परगट सिंह का आरोप: AAP सरकार आलोचना दबाने में BJP की राह पर, अकाल तख्त के फैसले का स्वागत
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस विधायक परगट सिंह ने 30 जून 2026 को होशियारपुर में कहा कि अकाल तख्त द्वारा पंजाब सरकार को बेअदबी कानून में संशोधन के लिए दिया गया एक महीने का समय उचित और स्वागत योग्य कदम है। उन्होंने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार जनता की वाजिब चिंताओं को सुनने के बजाय आलोचना को दबाने का रास्ता अपना रही है।
अकाल तख्त का फैसला और AAP का वादा
परगट सिंह ने बताया कि AAP विधायकों ने अकाल तख्त को आश्वासन दिया था कि निर्धारित समय-सीमा के भीतर कानून में आवश्यक बदलाव कर दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि अकाल तख्त के जत्थेदार का संदेश स्पष्ट है — सरकार से कोई टकराव नहीं चाहिए, केवल उस आपत्तिजनक शब्द में संशोधन की माँग है, इससे अधिक कुछ नहीं।
उन्होंने जत्थेदार के हवाले से कहा कि यदि पंजाब सरकार भाईचारे, विकास और गुरुओं की धरती की बेहतरी के लिए काम करे, तो सिख संगत उसके लिए अरदास करेगी।
मीडिया पर रोक और तानाशाही का आरोप
परगट सिंह ने AAP सरकार पर अकाल तख्त की कार्यवाही की लाइव कवरेज पर रोक लगाने का भी आरोप लगाया। उनके अनुसार यह मीडिया को नियंत्रित करने की कोशिश है और यह रवैया लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध है। उन्होंने कहा, 'यह तानाशाही है और यह पंजाब में नहीं चलती। पंजाब सच बोलने से कभी नहीं डरा।'
उन्होंने यह भी कहा कि जिन लोगों की जमीर मरी हुई है और जो बोलने से कतरा रहे हैं, वे अपनी जिम्मेदारी से मुँह मोड़ रहे हैं।
भाजपा सांसद की प्रतिक्रिया
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने भी इस मुद्दे पर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि एक महीने के भीतर बेअदबी कानून को इस प्रकार तर्कसंगत बनाया जाना चाहिए जिससे सिख समुदाय की भावनाएँ आहत न हों। उन्होंने उम्मीद जताई कि मुख्यमंत्री भगवंत मान और उनकी पार्टी इस विषय पर राजनीति से परहेज करेंगे और अकाल तख्त की मंशा के अनुरूप कदम उठाएंगे।
आगे क्या होगा
अकाल तख्त द्वारा दी गई एक महीने की समय-सीमा में पंजाब सरकार के कदम यह तय करेंगे कि यह विवाद सुलझता है या और गहराता है। राजनीतिक दलों की तीखी प्रतिक्रियाओं के बीच सरकार पर दबाव है कि वह संशोधन को लेकर ठोस कार्रवाई करे।