति पर है। हालाँकि, सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए ओबीसी-एससी प्रतिनिधित्व के दावों की स्वतंत्र पड़ताल जरूरी है — क्योंकि संख्याएँ बताना और उन्हें सत्यापित कराना दो अलग बातें हैं। एआई वीडियो पर आपत्ति जायज है, लेकिन यह सवाल भी उठता है कि राजनीतिक विमर्श को मर्यादित रखने की जिम्मेदारी केवल विपक्ष की है या सत्तापक्ष की भी।
RashtraPress
31 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संजय निषाद ने अखिलेश यादव के किस बयान पर पलटवार किया?
अखिलेश यादव ने एसटीएफ की कार्रवाई पर जातीय भेदभाव के आरोप लगाए थे। इस पर निषाद ने कहा कि अपराधी की कोई जाति नहीं होती और एसटीएफ अब बिना राजनीतिक संरक्षण के स्वतंत्र रूप से काम कर रही है।
एसआईआर (SIR) क्या है और इस पर विवाद क्यों है?
एसआईआर यानी विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण, चुनाव आयोग की वह प्रक्रिया है जिसमें मतदाता सूची से मृत नाम हटाए जाते हैं, नए नाम जोड़े जाते हैं और दोहराव दूर किया जाता है। अखिलेश यादव ने इसे सरकारी हस्तक्षेप बताया, जिसे निषाद ने खारिज करते हुए इसे चुनाव आयोग की स्वतंत्र संवैधानिक प्रक्रिया कहा।
निषाद ने ओबीसी-एससी प्रतिनिधित्व के बारे में क्या दावा किया?
सामाजिक न्याय समिति के आंकड़ों के हवाले से निषाद ने दावा किया कि करीब 28 लाख सरकारी नौकरियों में लगभग 14 लाख ओबीसी और साढ़े सात लाख एससी वर्ग के लोग हैं। उन्होंने कहा कि पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के कारण कमजोर वर्गों की भागीदारी बढ़ी है।
योगी आदित्यनाथ के एआई वीडियो पर निषाद की क्या प्रतिक्रिया थी?
निषाद ने अखिलेश यादव की प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिखाए गए एआई वीडियो को अमर्यादित और अनुचित बताया। उन्होंने कहा कि जनता द्वारा चुने गए नेता और गोरक्षनाथ पीठ के पीठाधीश्वर को इस तरह प्रदर्शित करना राजनीतिक शिष्टाचार के विरुद्ध है।
गोरखपुर रेल आंदोलन का जिक्र निषाद ने क्यों किया?
निषाद ने विपक्ष को उसके अपने शासनकाल की याद दिलाने के लिए गोरखपुर रेल आंदोलन का उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि तत्कालीन सपा सरकार के दौर में आंदोलनकारियों पर गोली चलाई गई थी और निषाद समाज के साथ उचित व्यवहार नहीं हुआ था।
राष्ट्र प्रेस
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