अंबाला: बोरवेल में गिरे 4 वर्षीय निर्भय की मौत, 21 घंटे का बचाव अभियान रहा विफल
सारांश
मुख्य बातें
हरियाणा के अंबाला जिले के धनौरा गांव में खुले बोरवेल में गिरे 4 वर्षीय बच्चे निर्भय को 21 घंटे के अथक बचाव अभियान के बाद जीवित नहीं बचाया जा सका। 1 जुलाई को बाहर निकाले जाने के तुरंत बाद अस्पताल के डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
कैसे हुई घटना
धनौरा गांव में निर्भय खेलते समय खुले बोरवेल में जा गिरा। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, जिला प्रशासन, भारतीय सेना, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) की टीमें मौके पर पहुँच गईं। युद्धस्तर पर बचाव कार्य शुरू किया गया, जो लगातार 21 घंटों तक जारी रहा।
बचाव में क्या रही चुनौतियाँ
NDRF के असिस्टेंट कमांडेंट अनिल कुमार ने बताया कि इस ऑपरेशन में सबसे बड़ी बाधा यह थी कि बच्चा बोरवेल के भीतर पानी में डूबा हुआ था। इसके अलावा बोरवेल की अत्यधिक गहराई और संकरी दीवारें भी बड़ी चुनौती बनीं। उन्होंने कहा कि बच्चे का शरीर बोरवेल की अंदरूनी दीवार से इस कदर फंसा हुआ था कि उसके हाथ और दीवार के बीच भी कोई जगह नहीं बची थी।
डॉक्टरों की पुष्टि
मेडिकल ऑफिसर डॉ. ऋषिपाल ने बताया कि बच्चे को बाहर निकाले जाने के तुरंत बाद इमरजेंसी विभाग में लाया गया। रेस्क्यू स्थल पर ही उसकी हालत बेहद गंभीर दिखी। अस्पताल में ईसीजी जाँच के बाद पुष्टि हुई कि निर्भय की मृत्यु हो चुकी है। इसके बाद शव को मॉर्चरी में भेज दिया गया।
परिवार की प्रतिक्रिया
मृतक निर्भय के चाचा ने कहा कि प्रशासन ने पूरे ऑपरेशन के दौरान परिवार को हरसंभव सहयोग दिया। उन्होंने गांव वालों, पुलिस, सेना और सभी बचाव दलों का आभार व्यक्त किया जो घंटों तक डटे रहे।
आगे क्या होगा
यह घटना एक बार फिर खुले बोरवेल की खतरनाक स्थिति को सामने लाती है। विशेषज्ञों और बाल सुरक्षा संगठनों की लंबे समय से माँग रही है कि ग्रामीण क्षेत्रों में अनुपयोगी बोरवेल को तत्काल सील किया जाए। अधिकारियों से अपेक्षा है कि वे इस मामले में जवाबदेही सुनिश्चित करें।