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अलवर के बुटोली गांव में 10 वर्षीय भानु बोरवेल में गिरा, 50-55 फीट गहराई में फंसा; रेस्क्यू जारी

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अलवर के बुटोली गांव में 10 वर्षीय भानु बोरवेल में गिरा, 50-55 फीट गहराई में फंसा; रेस्क्यू जारी

सारांश

राजस्थान के अलवर में पतंग लूटने दौड़ा 10 वर्षीय भानु खेत में खुले बोरवेल में जा गिरा — 50-55 फीट गहराई में फंसा, लेकिन आवाज़ आ रही है। दो JCB से खुदाई जारी है, विधायक और जिला कलेक्टर मौके पर। बंद पड़े बोरवेल की अनदेखी एक बार फिर सवालों के घेरे में।

मुख्य बातें

10 वर्षीय भानु सोमवार शाम अलवर जिले के बुटोली गांव में खुले बोरवेल में गिरा।
बच्चा 50-55 फीट की गहराई में फंसा है; प्रारंभिक जानकारी के अनुसार सकुशल है और आवाज़ सुनाई दे रही है।
बोरवेल के ऊपर रखा पत्थर आधा खिसका हुआ था; खेत में लंबे समय से आवाजाही न होने से किसी को बोरवेल की जानकारी नहीं थी।
दो JCB मशीनें मौके पर लाकर बगल से खुदाई शुरू की गई है।
रामगढ़ विधायक सुखवंत सिंह और जिला कलेक्टर घटनास्थल पर मौजूद हैं।
पुलिस, प्रशासन और रेस्क्यू टीम का ऑपरेशन जारी; प्राथमिकता बच्चे को सुरक्षित बाहर निकालना।

राजस्थान के अलवर जिले के रामगढ़ विधानसभा क्षेत्र स्थित बुटोली गांव में सोमवार शाम एक दिल दहला देने वाला हादसा हुआ, जब करीब 10 वर्षीय बच्चा भानु कटी पतंग लूटने के लिए खेत की ओर दौड़ते हुए एक खुले बोरवेल में जा गिरा। बच्चा फिलहाल 50 से 55 फीट की गहराई में फंसा हुआ है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार भानु सकुशल है और अंदर से उसकी आवाज़ सुनाई दे रही है।

हादसा कैसे हुआ

बताया जा रहा है कि भानु गांव में उड़ रही एक पतंग कटने के बाद उसे लूटने के लिए खेत की तरफ दौड़ा। खेत में काफी समय से बंद पड़ा एक पुराना बोरवेल था, जिसके ऊपर पत्थर रखा हुआ था, लेकिन वह आधा खिसका हुआ था। खेत में लंबे समय से लोगों की आवाजाही न होने के कारण किसी को इस बोरवेल की मौजूदगी का अंदाज़ा नहीं था। इसी दौरान बच्चा अचानक उस खुले बोरवेल में गिर गया और 50-55 फीट नीचे जाकर फंस गया।

रेस्क्यू ऑपरेशन की स्थिति

सूचना मिलते ही मौके पर दो जेसीबी मशीनें पहुँचाई गईं और बोरवेल के अगल-बगल से खुदाई शुरू की गई। पुलिस और प्रशासन के अधिकारी घटनास्थल पर मौजूद हैं। रेस्क्यू उपकरण और मशीनें मंगवाई गई हैं। रामगढ़ विधायक सुखवंत सिंह मौके पर पहुँचे और अधिकारियों से रेस्क्यू ऑपरेशन की जानकारी ली। उन्होंने बच्चे को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए आवश्यक संसाधन जुटाने के निर्देश दिए। जिला कलेक्टर के भी घटनास्थल पर पहुँचने की सूचना है।

परिजनों और ग्रामीणों की स्थिति

बच्चे के बोरवेल में गिरने की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जमा हो गए। भानु के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। विधायक सुखवंत सिंह ने जिला प्रशासन और संबंधित विभागों को तत्काल रेस्क्यू तेज़ करने के निर्देश दिए हैं और पार्टी नेतृत्व को भी घटना की जानकारी दी है।

बोरवेल हादसों का बड़ा संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब राजस्थान सहित देशभर में खुले और बंद पड़े बोरवेल बच्चों के लिए गंभीर खतरा बने हुए हैं। गौरतलब है कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में बंद पड़े बोरवेल को ढकने या बंद करने की व्यवस्था अक्सर लापरवाही का शिकार रहती है। प्रशासन की प्राथमिकता अभी भानु को बिना किसी नुकसान के सुरक्षित बाहर निकालना है। मौके पर मौजूद अधिकारी लगातार स्थिति पर नज़र बनाए हुए हैं और रेस्क्यू टीम ने प्रयास तेज़ कर दिए हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी ग्रामीण क्षेत्रों में खुले बोरवेल आम हैं। असली सवाल यह है कि क्या इस हादसे के बाद राजस्थान प्रशासन जिले भर के बंद बोरवेल का सर्वे और सीलिंग सुनिश्चित करेगा, या यह भी महज़ एक रेस्क्यू ऑपरेशन बनकर रह जाएगा। जब तक जवाबदेही तय नहीं होती, अगला हादसा केवल समय की बात है।
RashtraPress
1 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अलवर बोरवेल हादसे में कौन गिरा और कहाँ?
राजस्थान के अलवर जिले के रामगढ़ विधानसभा क्षेत्र के बुटोली गांव में करीब 10 वर्षीय बच्चा भानु सोमवार शाम खुले बोरवेल में गिर गया। वह कटी पतंग लूटने के लिए खेत की तरफ दौड़ रहा था।
भानु बोरवेल में कितनी गहराई में फंसा है?
भानु करीब 50 से 55 फीट की गहराई में फंसा हुआ है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार बच्चा सकुशल है और अंदर से उसकी आवाज़ सुनाई दे रही है।
रेस्क्यू ऑपरेशन में क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
मौके पर दो JCB मशीनें लाकर बोरवेल के अगल-बगल से खुदाई शुरू की गई है। पुलिस, प्रशासन के अधिकारी, रामगढ़ विधायक सुखवंत सिंह और जिला कलेक्टर घटनास्थल पर मौजूद हैं। रेस्क्यू उपकरण भी मंगवाए गए हैं।
बोरवेल खुला क्यों था?
बताया जा रहा है कि खेत में काफी समय से बंद पड़े इस पुराने बोरवेल के ऊपर पत्थर रखा था, लेकिन वह आधा खिसका हुआ था। खेत में लंबे समय से लोगों की आवाजाही न होने के कारण किसी को बोरवेल की मौजूदगी का अंदाज़ा नहीं था।
क्या भारत में बोरवेल हादसों को रोकने के लिए कोई कानून है?
सर्वोच्च न्यायालय ने बोरवेल को ढकने और सुरक्षित करने के लिए कई बार निर्देश जारी किए हैं। इसके बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में खुले और बंद पड़े बोरवेल बच्चों के लिए खतरा बने रहते हैं, क्योंकि ज़मीनी स्तर पर अनुपालन अक्सर कमज़ोर रहता है।
राष्ट्र प्रेस
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