9 जुलाई 2026
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'सतलुज' विवाद: विरोध करने वाले वकील विनीत जिंदल को जान से मारने की धमकी, दिल्ली पुलिस में शिकायत

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'सतलुज' विवाद: विरोध करने वाले वकील विनीत जिंदल को जान से मारने की धमकी, दिल्ली पुलिस में शिकायत

सारांश

फिल्म 'सतलुज' का विरोध करने वाले वकील विनीत जिंदल को परिवार सहित जान से मारने की धमकी मिली है — बेअंत सिंह हत्याकांड का हवाला देकर। साथ ही पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में PIL दाखिल, जिसमें फिल्म को ज़ी5 से बिना आदेश हटाने को अनुच्छेद 19 का उल्लंघन बताया गया।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय के वकील विनीत जिंदल को फिल्म 'सतलुज' का विरोध करने के बाद व्हाट्सएप और फोन पर जान से मारने की धमकियाँ मिलीं।
धमकी में पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या का संदर्भ दिया गया; जिंदल ने सबूतों सहित दिल्ली पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
फिल्म 3 जुलाई 2026 को ज़ी5 पर रिलीज़ हुई और 5 जुलाई 2026 को बिना किसी सार्वजनिक आदेश के हटा दी गई।
पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर; संविधान अनुच्छेद 19 के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हवाला।
केंद्र सरकार ने तीन सदस्यीय समिति गठित की, लेकिन फिल्म हटाने का आधिकारिक कारण अब तक सार्वजनिक नहीं।
फिल्म पहले 'पंजाब 95' नाम से थी; CBFC से लंबे विवाद के बाद नाम बदलकर रिलीज़ हुई थी।

दिलजीत दोसांझ अभिनीत फिल्म 'सतलुज' को लेकर विवाद नए मोड़ पर पहुँच गया है। सर्वोच्च न्यायालय के वकील विनीत जिंदल ने 9 जुलाई 2026 को बताया कि फिल्म का विरोध करने और केंद्रीय गृह मंत्रालय में शिकायत दर्ज कराने के बाद उन्हें तथा उनके परिवार को व्हाट्सएप मैसेज और फोन कॉल के ज़रिए जान से मारने की धमकियाँ मिली हैं। उन्होंने सबूतों के साथ दिल्ली पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है और सुरक्षा की माँग की है।

धमकी की प्रकृति और शिकायत

जिंदल के अनुसार, धमकी देने वालों ने कहा कि उनके और उनके परिवार के साथ वही किया जाएगा जो पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के साथ हुआ था। यह धमकी उस शिकायत के बाद मिली जिसमें उन्होंने फिल्म 'सतलुज', अभिनेता दिलजीत दोसांझ, फिल्म के निर्देशक और ओटीटी प्लेटफॉर्म ज़ी5 के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की माँग की थी।

जिंदल का आरोप है कि फिल्म में कथित तौर पर खालिस्तान समर्थक विचारधारा के प्रति सहानुभूति दिखाई गई है और 1980-90 के दशक के पंजाब उग्रवाद से जुड़ी घटनाओं को एकतरफा नज़रिए से पेश किया गया है। उनके अनुसार फिल्म अलगाववादी सोच को बढ़ावा देने की कोशिश करती है।

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में जनहित याचिका

इस बीच पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में भी एक जनहित याचिका दायर की गई है। मोहाली के जीरकपुर निवासी सरवन सिंह ने यह याचिका दाखिल की है, जो स्वयं को मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा का प्रशंसक और ज़ी5 का सब्सक्राइबर बताते हैं।

याचिका में कहा गया है कि फिल्म को 3 जुलाई 2026 को ज़ी5 पर रिलीज़ किया गया, लेकिन मात्र दो दिन बाद 5 जुलाई 2026 को बिना किसी सार्वजनिक आदेश, न्यायालय के निर्देश या स्पष्ट सरकारी आदेश के प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील हाकम सिंह ने कहा कि यह संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सीधा सवाल है।

सरकार की स्थिति और तीन सदस्यीय समिति

याचिका में केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC), पंजाब सरकार और ज़ी एंटरटेनमेंट को पक्षकार बनाया गया है। वकील हाकम सिंह ने बताया कि केंद्र सरकार ने इस मामले में एक तीन सदस्यीय समिति गठित की है, लेकिन अब तक यह स्पष्ट नहीं किया गया कि फिल्म को रोकने के पीछे वास्तविक कारण क्या था।

ज़ी5 ने अपने बयान में कहा कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए फिल्म को फिलहाल हटाया गया है और इसे दोबारा उपलब्ध कराने के विकल्पों पर काम किया जा रहा है।

फिल्म 'सतलुज' की पृष्ठभूमि

फिल्म 'सतलुज' मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित है। पहले इसका नाम 'पंजाब 95' रखा गया था और यह लंबे समय तक सेंसर बोर्ड से जुड़े विवादों में फँसी रही। निर्माताओं के अनुसार, CBFC ने बड़ी संख्या में कट और बदलाव की माँग की थी, जिन्हें स्वीकार करना संभव नहीं था। नाम बदलकर 'सतलुज' करने के बाद फिल्म 3 जुलाई 2026 को ज़ी5 पर रिलीज़ हुई, लेकिन केवल दो दिन बाद ही हटा ली गई।

आगे क्या होगा

पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में याचिका पर जल्द सुनवाई की उम्मीद है। दिल्ली पुलिस द्वारा धमकी के मामले में जाँच की स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। यह मामला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, राष्ट्रीय सुरक्षा और ओटीटी विनियमन — तीनों मोर्चों पर एक साथ कानूनी और राजनीतिक बहस को जन्म दे रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

विरोध करने वाले वकील को बेअंत सिंह हत्याकांड का संदर्भ देकर धमकाना दर्शाता है कि पंजाब के इतिहास से जुड़े आख्यान अभी भी कितने संवेदनशील और विस्फोटक बने हुए हैं। मुख्यधारा की बहस जहाँ खालिस्तान-समर्थक बनाम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के इर्द-गिर्द सिमट रही है, वहीं असली सवाल यह है कि क्या भारत में किसी फिल्म को बिना न्यायिक या विधायी आदेश के हटाने का कोई कानूनी आधार है।
RashtraPress
9 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

फिल्म 'सतलुज' को लेकर विनीत जिंदल को धमकी क्यों मिली?
सर्वोच्च न्यायालय के वकील विनीत जिंदल ने फिल्म 'सतलुज' के खिलाफ केंद्रीय गृह मंत्रालय में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें उन्होंने फिल्म पर खालिस्तान समर्थक विचारधारा को बढ़ावा देने का आरोप लगाया था। इसके बाद उन्हें व्हाट्सएप और फोन पर जान से मारने की धमकियाँ मिलीं, जिनमें पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह हत्याकांड का संदर्भ दिया गया।
फिल्म 'सतलुज' को ज़ी5 से क्यों हटाया गया?
फिल्म 3 जुलाई 2026 को ज़ी5 पर रिलीज़ हुई और 5 जुलाई 2026 को हटा दी गई। ज़ी5 ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए यह निर्णय लिया गया, लेकिन कोई सार्वजनिक आदेश, अदालती निर्देश या स्पष्ट सरकारी कारण सामने नहीं आया। केंद्र सरकार ने एक तीन सदस्यीय समिति गठित की है, पर आधिकारिक कारण अब तक सार्वजनिक नहीं किया गया।
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका में क्या माँग है?
जीरकपुर निवासी सरवन सिंह द्वारा दायर याचिका में माँग की गई है कि फिल्म को दोबारा ज़ी5 पर उपलब्ध कराया जाए। याचिका में संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हवाला देते हुए कहा गया है कि बिना किसी सार्वजनिक नोटिस या न्यायिक आदेश के फिल्म हटाना नागरिक अधिकारों का उल्लंघन है।
फिल्म 'सतलुज' किस पर आधारित है और पहले इसका क्या नाम था?
फिल्म मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित है। पहले इसका नाम 'पंजाब 95' था। CBFC के साथ लंबे विवाद के बाद — जिसमें बड़ी संख्या में कट और बदलाव की माँग की गई थी — नाम बदलकर 'सतलुज' रखा गया और 3 जुलाई 2026 को ज़ी5 पर रिलीज़ किया गया।
इस विवाद में कौन-कौन सी सरकारी संस्थाएँ शामिल हैं?
पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में दायर याचिका में केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC), पंजाब सरकार और ज़ी एंटरटेनमेंट को पक्षकार बनाया गया है। इसके अलावा दिल्ली पुलिस में धमकी की शिकायत दर्ज है और केंद्र सरकार ने एक तीन सदस्यीय जाँच समिति भी गठित की है।
राष्ट्र प्रेस
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