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'सतलुज' (पंजाब 95) OTT पर रिलीज़: SGPC ने युवाओं से जसवंत सिंह खालड़ा की कहानी देखने की अपील की

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'सतलुज' (पंजाब 95) OTT पर रिलीज़: SGPC ने युवाओं से जसवंत सिंह खालड़ा की कहानी देखने की अपील की

सारांश

दिलजीत दोसांझ की विवादित फिल्म 'पंजाब 95' आखिरकार 'सतलुज' नाम से OTT पर आ गई है। SGPC ने युवाओं से अपील की है कि वे 1990 के दशक के पंजाब और मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के संघर्ष को समझने के लिए यह फिल्म ज़रूर देखें।

मुख्य बातें

दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'पंजाब 95' अब 'सतलुज' नाम से OTT प्लेटफॉर्म पर रिलीज़ हो चुकी है।
SGPC के मुख्य सचिव कुलवंत सिंह मन्नन ने युवाओं से फिल्म देखने की अपील की।
फिल्म सिख मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन और 1990 के दशक के पंजाब पर आधारित है।
फिल्म 2022 में सेंसर बोर्ड के पास भेजी गई थी; नाम परिवर्तन और कट्स के विवाद के बाद रिलीज़ हुई।
स्टारकास्ट में अर्जुन रामपाल , सुविंदर विक्की , जगजीत संधू और गीतिका विद्या ओहल्यान शामिल हैं।

दिलजीत दोसांझ अभिनीत बहुचर्चित फिल्म 'पंजाब 95' अब 'सतलुज' नाम से OTT प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हो चुकी है। फिल्म की रिलीज़ के साथ ही शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) ने आम लोगों — विशेषकर युवाओं — से इसे देखने की अपील की है। यह फिल्म सिख मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन, उनके अदम्य संघर्ष और 1990 के दशक के पंजाब की विकट परिस्थितियों पर आधारित है।

SGPC की अपील: इतिहास को समझना ज़रूरी

SGPC के मुख्य सचिव कुलवंत सिंह मन्नन ने 5 जुलाई को अमृतसर में कहा, 'फिल्म को 2022 में सेंसर बोर्ड के पास भेजा गया था और इसमें दिलजीत दोसांझ ने जसवंत सिंह खालड़ा की भूमिका निभाई है। यह फिल्म उस समय के पंजाब की परिस्थितियों को दिखाने का प्रयास करती है, जब राज्य एक कठिन दौर से गुजर रहा था।'

मन्नन ने आगे कहा कि खालड़ा ने कथित फर्जी पुलिस मुठभेड़ों और लापता लोगों के मामलों को उजागर करने के लिए लंबा संघर्ष किया था, और यह फिल्म उसी संघर्ष को पर्दे पर लाने का प्रयास है।

खालड़ा का संघर्ष: मानवाधिकारों की आवाज़

मन्नन के अनुसार, उस दौर में कई ऐसे मामले सामने आए थे जिनमें लोगों को कथित तौर पर बिना कानूनी प्रक्रिया के गायब कर दिया जाता था या संदिग्ध परिस्थितियों में उनकी मौत हो जाती थी। उन्होंने कहा, 'जसवंत सिंह खालड़ा ने इन घटनाओं के खिलाफ आवाज़ उठाई और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।'

यह ऐसे समय में आया है जब पंजाब के उस दौर की ऐतिहासिक स्मृतियाँ एक बार फिर सार्वजनिक विमर्श में लौट रही हैं। गौरतलब है कि खालड़ा को स्वयं 1995 में कथित तौर पर अगवा कर लिया गया था और बाद में उनकी हत्या हुई — एक मामला जो भारत के मानवाधिकार इतिहास में दर्ज है।

सेंसर बोर्ड विवाद और नाम परिवर्तन

फिल्म लंबे समय तक केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) की आपत्तियों और कट्स को लेकर विवादों में रही। पहले इसका नाम 'पंजाब 95' था, जिसे बाद में बदलकर 'सतलुज' किया गया। इस प्रक्रिया में फिल्म की रिलीज़ कई बार टलती रही।

मन्नन ने सेंसर बोर्ड द्वारा सुझाए गए बदलावों पर कहा, 'यदि फिल्म में किसी स्तर पर आवश्यक सुधार किए गए हैं, तो उनका स्वागत किया जाना चाहिए। समाज और इतिहास से जुड़े विषयों पर आधारित फिल्मों को खुले मन से देखना चाहिए, क्योंकि ये फिल्में केवल कहानी नहीं होतीं, बल्कि अतीत की सच्चाइयों को सामने लाने का प्रयास होती हैं।'

फिल्म की स्टारकास्ट

फिल्म में दिलजीत दोसांझ के साथ अर्जुन रामपाल, सुविंदर विक्की, जगजीत संधू और गीतिका विद्या ओहल्यान अहम भूमिकाओं में हैं।

नई पीढ़ी के लिए संदेश

SGPC के मुख्य सचिव ने युवाओं से सीधी अपील करते हुए कहा, 'यह फिल्म नई पीढ़ी के लिए एक महत्वपूर्ण माध्यम हो सकती है, जिससे वे पंजाब के इतिहास और उस दौर की वास्तविक परिस्थितियों को समझ सकें।' उनके अनुसार, अपने इतिहास से जुड़े रहना हर पीढ़ी की जिम्मेदारी है — और 'सतलुज' उस दिशा में एक कदम है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि ऐतिहासिक विमर्श को भी आकार देती है। असली सवाल यह है कि क्या सिनेमा वह काम कर पाएगा जो दशकों की आधिकारिक चुप्पी नहीं कर पाई — यानी जसवंत सिंह खालड़ा जैसे लोगों की कहानी को न्याय दिलाना।
RashtraPress
5 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'सतलुज' (पंजाब 95) फिल्म किस पर आधारित है?
यह फिल्म सिख मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन और संघर्ष पर आधारित है, जिन्होंने 1990 के दशक में पंजाब में कथित फर्जी पुलिस मुठभेड़ों और लापता लोगों के मामलों को उजागर किया था। फिल्म में दिलजीत दोसांझ ने खालड़ा की भूमिका निभाई है।
फिल्म का नाम 'पंजाब 95' से 'सतलुज' क्यों बदला गया?
फिल्म केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) की आपत्तियों और कट्स को लेकर लंबे विवाद में रही, जिसके चलते इसका नाम 'पंजाब 95' से बदलकर 'सतलुज' किया गया। फिल्म 2022 में सेंसर बोर्ड के पास भेजी गई थी और रिलीज़ कई बार टलती रही।
SGPC ने फिल्म देखने की अपील क्यों की?
SGPC के मुख्य सचिव कुलवंत सिंह मन्नन के अनुसार, यह फिल्म नई पीढ़ी को पंजाब के इतिहास और उस दौर की वास्तविक परिस्थितियों से अवगत कराने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। उनका मानना है कि युवाओं को अपने समाज और इतिहास से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी होनी चाहिए।
जसवंत सिंह खालड़ा कौन थे?
जसवंत सिंह खालड़ा एक प्रमुख सिख मानवाधिकार कार्यकर्ता थे, जिन्होंने 1990 के दशक में पंजाब में कथित फर्जी पुलिस मुठभेड़ों और लापता व्यक्तियों के मामलों को उजागर किया। उन्हें कथित तौर पर 1995 में अगवा किया गया था और बाद में उनकी हत्या हुई — यह मामला भारत के मानवाधिकार इतिहास में दर्ज है।
'सतलुज' फिल्म में कौन-कौन से कलाकार हैं?
फिल्म में दिलजीत दोसांझ मुख्य भूमिका में हैं और उनके साथ अर्जुन रामपाल, सुविंदर विक्की, जगजीत संधू और गीतिका विद्या ओहल्यान अहम किरदारों में हैं।
राष्ट्र प्रेस
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