30 जून 2026
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अंबाला के धनौरा गांव में 4 साल का निर्भय 220 फीट गहरे बोरवेल में गिरा, सेना-NDRF का बचाव अभियान जारी

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अंबाला के धनौरा गांव में 4 साल का निर्भय 220 फीट गहरे बोरवेल में गिरा, सेना-NDRF का बचाव अभियान जारी

सारांश

हरियाणा के अंबाला जिले के धनौरा गांव में 4 साल का मासूम निर्भय 220 फीट गहरे खुले बोरवेल में गिर गया। सुबह 6:30 बजे हुई इस घटना के बाद सेना, NDRF और पुलिस का संयुक्त बचाव अभियान जारी है। पूरा देश मासूम की सलामती की दुआ कर रहा है।

मुख्य बातें

4 वर्षीय निर्भय 30 जून 2026 को हरियाणा के अंबाला जिले के धनौरा गांव में 220 फीट गहरे बोरवेल में गिरा।
घटना सुबह करीब 6:30 बजे हुई; बोरवेल की चौड़ाई करीब 9 इंच बताई गई है।
भारतीय सेना , NDRF और पुलिस-प्रशासन की संयुक्त टीमें युद्धस्तर पर बचाव में जुटी हैं।
यदि विशेष उपकरणों से सफलता न मिले तो समानांतर बोर खुदवाने की योजना है।
बोरवेल मालिक के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई के निर्देश जारी किए गए हैं।
इससे पहले 16 मई को पंजाब के होशियारपुर में भी इसी तरह का हादसा हुआ था, जिसमें बच्चे को 9 घंटे बाद सकुशल निकाला गया था।

हरियाणा के अंबाला जिले के धनौरा गांव में 30 जून 2026 को एक दर्दनाक हादसे में 4 वर्षीय बच्चा निर्भय खेलते समय 220 फीट गहरे खुले बोरवेल में गिर गया। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस-प्रशासन, भारतीय सेना और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की टीमें युद्धस्तर पर मौके पर पहुंच गईं और बचाव अभियान शुरू कर दिया गया।

हादसा कैसे हुआ

अंबाला के डिप्टी कमिश्नर अजय तोमर ने मीडिया को बताया कि घटना की सूचना सुबह करीब 6:30 बजे मिली। निर्भय अपने पिता को खाना देने आया था, और जब उसके पिता काम में व्यस्त थे, तब बच्चा खेलते-खेलते करीब 9 इंच चौड़े खुले बोरवेल में गिर गया। उन्होंने कहा, 'हमारे अंदाजे के मुताबिक, बच्चा करीब 220 फीट की गहराई में फंसा हुआ है।'

बचाव अभियान की स्थिति

डिप्टी एसपी ने बताया कि NDRF बच्चे को बाहर निकालने के लिए विशेष उपकरणों का उपयोग कर रही है और सेना से भारी उपकरण भी मंगवाए गए हैं। यदि इन प्रयासों से सफलता नहीं मिलती, तो बगल में समानांतर बोर खुदवाने की योजना है। डॉक्टरों की एक टीम भी मौके पर तैनात है, जो परिवार के सदस्यों के स्वास्थ्य की निगरानी कर रही है।

कानूनी कार्रवाई के निर्देश

अधिकारियों ने बताया कि जिस बोरवेल में बच्चा गिरा है, उसके मालिक के विरुद्ध कार्रवाई करने के लिए थाना प्रभारी को निर्देश दे दिए गए हैं। खुले और असुरक्षित बोरवेल बच्चों के लिए लगातार खतरा बने हुए हैं, और यह घटना उस लापरवाही की ओर ध्यान दिलाती है जो ऐसी त्रासदियों को जन्म देती है।

पिछली समान घटनाएँ

गौरतलब है कि इससे पहले 16 मई को पंजाब के होशियारपुर में गुरकरण नाम का एक बच्चा खेलते समय बोरवेल में गिर गया था। उस घटना में NDRF, SDRF, पंजाब पुलिस और प्रशासनिक दल ने करीब नौ घंटे की मशक्कत के बाद रात लगभग 12:40 बजे बच्चे को सकुशल बाहर निकाला था। बच्चे को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया था जहाँ डॉक्टरों की निगरानी में उसका उपचार किया गया था। यह Nवीं ऐसी घटना है जो खुले बोरवेल के नियमन को लेकर सवाल खड़े करती है।

आगे क्या होगा

बचाव दल का पूरा ध्यान निर्भय को जल्द से जल्द और सुरक्षित बाहर निकालने पर केंद्रित है। स्थानीय लोग और पूरे देश के नागरिक मासूम की सलामती के लिए प्रार्थना कर रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, स्थिति पर करीबी नज़र रखी जा रही है और हर संभव संसाधन जुटाए जा रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसके बारे में सर्वोच्च न्यायालय और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग वर्षों से सख्त दिशानिर्देश जारी कर चुके हैं। होशियारपुर से लेकर अंबाला तक, ये हादसे बताते हैं कि बोरवेल नियमन केवल कागज़ पर है — ज़मीन पर नहीं। बच्चे के बचाव के बाद असली सवाल यह होगा कि क्या बोरवेल मालिक के खिलाफ कार्रवाई महज़ खानापूर्ति बनकर रह जाएगी, या राज्य सरकार खुले बोरवेल को बंद कराने का व्यवस्थित अभियान चलाएगी।
RashtraPress
30 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अंबाला बोरवेल हादसे में कौन गिरा और कितनी गहराई में है?
हरियाणा के अंबाला जिले के धनौरा गांव में 4 वर्षीय निर्भय 30 जून 2026 को खेलते समय करीब 9 इंच चौड़े खुले बोरवेल में गिर गया। डिप्टी कमिश्नर अजय तोमर के अनुसार, बच्चा करीब 220 फीट की गहराई में फंसा हुआ है।
निर्भय को बचाने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
भारतीय सेना, NDRF और पुलिस-प्रशासन की संयुक्त टीमें विशेष उपकरणों के साथ बचाव अभियान चला रही हैं। यदि इन प्रयासों से सफलता नहीं मिलती, तो बगल में समानांतर बोर खुदवाने की योजना है। डॉक्टरों की टीम भी मौके पर तैनात है।
बोरवेल मालिक पर क्या कार्रवाई होगी?
अधिकारियों ने थाना प्रभारी को निर्देश दिया है कि जिस बोरवेल में बच्चा गिरा है, उसके मालिक के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाए। खुले और असुरक्षित बोरवेल छोड़ना कानूनी रूप से दंडनीय है।
क्या पहले भी ऐसी घटनाएँ हुई हैं?
हाँ, 16 मई को पंजाब के होशियारपुर में गुरकरण नाम का बच्चा बोरवेल में गिरा था। NDRF, SDRF और पुलिस ने करीब नौ घंटे की कोशिश के बाद रात लगभग 12:40 बजे उसे सकुशल निकाला था और उसे तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया था।
खुले बोरवेल इतने खतरनाक क्यों हैं?
खुले और बिना ढके बोरवेल छोटे बच्चों के लिए जानलेवा जाल बन जाते हैं क्योंकि इनका संकरा व्यास बचाव को अत्यंत कठिन बना देता है। सर्वोच्च न्यायालय और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग इन्हें तत्काल बंद करने के निर्देश दे चुके हैं, लेकिन ज़मीनी अनुपालन अभी भी अपर्याप्त है।
राष्ट्र प्रेस
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