अकाल तख्त की मर्यादा को चुनौती देने पर SAD का भगवंत मान पर हमला, तत्काल इस्तीफे की मांग
सारांश
मुख्य बातें
शिरोमणि अकाली दल (SAD) की कार्यकारिणी समिति ने 19 जून 2026 को चंडीगढ़ में हुई बैठक में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान पर सार्वजनिक मंचों से अकाल तख्त के अधिकार को चुनौती देने का गंभीर आरोप लगाया और उनके तत्काल इस्तीफे की मांग करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया। पार्टी का कहना है कि मान के इस आचरण से सिख समुदाय की धार्मिक भावनाएं गहरी आहत हुई हैं।
मुख्य घटनाक्रम
पार्टी अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में कार्यकारिणी समिति ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री मान जानबूझकर सिख समुदाय के भीतर विभाजन पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। समिति के अनुसार, समुदाय में यह व्यापक भावना है कि मान ने गुरु साहिबान के प्रति गंभीर अपराध किया है और अब अकाल तख्त द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों को चुनौती देकर अपनी गलती को और बढ़ा रहे हैं।
विवादित वीडियो विवाद
बैठक में इस बात पर विशेष चर्चा हुई कि अकाल तख्त ने मुख्यमंत्री से जुड़े एक विवादित वीडियो की फोरेंसिक जांच कराई और यह घोषित किया कि वीडियो वास्तविक है तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से तैयार नहीं किया गया। इसके बावजूद, आलोचकों का कहना है कि मान ने 24 घंटे के भीतर विभिन्न प्रयोगशालाओं की रिपोर्ट पेश कर मामले को दबाने की कोशिश की। पार्टी नेता दलजीत सिंह चीमा ने बताया कि मुख्यमंत्री को कई बार याद दिलाने के बावजूद पाँच महीने तक वीडियो की फोरेंसिक जांच नहीं कराई गई, जिसके बाद अकाल तख्त ने स्वयं यह जांच कराई।
SAD की प्रतिक्रिया
चीमा ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'ऐसी स्थिति में भगवंत मान एक मिनट भी मुख्यमंत्री पद पर बने रहने के योग्य नहीं हैं।' बाद में सुखबीर बादल ने इस मुद्दे पर शिरोमणि कमेटी के सदस्यों के साथ भी चर्चा की। सदस्यों ने आरोप लगाया कि मान ने वीडियो को AI-निर्मित बताकर सिख संगत को गुमराह करने की कोशिश की।
संगठनात्मक मजबूती पर भी जोर
कार्यकारिणी बैठक में राजनीतिक मुद्दों के साथ-साथ पार्टी के संगठनात्मक ढांचे की भी समीक्षा की गई। बूथ स्तर की समितियों पर विशेष ध्यान दिया गया। सुखबीर बादल ने घोषणा की कि अगले दो सप्ताह के भीतर पार्टी का पूरा संगठनात्मक ढांचा तैयार कर लिया जाएगा।
AAP सरकार पर अन्य आरोप
कार्यकारिणी समिति ने आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार पर लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शनों को दबाने, बिना उकसावे के लाठीचार्ज कराने और राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगाड़ने का भी आरोप लगाया। यह ऐसे समय में आया है जब पंजाब में धार्मिक और राजनीतिक तनाव एक साथ उभर रहे हैं, जो आने वाले समय में सत्ता संघर्ष को और तीखा बना सकते हैं।