8 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

दिलजीत की 'सतलुज' पर बैन: सिख नेता बोले — 'कश्मीर फाइल्स चल सकती है तो सतलुज क्यों नहीं?'

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
दिलजीत की 'सतलुज' पर बैन: सिख नेता बोले — 'कश्मीर फाइल्स चल सकती है तो सतलुज क्यों नहीं?'

सारांश

दिलजीत दोसांझ की 'सतलुज' OTT पर आते ही 48 घंटे में हटा दी गई। शिरोमणि अकाली दल ने स्पेशल स्क्रीनिंग कर विरोध दर्ज किया और 'कश्मीर फाइल्स' से तुलना करते हुए पूछा — सिखों के इतिहास पर बनी फिल्म को क्यों दबाया जा रहा है?

मुख्य बातें

दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'सतलुज' को OTT प्लेटफॉर्म पर रिलीज़ के 48 घंटों के भीतर हटा दिया गया।
शिरोमणि अकाली दल (दिल्ली इकाई) ने 8 जुलाई को स्पेशल स्क्रीनिंग आयोजित कर विरोध जताया।
दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष परमजीत सिंह सरना ने फिल्म समीक्षा समिति में सिख सदस्य न होने पर सवाल उठाए।
वरिष्ठ नेता मंजीत सिंह जी.के.
ने 'कश्मीर फाइल्स' और 'केरला स्टोरी' से तुलना करते हुए बैन को 'सिख इतिहास दबाने की कोशिश' बताया।
अकाली दल ने फिल्म को घर-घर और गुरुद्वारों तक पहुँचाने का संकल्प लिया।

पंजाबी सुपरस्टार दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'सतलुज' उस वक्त विवाद के केंद्र में आ गई जब इसे ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज़ के महज 48 घंटों के भीतर हटा दिया गया। इस फैसले के विरोध में शिरोमणि अकाली दल (दिल्ली इकाई) ने 8 जुलाई, बुधवार को फिल्म की स्पेशल स्क्रीनिंग आयोजित की, जिसमें बड़ी संख्या में दर्शक शामिल हुए।

क्या है पूरा विवाद

सिख समुदाय से जुड़े ऐतिहासिक विषयों पर आधारित इस फिल्म को ओटीटी पर आने के दो दिन के भीतर ही हटा लिया गया। अकाली नेताओं का आरोप है कि सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों की 'गलत सलाह' पर यह निर्णय लिया गया। उनके अनुसार, फिल्म की समीक्षा के लिए बनाई गई पाँच सदस्यीय समिति में कोई सिख प्रतिनिधि नहीं था और महज तीन दिन की समीक्षा के बाद बैन लागू कर दिया गया।

सिख नेताओं की तीखी प्रतिक्रिया

शिरोमणि अकाली दल दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष परमजीत सिंह सरना ने कहा, 'सिखों पर जो जुल्म हुए, उन पर एक फिल्म बनाई गई। पिछले 30 साल में ऐसी कोई फिल्म नहीं बनी। यह लोकतांत्रिक देश है, लोगों को यह जानना चाहिए कि सिखों पर किसने जुल्म किया। सरकार को खुद यह काम करना चाहिए था ताकि लोगों को सच्चाई पता चले।'

सरना ने समिति की संरचना पर सवाल उठाते हुए कहा, 'जिस कमेटी में सिख सदस्य ही नहीं हैं, उस कमेटी का क्या फायदा?' उन्होंने दृढ़ता से कहा कि जो सिख जिंदा रहेगा, वह यह फिल्म ज़रूर देखेगा।

वरिष्ठ अकाली नेता मंजीत सिंह जी.के. ने 'कश्मीर फाइल्स' और 'केरला स्टोरी' का उदाहरण देते हुए तीखा सवाल किया, 'कश्मीर फाइल्स और केरला स्टोरी जैसी फिल्में चल सकती हैं तो सतलुज क्यों नहीं चल सकती? यह साफ तौर पर सिखों के इतिहास को दबाने की कोशिश है।'

घर-घर फिल्म दिखाने का संकल्प

मंजीत सिंह जी.के. ने चेतावनी दी कि अगर गुरुद्वारों से फिल्म दिखाने की माँग आई, तो वे वहाँ भी स्क्रीनिंग करेंगे। अकाली दल के नेताओं ने फिल्म को 'घर-घर' पहुँचाने का संकल्प लिया है और कहा है कि जहाँ से भी माँग आएगी, वहाँ स्क्रीनिंग की जाएगी।

व्यापक संदर्भ और आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब सिख समुदाय से जुड़े ऐतिहासिक मुद्दे राजनीतिक रूप से संवेदनशील बने हुए हैं। गौरतलब है कि फिल्म को सालों की देरी के बाद रिलीज़ की अनुमति मिली थी। आलोचकों का कहना है कि बिना पारदर्शी प्रक्रिया के लगाया गया यह बैन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सवाल खड़े करता है। अब देखना यह होगा कि सरकार इस बढ़ते दबाव पर क्या रुख अपनाती है और क्या फिल्म को दोबारा प्लेटफॉर्म पर जगह मिलती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह उस पुरानी बहस को फिर से हवा देता है कि भारत में किन समुदायों की पीड़ा को सिनेमाई आवाज़ मिलती है और किसकी दबाई जाती है। 'कश्मीर फाइल्स' और 'केरला स्टोरी' को जब राज्य-समर्थित प्रचार का आरोप झेलते हुए भी रिलीज़ की अनुमति मिली, तो सिख इतिहास पर बनी फिल्म को बिना पारदर्शी प्रक्रिया के हटाना चयनात्मक सेंसरशिप का संकेत देता है। समीक्षा समिति में सिख प्रतिनिधित्व न होने का सवाल प्रक्रियागत निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। जब तक सरकार बैन का ठोस और पारदर्शी कारण नहीं देती, यह विवाद राजनीतिक रूप से और गहरा होता जाएगा।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'सतलुज' को OTT से क्यों हटाया गया?
फिल्म 'सतलुज' को OTT प्लेटफॉर्म पर रिलीज़ के 48 घंटों के भीतर हटा दिया गया। अकाली नेताओं का आरोप है कि सरकारी अधिकारियों की सलाह पर बनी पाँच सदस्यीय समिति ने महज तीन दिन की समीक्षा के बाद यह निर्णय लिया, और उस समिति में कोई सिख सदस्य नहीं था।
शिरोमणि अकाली दल ने 'सतलुज' बैन के विरोध में क्या किया?
शिरोमणि अकाली दल (दिल्ली इकाई) ने 8 जुलाई को फिल्म की स्पेशल स्क्रीनिंग आयोजित की, जिसमें बड़ी संख्या में दर्शक शामिल हुए। नेताओं ने फिल्म को घर-घर और गुरुद्वारों तक पहुँचाने का संकल्प लिया है।
सिख नेताओं ने 'कश्मीर फाइल्स' और 'केरला स्टोरी' से तुलना क्यों की?
वरिष्ठ अकाली नेता मंजीत सिंह जी.के. ने सवाल उठाया कि जब 'कश्मीर फाइल्स' और 'केरला स्टोरी' जैसी विवादास्पद फिल्में सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित हो सकती हैं, तो सिख इतिहास पर आधारित 'सतलुज' को क्यों रोका जा रहा है। उनके अनुसार यह सिखों के इतिहास को दबाने की कोशिश है।
'सतलुज' फिल्म किस विषय पर आधारित है?
कथित तौर पर यह फिल्म सिख समुदाय पर हुए ऐतिहासिक अत्याचारों को केंद्र में रखती है। परमजीत सिंह सरना के अनुसार, पिछले 30 वर्षों में इस विषय पर कोई फिल्म नहीं बनी थी और इसे सालों की देरी के बाद रिलीज़ की अनुमति मिली थी।
क्या 'सतलुज' फिल्म दोबारा OTT पर आ सकती है?
अभी तक सरकार या OTT प्लेटफॉर्म की ओर से फिल्म की वापसी को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। अकाली दल के नेताओं ने स्पष्ट किया है कि वे स्क्रीनिंग जारी रखेंगे और माँग करेंगे कि फिल्म को दोबारा उपलब्ध कराया जाए।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 घंटे पहले
  2. 5 घंटे पहले
  3. 20 घंटे पहले
  4. 20 घंटे पहले
  5. कल
  6. 3 दिन पहले
  7. 12 महीने पहले
  8. 1 साल पहले