'सतलुज' विवाद: विरोध करने वाले वकील विनीत जिंदल को जान से मारने की धमकी, दिल्ली पुलिस में शिकायत
सारांश
मुख्य बातें
दिलजीत दोसांझ अभिनीत फिल्म 'सतलुज' को लेकर विवाद नए मोड़ पर पहुँच गया है। सर्वोच्च न्यायालय के वकील विनीत जिंदल ने 9 जुलाई 2026 को बताया कि फिल्म का विरोध करने और केंद्रीय गृह मंत्रालय में शिकायत दर्ज कराने के बाद उन्हें तथा उनके परिवार को व्हाट्सएप मैसेज और फोन कॉल के ज़रिए जान से मारने की धमकियाँ मिली हैं। उन्होंने सबूतों के साथ दिल्ली पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है और सुरक्षा की माँग की है।
धमकी की प्रकृति और शिकायत
जिंदल के अनुसार, धमकी देने वालों ने कहा कि उनके और उनके परिवार के साथ वही किया जाएगा जो पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के साथ हुआ था। यह धमकी उस शिकायत के बाद मिली जिसमें उन्होंने फिल्म 'सतलुज', अभिनेता दिलजीत दोसांझ, फिल्म के निर्देशक और ओटीटी प्लेटफॉर्म ज़ी5 के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की माँग की थी।
जिंदल का आरोप है कि फिल्म में कथित तौर पर खालिस्तान समर्थक विचारधारा के प्रति सहानुभूति दिखाई गई है और 1980-90 के दशक के पंजाब उग्रवाद से जुड़ी घटनाओं को एकतरफा नज़रिए से पेश किया गया है। उनके अनुसार फिल्म अलगाववादी सोच को बढ़ावा देने की कोशिश करती है।
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में जनहित याचिका
इस बीच पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में भी एक जनहित याचिका दायर की गई है। मोहाली के जीरकपुर निवासी सरवन सिंह ने यह याचिका दाखिल की है, जो स्वयं को मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा का प्रशंसक और ज़ी5 का सब्सक्राइबर बताते हैं।
याचिका में कहा गया है कि फिल्म को 3 जुलाई 2026 को ज़ी5 पर रिलीज़ किया गया, लेकिन मात्र दो दिन बाद 5 जुलाई 2026 को बिना किसी सार्वजनिक आदेश, न्यायालय के निर्देश या स्पष्ट सरकारी आदेश के प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील हाकम सिंह ने कहा कि यह संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सीधा सवाल है।
सरकार की स्थिति और तीन सदस्यीय समिति
याचिका में केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC), पंजाब सरकार और ज़ी एंटरटेनमेंट को पक्षकार बनाया गया है। वकील हाकम सिंह ने बताया कि केंद्र सरकार ने इस मामले में एक तीन सदस्यीय समिति गठित की है, लेकिन अब तक यह स्पष्ट नहीं किया गया कि फिल्म को रोकने के पीछे वास्तविक कारण क्या था।
ज़ी5 ने अपने बयान में कहा कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए फिल्म को फिलहाल हटाया गया है और इसे दोबारा उपलब्ध कराने के विकल्पों पर काम किया जा रहा है।
फिल्म 'सतलुज' की पृष्ठभूमि
फिल्म 'सतलुज' मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित है। पहले इसका नाम 'पंजाब 95' रखा गया था और यह लंबे समय तक सेंसर बोर्ड से जुड़े विवादों में फँसी रही। निर्माताओं के अनुसार, CBFC ने बड़ी संख्या में कट और बदलाव की माँग की थी, जिन्हें स्वीकार करना संभव नहीं था। नाम बदलकर 'सतलुज' करने के बाद फिल्म 3 जुलाई 2026 को ज़ी5 पर रिलीज़ हुई, लेकिन केवल दो दिन बाद ही हटा ली गई।
आगे क्या होगा
पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में याचिका पर जल्द सुनवाई की उम्मीद है। दिल्ली पुलिस द्वारा धमकी के मामले में जाँच की स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। यह मामला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, राष्ट्रीय सुरक्षा और ओटीटी विनियमन — तीनों मोर्चों पर एक साथ कानूनी और राजनीतिक बहस को जन्म दे रहा है।