1 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

अंबाला: बोरवेल में गिरे 4 वर्षीय निर्भय की मौत, 21 घंटे का बचाव अभियान रहा विफल

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
अंबाला: बोरवेल में गिरे 4 वर्षीय निर्भय की मौत, 21 घंटे का बचाव अभियान रहा विफल

सारांश

हरियाणा के अंबाला जिले के धनौरा गांव में 4 वर्षीय निर्भय बोरवेल में गिर गया। NDRF, SDRF और भारतीय सेना का 21 घंटे का संयुक्त बचाव अभियान भी उसे बचा नहीं सका। अस्पताल में ईसीजी जाँच के बाद डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित किया।

मुख्य बातें

हरियाणा के अंबाला जिले के धनौरा गांव में 4 वर्षीय निर्भय खेलते समय खुले बोरवेल में गिर गया।
NDRF , SDRF और भारतीय सेना का संयुक्त बचाव अभियान 21 घंटे तक चला, फिर भी बच्चे को नहीं बचाया जा सका।
ऋषिपाल ने ईसीजी जाँच के आधार पर बच्चे की मौत की पुष्टि की।
बचाव में सबसे बड़ी चुनौती बोरवेल में पानी भरा होना और बच्चे का दीवारों के बीच बुरी तरह फंसा होना था।
यह घटना ग्रामीण क्षेत्रों में खुले बोरवेल की खतरनाक स्थिति पर एक बार फिर सवाल खड़े करती है।

हरियाणा के अंबाला जिले के धनौरा गांव में खुले बोरवेल में गिरे 4 वर्षीय बच्चे निर्भय को 21 घंटे के अथक बचाव अभियान के बाद जीवित नहीं बचाया जा सका। 1 जुलाई को बाहर निकाले जाने के तुरंत बाद अस्पताल के डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

कैसे हुई घटना

धनौरा गांव में निर्भय खेलते समय खुले बोरवेल में जा गिरा। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, जिला प्रशासन, भारतीय सेना, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) की टीमें मौके पर पहुँच गईं। युद्धस्तर पर बचाव कार्य शुरू किया गया, जो लगातार 21 घंटों तक जारी रहा।

बचाव में क्या रही चुनौतियाँ

NDRF के असिस्टेंट कमांडेंट अनिल कुमार ने बताया कि इस ऑपरेशन में सबसे बड़ी बाधा यह थी कि बच्चा बोरवेल के भीतर पानी में डूबा हुआ था। इसके अलावा बोरवेल की अत्यधिक गहराई और संकरी दीवारें भी बड़ी चुनौती बनीं। उन्होंने कहा कि बच्चे का शरीर बोरवेल की अंदरूनी दीवार से इस कदर फंसा हुआ था कि उसके हाथ और दीवार के बीच भी कोई जगह नहीं बची थी।

डॉक्टरों की पुष्टि

मेडिकल ऑफिसर डॉ. ऋषिपाल ने बताया कि बच्चे को बाहर निकाले जाने के तुरंत बाद इमरजेंसी विभाग में लाया गया। रेस्क्यू स्थल पर ही उसकी हालत बेहद गंभीर दिखी। अस्पताल में ईसीजी जाँच के बाद पुष्टि हुई कि निर्भय की मृत्यु हो चुकी है। इसके बाद शव को मॉर्चरी में भेज दिया गया।

परिवार की प्रतिक्रिया

मृतक निर्भय के चाचा ने कहा कि प्रशासन ने पूरे ऑपरेशन के दौरान परिवार को हरसंभव सहयोग दिया। उन्होंने गांव वालों, पुलिस, सेना और सभी बचाव दलों का आभार व्यक्त किया जो घंटों तक डटे रहे।

आगे क्या होगा

यह घटना एक बार फिर खुले बोरवेल की खतरनाक स्थिति को सामने लाती है। विशेषज्ञों और बाल सुरक्षा संगठनों की लंबे समय से माँग रही है कि ग्रामीण क्षेत्रों में अनुपयोगी बोरवेल को तत्काल सील किया जाए। अधिकारियों से अपेक्षा है कि वे इस मामले में जवाबदेही सुनिश्चित करें।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी जमीनी अनुपालन नगण्य है। 21 घंटे का बचाव अभियान प्रशासन की तत्परता दिखाता है, लेकिन असली सवाल यह है कि धनौरा गांव में वह बोरवेल खुला क्यों था। जब तक जवाबदेही तय नहीं होती और ग्रामीण स्तर पर निगरानी तंत्र नहीं बनता, ऐसी त्रासदियाँ दोहराती रहेंगी।
RashtraPress
1 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अंबाला बोरवेल हादसे में क्या हुआ?
हरियाणा के अंबाला जिले के धनौरा गांव में 4 वर्षीय निर्भय खेलते समय खुले बोरवेल में गिर गया। NDRF, SDRF और भारतीय सेना के 21 घंटे के संयुक्त बचाव अभियान के बावजूद उसे जीवित नहीं बचाया जा सका।
निर्भय को बचाने में क्या-क्या चुनौतियाँ थीं?
NDRF के असिस्टेंट कमांडेंट अनिल कुमार के अनुसार, बोरवेल में पानी भरा होना, अत्यधिक गहराई और बच्चे का दीवारों के बीच बुरी तरह फंसा होना — ये तीन सबसे बड़ी बाधाएँ थीं। बच्चे के हाथ और बोरवेल की दीवार के बीच भी कोई जगह नहीं बची थी।
डॉक्टरों ने निर्भय को मृत कैसे घोषित किया?
मेडिकल ऑफिसर डॉ. ऋषिपाल के अनुसार, बच्चे को बाहर निकालने के बाद तुरंत इमरजेंसी विभाग में लाया गया जहाँ ईसीजी जाँच से मृत्यु की पुष्टि हुई। इसके बाद शव को मॉर्चरी भेज दिया गया।
बचाव अभियान में कौन-कौन सी एजेंसियाँ शामिल थीं?
इस ऑपरेशन में NDRF, SDRF और भारतीय सेना ने संयुक्त रूप से भाग लिया। स्थानीय पुलिस और जिला प्रशासन भी पूरे अभियान के दौरान मौके पर मौजूद रहे।
खुले बोरवेल की समस्या को लेकर क्या कदम उठाए जाने चाहिए?
विशेषज्ञों और बाल सुरक्षा संगठनों की लंबे समय से माँग है कि ग्रामीण क्षेत्रों में अनुपयोगी बोरवेल को तत्काल सील किया जाए। सर्वोच्च न्यायालय इस संबंध में पहले भी निर्देश जारी कर चुका है, लेकिन जमीनी अनुपालन अपर्याप्त रहा है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 19 घंटे पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 2 महीने पहले
  7. 2 महीने पहले
  8. 8 महीने पहले