फिल्म 'सतलुज' पर OTT बैन गलत: कांग्रेस विधायक परगट सिंह का BJP और AAP पर हमला
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस विधायक परगट सिंह ने 8 जुलाई 2025 को पंजाबी फिल्म 'सतलुज' को ओटीटी प्लेटफॉर्म से हटाए जाने की कड़ी निंदा की और कहा कि वास्तविक घटनाओं पर आधारित फिल्म पर रोक लगाना लोकतंत्र और समाज दोनों के लिए हानिकारक है। उन्होंने इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और आम आदमी पार्टी (AAP) को भी आड़े हाथों लिया।
परगट सिंह का बयान: 'सच्ची कहानी दिखाई जानी चाहिए'
परगट सिंह ने कहा, 'जो फिल्में रियल स्टोरी पर आधारित होती हैं, उनसे बहुत ज़्यादा समझ भी आती है और कहीं न कहीं जो पावर का मिसयूज होता है, उसके बारे में भी आज के लोगों को पता चलता है, तो मेरा ख़याल है, यह फिल्म दिखाई जानी चाहिए।' उन्होंने स्पष्ट किया कि वे इस प्रतिबंध की पूरी तरह निंदा करते हैं।
BJP पर प्रोपेगेंडा फिल्मों का आरोप
परगट सिंह ने आरोप लगाया कि BJP अपनी प्रचार-आधारित फिल्में बनाती है और उन्हें कई बार टैक्स फ्री कर दिया जाता है। उनका कहना था कि ऐसी फिल्मों के ज़रिये यह दिखाने की कोशिश होती है कि सत्तारूढ़ दल ने देश के लिए बड़े काम किए, जबकि वास्तविकता इससे अलग है। उन्होंने कहा कि सच्ची घटनाओं पर बनी फिल्म को दबाना और प्रचार-फिल्मों को बढ़ावा देना — दोनों एक साथ नहीं चल सकते।
AAP पर भी निशाना, पंजाब के बड़े मुद्दों की दुहाई
परगट सिंह ने AAP को BJP की 'बी-टीम' करार देते हुए कहा, 'पंजाब के जो मुद्दे हैं, वे बड़े हैं। पंजाब में एक्सपेरिमेंट किया नहीं जा सकता। भाजपा और उसकी बी-टीम आम आदमी पार्टी, पंजाब को बहुत नकारात्मक दिशा में ले जा रही है। हमें इन बड़े मुद्दों से लड़ने की जरूरत है।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि कांग्रेस के भीतर यदि कोई आंतरिक मतभेद हैं, तो उन्हें जल्द सुलझा लिया जाएगा।
फिल्म 'सतलुज' का विवादित सफर
गौरतलब है कि दिलजीत दोसांझ अभिनीत यह फिल्म लंबे समय से विवादों में रही है। पहले इसका नाम 'पंजाब 95' था, जिसे बाद में बदलकर 'सतलुज' किया गया। फिल्म को सेंसर बोर्ड की आपत्तियों और कट्स को लेकर कई बार अपनी रिलीज़ की तारीख टालनी पड़ी। फिल्म में दिलजीत दोसांझ के अलावा अर्जन रामपाल, सविंदर विक्की, जगजीत संधू और गीतिका विद्या ओहल्यान प्रमुख भूमिकाओं में हैं। हाल ही में इसे ओटीटी प्लेटफॉर्म से हटा लिया गया, जिसके बाद विरोध की आवाज़ें तेज़ हो गई हैं।
आगे क्या होगा
कांग्रेस के इस विरोध के बाद फिल्म की OTT वापसी को लेकर राजनीतिक दबाव बढ़ सकता है। यह देखना होगा कि सेंसर बोर्ड और संबंधित ओटीटी प्लेटफॉर्म इस मामले में आगे क्या रुख अपनाते हैं।