अलवर के बुटोली गांव में 400 फीट गहरे बोरवेल से 9 वर्षीय भानु को 5 घंटे बाद सकुशल बचाया
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान के अलवर जिले के लक्ष्मणगढ़ क्षेत्र स्थित बुटोली गांव में 1 सितंबर 2025 को एक बड़ा हादसा टलते-टलते बचा, जब 9 वर्षीय भानु पुत्र शीशराम 400 फीट गहरे एक पुराने बोरवेल में जा गिरा। एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमों ने करीब पाँच घंटे के अथक बचाव अभियान के बाद रात लगभग 11 बजे बच्चे को सुरक्षित बाहर निकाला। बच्चे के बाहर आते ही पूरे गांव में राहत और खुशी की लहर दौड़ गई।
हादसा कैसे हुआ
सोमवार शाम भानु पतंग लूटने के लिए खेत की तरफ दौड़ रहा था। इसी दौरान उसका पैर एक पुराने बोरवेल के ऊपर रखे पत्थर पर पड़ा और पत्थर खिसकते ही वह सीधे बोरवेल में जा गिरा। बताया जा रहा है कि बोरवेल लगभग 400 फीट गहरा था, जबकि बच्चा 40 से 50 फीट की गहराई पर जाकर फँस गया।
ग्रामीणों ने तत्काल प्रशासन और पुलिस को सूचित किया। शाम करीब 6:30 बजे सूचना मिलते ही प्रशासनिक मशीनरी हरकत में आई और राहत एवं बचाव कार्य शुरू हो गया।
रेस्क्यू ऑपरेशन का घटनाक्रम
मौके पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रियंका रघुवंशी, एसडीएम मनीषा रेशम, तहसीलदार मनीष कुमार शर्मा, डीएसपी नरेंद्र कुमार और थाना प्रभारी राजेश कुमार सहित कई वरिष्ठ अधिकारी पहुँचे। बोरवेल के समानांतर जेसीबी मशीनों से खुदाई शुरू की गई ताकि बच्चे तक पहुँचा जा सके।
पूरे अभियान के दौरान रेस्क्यू टीम लगातार बच्चे तक ऑक्सीजन पहुँचाती रही और उसे पानी भी उपलब्ध कराया गया। बच्चे की स्थिति पर निरंतर निगरानी रखी गई।
सफल रेस्क्यू और बच्चे की स्थिति
करीब पाँच घंटे की कड़ी मेहनत के बाद रात लगभग 11 बजे भानु को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। बच्चे के बाहर आते ही मौजूद लोगों ने तालियाँ बजाकर रेस्क्यू टीम का अभिनंदन किया और परिजनों की आँखों में राहत के आँसू थे।
एएसपी प्रियंका रघुवंशी ने बताया कि भानु पूरी तरह स्वस्थ है और बाहर निकलने के बाद बातचीत भी कर रहा था। एहतियात के तौर पर उसे चिकित्सकीय जाँच के लिए नज़दीकी अस्पताल भेजा गया।
खुले बोरवेल: एक पुरानी समस्या
यह घटना इस बात की याद दिलाती है कि ग्रामीण भारत में बंद या उपेक्षित बोरवेल बच्चों के लिए कितने खतरनाक साबित हो सकते हैं। गौरतलब है कि देशभर में खुले बोरवेल में बच्चों के गिरने की घटनाएँ समय-समय पर सामने आती रहती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अनुपयोगी बोरवेलों को तत्काल सील करना और उनकी नियमित निगरानी अनिवार्य होनी चाहिए।
इस बार प्रशासन की त्वरित प्रतिक्रिया और बचाव दलों की मुस्तैदी ने एक बड़ी त्रासदी को टाल दिया। आगे भी ऐसी दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए ज़िला प्रशासन द्वारा खुले बोरवेलों की पहचान और उन्हें सील करने का अभियान चलाए जाने की उम्मीद है।