10 अगस्त 2026
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अकाल तख्त के आदेश पर मनजिंदर सिंह सिरसा का समर्थन, भगवंत मान पर फर्जी फोरेंसिक रिपोर्ट के गंभीर आरोप

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अकाल तख्त के आदेश पर मनजिंदर सिंह सिरसा का समर्थन, भगवंत मान पर फर्जी फोरेंसिक रिपोर्ट के गंभीर आरोप

सारांश

अकाल तख्त साहिब ने 15 जून 2026 को भगवंत मान को 'गुरु-द्रोही' घोषित कर सिख पंथ से निष्कासित किया। मनजिंदर सिंह सिरसा ने इस आदेश का समर्थन करते हुए AAP पर फर्जी फोरेंसिक रिपोर्ट तैयार करवाने और अकाल तख्त की सर्वोच्चता को चुनौती देने के गंभीर आरोप लगाए।

मुख्य बातें

अकाल तख्त साहिब ने 15 जून 2026 को भगवंत मान को 'गुरु-द्रोही' घोषित कर सिख समुदाय से निष्कासित किया।
दिल्ली सरकार के मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने 24 जून 2026 को भाजपा मुख्यालय, नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आदेश का समर्थन किया।
दो एजेंसियों द्वारा 1,191 फ्रेम की फोरेंसिक जाँच में विवादित वीडियो को एआई-जनरेटेड नहीं पाया गया।
5 जनवरी 2026 को अकाल तख्त के समक्ष भगवंत मान ने वीडियो को एआई-निर्मित बताया था; मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने 18 जून 2026 को भी इसे फर्जी कहा।
सिरसा ने हरियाणा के कमिश्नर स्वपन शर्मा पर गुरुग्राम फोरेंसिक लैब मामले में कथित पैसे के लेन-देन का आरोप लगाया — ये आरोप स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हैं।
अरविंद केजरीवाल और AAP पर अकाल तख्त की सर्वोच्चता को कमज़ोर करने की कोशिश का आरोप।

दिल्ली सरकार के मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने 24 जून 2026 को भाजपा मुख्यालय, नई दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान पर गंभीर आरोप लगाए और अकाल तख्त साहिब के आदेश का पूर्ण समर्थन किया। उन्होंने दावा किया कि एक वीडियो की दो स्वतंत्र एजेंसियों द्वारा की गई फोरेंसिक जाँच में वीडियो को वास्तविक पाया गया, जिसके बाद अकाल तख्त ने भगवंत मान को सिख पंथ से निष्कासित कर दिया।

अकाल तख्त का ऐतिहासिक आदेश

सिरसा के अनुसार, अकाल तख्त साहिब के पाँच सिंह साहिबानों ने 15 जून 2026 को भगवंत मान को 'गुरु-द्रोही' और 'खालसा पंथ का विरोधी' घोषित करते हुए सिख समुदाय से निष्कासित करने का आदेश जारी किया। साथ ही यह निर्देश दिया गया कि दुनिया भर का कोई भी सिख उनसे किसी भी प्रकार का संबंध न रखे। यह आदेश एक विवादित वीडियो के सामने आने के बाद दिया गया, जिसमें कथित तौर पर भगवंत मान को गुरु साहिबान के पवित्र स्वरूप पर शराब के छींटे मारते दिखाया गया है।

वीडियो विवाद और फोरेंसिक जाँच

सिरसा ने बताया कि 5 जनवरी 2026 को अकाल तख्त साहिब ने भगवंत मान को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया था, जिसमें मान ने दावा किया था कि यह वीडियो एआई-जनरेटेड है और असली नहीं है। हालाँकि, सिरसा के अनुसार, बाद में दो अलग-अलग एजेंसियों द्वारा 1,191 फ्रेम की जाँच के बाद तैयार की गई फोरेंसिक रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया कि वीडियो एआई-जनरेटेड नहीं है, यद्यपि वीडियो के कुछ हिस्सों को लेकर विवाद बताया गया। गौरतलब है कि मान के मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने 18 जून 2026 को प्रेस वार्ता कर वीडियो को फर्जी बताया था।

फर्जी फोरेंसिक रिपोर्ट के आरोप

सिरसा ने यह भी आरोप लगाया कि भगवंत मान के कथित करीबी हरियाणा के कमिश्नर स्वपन शर्मा ने जशनदीप एसपी के साथ मिलकर हरप्रीत के माध्यम से गुरुग्राम की फोरेंसिक लैब से जुड़े मामलों पर एक होटल में बैठक की। उनके अनुसार, इस बैठक में कथित तौर पर पैसे का लेन-देन हुआ और आम आदमी पार्टी (AAP) के कथित काले धन के बल पर एक फर्जी फोरेंसिक रिपोर्ट तैयार करवाई गई, ताकि वीडियो को गलत साबित किया जा सके। ये आरोप सिरसा द्वारा लगाए गए हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।

केजरीवाल और AAP पर निशाना

प्रेस कॉन्फ्रेंस में सिरसा ने AAP के संयोजक अरविंद केजरीवाल और उनके सहयोगियों पर भी आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि पार्टी और उसके नेता कथित तौर पर पैसे के दम पर फर्जी रिपोर्ट बनवाकर सिख समुदाय और अकाल तख्त की भावना के विरुद्ध काम कर रहे हैं। सिरसा ने यह भी कहा कि पंजाब में वर्तमान में जो मानसिकता दिखाई दे रही है, वह अकाल तख्त साहिब की सर्वोच्चता को कमज़ोर करने का प्रयास है।

आगे क्या होगा

इस पूरे विवाद के बीच दुनिया भर के सिख समुदाय में रोष बताया जा रहा है। अकाल तख्त के आदेश के बाद भगवंत मान की राजनीतिक स्थिति पर इसके प्रभाव को लेकर पंजाब की राजनीति में हलचल है। AAP और भगवंत मान की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक खंडन सामने नहीं आया है, और यह मामला आगे कानूनी एवं राजनीतिक दोनों मोर्चों पर और उलझने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि गहरे राजनीतिक रंग में रँगा है — अकाल तख्त के आदेश का उपयोग भाजपा के एक मंत्री द्वारा AAP पर हमले के मंच के रूप में किया जाना इस मामले की जटिलता को उजागर करता है। फोरेंसिक रिपोर्ट की विश्वसनीयता दोनों पक्षों द्वारा विवादित है, और स्वतंत्र सत्यापन के बिना जनता के सामने सच्चाई धुंधली बनी रहेगी। अकाल तख्त की सर्वोच्चता एक संवेदनशील विषय है, और इसे राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता का हथियार बनाना सिख समुदाय की धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ का जोखिम उठाता है। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक रही है वह यह है कि इस पूरे प्रकरण में न्यायिक या स्वतंत्र जाँच की माँग अब तक क्यों नहीं उठी।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अकाल तख्त साहिब ने भगवंत मान को क्यों निष्कासित किया?
अकाल तख्त साहिब ने 15 जून 2026 को भगवंत मान को 'गुरु-द्रोही' और 'खालसा पंथ का विरोधी' घोषित कर सिख समुदाय से निष्कासित किया। यह आदेश एक विवादित वीडियो के सामने आने के बाद दिया गया, जिसमें कथित तौर पर मान को गुरु साहिबान के पवित्र स्वरूप पर शराब के छींटे मारते दिखाया गया है।
विवादित वीडियो की फोरेंसिक जाँच में क्या निकला?
मनजिंदर सिंह सिरसा के अनुसार, दो अलग-अलग एजेंसियों द्वारा 1,191 फ्रेम की जाँच के बाद तैयार फोरेंसिक रिपोर्ट में वीडियो को एआई-जनरेटेड नहीं पाया गया, हालाँकि वीडियो के कुछ हिस्सों को लेकर विवाद बताया गया। भगवंत मान और उनके मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने वीडियो को फर्जी बताया है।
मनजिंदर सिंह सिरसा ने AAP पर क्या आरोप लगाए?
सिरसा ने आरोप लगाया कि AAP ने कथित काले धन के बल पर गुरुग्राम की फोरेंसिक लैब से जुड़े मामले में एक फर्जी फोरेंसिक रिपोर्ट तैयार करवाई, ताकि विवादित वीडियो को गलत साबित किया जा सके। ये आरोप स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हैं।
भगवंत मान ने अकाल तख्त के समक्ष क्या कहा था?
5 जनवरी 2026 को अकाल तख्त साहिब ने भगवंत मान को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया था, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि विवादित वीडियो एआई से बनाया गया है और असली नहीं है। बाद में उनके मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने 18 जून 2026 को प्रेस वार्ता में भी वीडियो को फर्जी बताया।
अकाल तख्त के निष्कासन आदेश का सिख समुदाय पर क्या असर होगा?
अकाल तख्त के आदेश के अनुसार, दुनिया भर का कोई भी सिख भगवंत मान से किसी भी प्रकार का संबंध नहीं रखेगा। यह आदेश भगवंत मान की राजनीतिक स्थिति को प्रभावित कर सकता है, क्योंकि पंजाब में सिख समुदाय की बड़ी आबादी है और अकाल तख्त की सर्वोच्चता को धार्मिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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