31 जुलाई 2026
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अकाल तख्त ने भगवंत मान को 'गुरु दोखी' घोषित किया, सिख समुदाय से संबंध तोड़ने की अपील

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अकाल तख्त ने भगवंत मान को 'गुरु दोखी' घोषित किया, सिख समुदाय से संबंध तोड़ने की अपील

सारांश

अकाल तख्त ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को 'गुरु दोखी' करार दिया — फोरेंसिक जांच में वायरल वीडियो असली पाया गया। सिख समुदाय से संबंध तोड़ने की अपील के साथ 29 जून को सभी सिख विधायकों और मंत्रियों को भी तलब किया गया है। यह पंजाब की राजनीति में एक गंभीर धार्मिक-राजनीतिक टकराव का संकेत है।

मुख्य बातें

अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज ने 15 जून 2026 को मुख्यमंत्री भगवंत मान को धार्मिक कदाचार का दोषी घोषित किया।
दो सरकारी फोरेंसिक प्रयोगशालाओं ने वायरल वीडियो को वास्तविक और बिना छेड़छाड़ का पाया।
मान को 'गुरु दोखी' और 'खालसा पंथ विरोधी' करार दिया गया; सिख समुदाय से संबंध तोड़ने की अपील।
पंजाब के सभी सिख विधायक और मंत्री 29 जून को अकाल तख्त के समक्ष पेश होंगे।
जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम, 2026 को 'काला कानून' बताकर वापस लेने की मांग।
मान अकाल तख्त द्वारा तलब किए जाने वाले पंजाब के तीसरे मुख्यमंत्री हैं — इससे पहले बादल (1979) और बरनाला (1986) को तलब किया गया था।

अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज ने सोमवार, 15 जून को अमृतसर से पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को धार्मिक कदाचार का दोषी घोषित कर दिया। यह फैसला उस कथित वायरल वीडियो की फोरेंसिक जांच के आधार पर सुनाया गया जिसमें मान पर सिख गुरुओं के चित्रों पर शराब छिड़कने का आरोप है। अकाल तख्त ने उन्हें 'गुरु दोखी' और 'खालसा पंथ विरोधी' करार देते हुए सिख समुदाय से उनके साथ सामाजिक और धार्मिक संबंध समाप्त करने की अपील की है।

फोरेंसिक रिपोर्ट और वीडियो की प्रामाणिकता

जत्थेदार गर्गज ने स्पष्ट किया कि दो सरकारी मान्यता प्राप्त फोरेंसिक प्रयोगशालाओं ने वायरल वीडियो की जांच की। दोनों रिपोर्टों के अनुसार वीडियो न तो एआई-निर्मित है और न ही उसमें किसी प्रकार की छेड़छाड़ की गई है — इसे पूरी तरह प्राकृतिक और वास्तविक बताया गया है। यह निष्कर्ष अकाल तख्त के निर्णय का मुख्य आधार बना।

विधायकों और मंत्रियों को तलब किया

अकाल तख्त ने पंजाब के सभी सिख विधायकों — चाहे वे किसी भी राजनीतिक दल से हों — तथा राज्य मंत्रिमंडल के सदस्यों को 29 जून को अकाल तख्त के समक्ष उपस्थित होने का आदेश दिया है। इन पर जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम, 2026 को पारित कर सिख पंथ की भावनाओं और हितों को आहत करने का आरोप है। जत्थेदार गर्गज इस अधिनियम को पहले भी 'काला कानून' बताते हुए इसे तत्काल वापस लेने की मांग कर चुके हैं।

भगवंत मान का अकाल तख्त से पुराना संबंध

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री मान इससे पहले 15 जनवरी को भी अकाल तख्त के समक्ष पेश हो चुके हैं, तब उन पर सिख मर्यादाओं को लेकर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप था। वह अकाल तख्त द्वारा तलब किए जाने वाले पंजाब के तीसरे मुख्यमंत्री हैं।

ऐतिहासिक संदर्भ

इससे पहले प्रकाश सिंह बादल को 1979 में सिख-निरंकारी संघर्ष के मामले में और सुरजीत सिंह बरनाला को 1986 में स्वर्ण मंदिर परिसर में पुलिस कार्रवाई के आदेश देने पर धार्मिक कदाचार का दोषी ठहराया गया था। बरनाला ने 1988 में अकाल तख्त से क्षमा याचना कर प्रायश्चित किया था। यह ऐसे समय में आया है जब पंजाब में धार्मिक और राजनीतिक ध्रुवीकरण की प्रवृत्ति तेज़ हो रही है।

आगे क्या होगा

अब सबकी निगाहें 29 जून की सुनवाई पर टिकी हैं, जब सिख विधायकों और मंत्रियों को अकाल तख्त के सामने पेश होना है। भगवंत मान की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार का रुख और उसकी राजनीतिक प्रतिक्रिया यह तय करेगी कि यह विवाद सुलह की ओर बढ़ता है या और गहरा होता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसने सत्ता में आने से पहले पारदर्शिता और जवाबदेही का वादा किया था। फोरेंसिक रिपोर्ट का हवाला देकर अकाल तख्त ने अपने फैसले को तकनीकी आधार देने की कोशिश की है, लेकिन यह सवाल बना रहेगा कि क्या धार्मिक निकाय की फोरेंसिक व्याख्या स्वतंत्र न्यायिक समीक्षा से परे है। 29 जून की सुनवाई यह तय करेगी कि पंजाब की राजनीति में यह दरार और गहरी होती है या भगवंत मान बरनाला की राह पर क्षमा याचना का रास्ता चुनते हैं।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अकाल तख्त ने भगवंत मान को दोषी क्यों घोषित किया?
अकाल तख्त ने एक कथित वायरल वीडियो के आधार पर भगवंत मान को धार्मिक कदाचार का दोषी माना, जिसमें उन पर सिख गुरुओं के चित्रों पर शराब छिड़कने का आरोप है। दो सरकारी फोरेंसिक प्रयोगशालाओं ने इस वीडियो को वास्तविक और बिना किसी छेड़छाड़ के पाया।
अकाल तख्त ने 29 जून को किसे तलब किया है?
अकाल तख्त ने पंजाब के सभी सिख विधायकों — चाहे वे किसी भी दल से हों — और राज्य मंत्रिमंडल के सदस्यों को 29 जून को पेश होने का आदेश दिया है। इन पर जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम, 2026 पारित कर सिख पंथ की भावनाएं आहत करने का आरोप है।
'गुरु दोखी' और 'खालसा पंथ विरोधी' घोषणा का क्या मतलब है?
इस घोषणा के तहत अकाल तख्त ने सिख समुदाय से भगवंत मान के साथ सामाजिक और धार्मिक संबंध समाप्त करने की अपील की है। यह सिख धार्मिक परंपरा में एक गंभीर सज़ा मानी जाती है जो व्यक्ति को पंथ से बाहर करने के समान है।
क्या पहले भी किसी पंजाब के मुख्यमंत्री को अकाल तख्त ने तलब किया है?
हां, भगवंत मान पंजाब के तीसरे मुख्यमंत्री हैं जिन्हें अकाल तख्त ने तलब किया है। इससे पहले प्रकाश सिंह बादल को 1979 में और सुरजीत सिंह बरनाला को 1986 में धार्मिक कदाचार का दोषी ठहराया गया था; बरनाला ने 1988 में क्षमा याचना की थी।
जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम, 2026 पर अकाल तख्त का क्या रुख है?
अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज ने इस अधिनियम को 'काला कानून' बताते हुए इसे तत्काल वापस लेने की मांग की है। उनके अनुसार यह कानून सिख पंथ की भावनाओं और हितों के विरुद्ध है।
राष्ट्र प्रेस
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