29 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

'सतलुज' विवाद पर रवनीत सिंह बिट्टू: आपत्ति धर्म से नहीं, आतंकवाद से है

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
'सतलुज' विवाद पर रवनीत सिंह बिट्टू: आपत्ति धर्म से नहीं, आतंकवाद से है

सारांश

फिल्म 'सतलुज' को लेकर छिड़े विवाद में केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने साफ किया कि उनकी आपत्ति सिख धर्म से नहीं, आतंकवाद से है। दादा बेअंत सिंह की हत्या का जिक्र करते हुए उन्होंने खालरा मामले की निष्पक्ष जांच का समर्थन किया और पीड़ितों की पीड़ा के राजनीतिकरण का विरोध किया।

मुख्य बातें

केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने 13 जुलाई 2026 को कहा कि फिल्म 'सतलुज' पर आपत्ति धर्म के विरुद्ध नहीं, आतंकवाद के विरुद्ध है।
बिट्टू ने फिल्म में उल्लिखित 25,000 कथित लापता शवों के आंकड़े के स्रोत पर सवाल उठाए।
उन्होंने जसवंत सिंह खालरा मामले सहित उस दौर की हिंसा की स्वतंत्र, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच का समर्थन किया।
बिट्टू के दादा, पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह , की 31 अगस्त 1995 को हत्या की गई थी।
उन्होंने परमजीत कौर खालरा से मिलने की इच्छा जताई और पीड़ितों की पीड़ा के राजनीतिकरण का विरोध किया।

केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने 13 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया कि दिलजीत दोसांझ अभिनीत फिल्म 'सतलुज' पर उनकी आपत्ति किसी धर्म के विरुद्ध नहीं, बल्कि आतंकवाद, हिंसा और रक्तपात के विरुद्ध है। उन्होंने कहा कि सिख धर्म 'शांति, साहस, त्याग और मानवता की सेवा' का प्रतीक है और उसे किसी भी रूप में उग्रवाद से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।

सिख समुदाय के योगदान पर जोर

बिट्टू ने न्यायपालिका, सशस्त्र बलों, लोक प्रशासन, व्यापार, खेल, साहित्य और विज्ञान सहित विभिन्न क्षेत्रों में सिख समुदाय के ऐतिहासिक योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्र सेवा और वैश्विक ख्याति प्राप्त करने वाले प्रतिष्ठित सिख व्यक्तित्व सिख धर्म के सच्चे मूल्यों का प्रतिनिधित्व करते हैं।

इसके साथ ही उन्होंने पंजाब में उग्रवाद के दौरान हुई हिंसा का जिक्र करते हुए कहा कि आतंकवाद के कारण हजारों निर्दोष नागरिकों, बस यात्रियों, पुलिसकर्मियों और सरकारी कर्मचारियों की जान गई। उन्होंने जोर देकर कहा कि आतंकवाद को सिख धर्म के समकक्ष नहीं माना जाना चाहिए।

फिल्म 'सतलुज' पर उठाए सवाल

फिल्म के संदर्भ में बिट्टू ने चिंता जताई कि ऐतिहासिक घटनाओं को संतुलित दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया जाना चाहिए। उन्होंने फिल्म में उल्लिखित 25,000 कथित लापता शवों के आंकड़े के स्रोत पर सवाल उठाया और कुछ ऐतिहासिक हस्तियों व घटनाओं के चित्रण पर भी आपत्ति जताई।

उन्होंने मीडिया के समक्ष उन सिख व्यक्तित्वों की तस्वीरें भी प्रस्तुत कीं जिन्हें वे अपने और पूरी दुनिया के लिए आदर्श मानते हैं।

खालरा मामले पर बिट्टू का रुख

मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा की पत्नी परमजीत कौर खालरा द्वारा अपने पति से जुड़े मामलों की जांच के लिए 'जांच आयोग' गठित करने की मांग पर बिट्टू ने कहा कि वे निर्दोष नागरिकों, बस यात्रियों, पुलिसकर्मियों और अन्य लोगों की हत्याओं की स्वतंत्र, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच का समर्थन करते हैं। उन्होंने कहा कि सभी तथ्यों की उचित प्रक्रिया के माध्यम से जांच होनी चाहिए और एक विश्वसनीय संस्थागत तंत्र के जरिए सच्चाई सामने आनी चाहिए।

बिट्टू ने यह भी बताया कि 1992 से 1995 के बीच खालरा ने अपने सभी संवैधानिक अधिकारों का स्वतंत्र रूप से प्रयोग किया और उनके विरुद्ध कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई थी। उन्होंने परमजीत कौर खालरा से मिलने की इच्छा भी जताई।

व्यक्तिगत पीड़ा और राजनीतिकरण का विरोध

बिट्टू ने अपने निजी अनुभव को साझा करते हुए बताया कि उनके दादा, पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह, की 31 अगस्त 1995 को हत्या कर दी गई थी। उन्होंने सितंबर 1995 में खालरा के लापता होने का भी उल्लेख किया और कहा कि उस दौर की हिंसा ने दोनों परिवारों को गहरी पीड़ा दी।

उन्होंने स्पष्ट किया कि पीड़ितों की पीड़ा का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए। यह बयान ऐसे समय में आया है जब फिल्म 'सतलुज' को लेकर विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक हलकों में बहस तेज हो गई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि को देखते हुए स्वाभाविक भी है। लेकिन असली सवाल यह है कि 'सतलुज' जैसी फिल्मों पर आपत्ति और खालरा मामले की जांच की मांग का समर्थन — ये दोनों रुख एक साथ कितने सुसंगत हैं। पंजाब उग्रवाद के उस दौर में राज्य और गैर-राज्य दोनों पक्षों की हिंसा दर्ज है; केवल एक पक्ष की पीड़ा को केंद्र में रखना ऐतिहासिक संतुलन की कसौटी पर खरा नहीं उतरता। फिल्म पर सेंसरशिप की माँग और जांच आयोग के समर्थन के बीच की यह बारीक रेखा ही इस पूरे विवाद का असली राजनीतिक केंद्र है।
RashtraPress
29 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रवनीत सिंह बिट्टू ने फिल्म 'सतलुज' पर क्या कहा?
बिट्टू ने कहा कि उनकी आपत्ति सिख धर्म के विरुद्ध नहीं, बल्कि आतंकवाद, हिंसा और रक्तपात के विरुद्ध है। उन्होंने फिल्म में 25,000 कथित लापता शवों के आंकड़े के स्रोत और कुछ ऐतिहासिक हस्तियों के चित्रण पर भी सवाल उठाए।
फिल्म 'सतलुज' का विवाद क्या है?
दिलजीत दोसांझ अभिनीत फिल्म 'सतलुज' पंजाब उग्रवाद के दौर की ऐतिहासिक घटनाओं पर आधारित कथित तौर पर है। कुछ राजनेताओं और संगठनों ने इसके कुछ दृश्यों और आंकड़ों के चित्रण पर आपत्ति जताई है, जिससे यह विवाद सार्वजनिक बहस का केंद्र बन गया है।
जसवंत सिंह खालरा मामले पर बिट्टू का क्या रुख है?
बिट्टू ने खालरा मामले सहित उस दौर की हिंसा की स्वतंत्र, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि एक विश्वसनीय संस्थागत तंत्र के माध्यम से सच्चाई सामने आनी चाहिए और परमजीत कौर खालरा से मिलने की इच्छा भी जताई।
बेअंत सिंह कौन थे और उनका इस विवाद से क्या संबंध है?
बेअंत सिंह पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री थे और रवनीत सिंह बिट्टू के दादा थे। 31 अगस्त 1995 को उनकी हत्या कर दी गई थी। बिट्टू ने इस व्यक्तिगत पीड़ा का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दौर की हिंसा ने कई परिवारों को तबाह किया और इसका राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए।
क्या बिट्टू ने फिल्म पर प्रतिबंध की मांग की?
स्रोत के अनुसार बिट्टू ने फिल्म के कुछ पहलुओं पर सवाल उठाए और कहा कि ऐतिहासिक घटनाओं को संतुलित तरीके से प्रस्तुत किया जाना चाहिए। उन्होंने फिल्म पर स्पष्ट प्रतिबंध की मांग का उल्लेख नहीं किया।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 8 महीने पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले