10 अगस्त 2026
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गुरुग्राम पुलिस ने भगवंत मान वीडियो मामले में फर्जी फोरेंसिक रिपोर्ट पर दो के खिलाफ एफआईआर दर्ज की

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गुरुग्राम पुलिस ने भगवंत मान वीडियो मामले में फर्जी फोरेंसिक रिपोर्ट पर दो के खिलाफ एफआईआर दर्ज की

सारांश

अकाल तख्त के यह कहने के बाद कि भगवंत मान का विवादित वीडियो असली है, पंजाब सरकार के अधिकारियों ने कथित तौर पर ₹10 लाख में एक विपरीत फोरेंसिक रिपोर्ट तैयार करवाई। अब गुरुग्राम पुलिस ने दो कॉन्ट्रैक्ट फोरेंसिक विशेषज्ञों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है।

मुख्य बातें

गुरुग्राम पुलिस ने 23 जून 2026 को अंकित (जींद) और अरुण महेंद्रू (सिरसा) के खिलाफ एफआईआर दर्ज की।
आरोप है कि दोनों ने पंजाब सरकार के इशारे पर फर्जी फोरेंसिक रिपोर्ट तैयार की, जिसमें वीडियो में दिखने वाले व्यक्ति को सीएम भगवंत मान नहीं बताया गया।
शिकायतकर्ता जसप्रीत सिंह के अनुसार पंजाब सरकार के अधिकारियों ने उन्हें ₹10 लाख दिए; आरोपियों को ₹50,000-₹50,000 मिले।
श्री अकाल तख्त साहिब ने 15 जून को वीडियो को एआई-जेनरेटेड नहीं, बल्कि मूल घोषित किया था।
कथित फर्जी रिपोर्ट एक फाइव स्टार होटल में 1,100 से अधिक कोणों की जांच का हवाला देकर तैयार की गई।

हरियाणा की गुरुग्राम पुलिस ने 23 जून 2026 को दो व्यक्तियों — अंकित (जींद) और अरुण महेंद्रू (सिरसा) — के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। इन पर आरोप है कि उन्होंने पंजाब सरकार के अधिकारियों के इशारे पर एक फर्जी फोरेंसिक रिपोर्ट तैयार की, जिसमें कथित तौर पर यह दर्शाया गया कि विवादित वीडियो में नजर आने वाला व्यक्ति पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान नहीं है।

मामले की पृष्ठभूमि

लगभग छह महीने पहले श्री अकाल तख्त के जत्थेदार ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को तलब किया था। अकाल तख्त की ओर से कहा गया था कि सोशल मीडिया पर प्रसारित एक वीडियो में धार्मिक मर्यादा भंग करने का प्रयास किया जा रहा है। मान ने सफाई देते हुए कहा था कि यह वीडियो एआई-जेनरेटेड या फर्जी हो सकता है।

इसके बाद श्री अकाल तख्त साहिब ने स्वतंत्र रूप से वीडियो की फोरेंसिक जांच कराई। 15 जून को जत्थेदार साहिब ने घोषणा की कि यह वीडियो एआई-जेनरेटेड नहीं, बल्कि मूल (ऑरिजनल) है। इस निष्कर्ष के बाद पंजाब सरकार की ओर से अलग रुख अपनाया गया और दावा किया गया कि वीडियो में दिख रहा व्यक्ति मुख्यमंत्री नहीं है।

फर्जी रिपोर्ट कैसे तैयार हुई

शिकायतकर्ता जसप्रीत सिंह — जो स्वयं एक फोरेंसिक विशेषज्ञ और वकील हैं — के अनुसार, 15 जून को अकाल तख्त की फोरेंसिक रिपोर्ट सार्वजनिक होने के तुरंत बाद पंजाब के एक पुलिस कमिश्नर और एक पुलिस कप्तान गुरुग्राम पहुंचे। उन्होंने जसप्रीत से संपर्क किया और उनके कहने पर फोरेंसिक विशेषज्ञ अंकित व अरुण महेंद्रू को बुलाया गया।

जसप्रीत का आरोप है कि एक फाइव स्टार होटल में यह पूरी रिपोर्ट तैयार की गई, जिसमें 1,100 से अधिक कोणों से जांच का हवाला देते हुए दावा किया गया कि वीडियो में मुख्यमंत्री भगवंत मान नहीं हैं। यह रिपोर्ट बाद में सार्वजनिक कर दी गई और इसे अकाल तख्त की रिपोर्ट के विपरीत बताया गया।

आरोपियों को मिली कथित रकम

जसप्रीत सिंह के अनुसार, पंजाब सरकार के अधिकारियों ने उन्हें ₹10 लाख दिए — ताकि वे ऐसी रिपोर्ट तैयार करवाएं जो सरकार के पक्ष में हो। इसमें से फोरेंसिक विशेषज्ञ अंकित और अरुण महेंद्रू को कथित तौर पर ₹50,000-₹50,000 दिए गए। दोनों आरोपी कॉन्ट्रैक्चुअल आधार पर फोरेंसिक विशेषज्ञ के रूप में काम करते हैं।

एफआईआर और आगे की कार्रवाई

जसप्रीत सिंह ने ही इस पूरे मामले की शिकायत गुरुग्राम पुलिस से की, जिसके आधार पर अंकित और अरुण महेंद्रू के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। यह मामला अब एक बड़े राजनीतिक और कानूनी विवाद का रूप ले चुका है, जिसमें एक ओर अकाल तख्त की फोरेंसिक रिपोर्ट है और दूसरी ओर पंजाब सरकार द्वारा प्रस्तुत विपरीत रिपोर्ट।

गौरतलब है कि यह पहली बार है जब किसी राज्य सरकार पर फोरेंसिक साक्ष्य से छेड़छाड़ के इस स्तर के आरोप सामने आए हैं। जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में पंजाब सरकार की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो जनता के लिए सच तय करना मुश्किल हो जाता है। यह ऐसे समय में आया है जब फोरेंसिक विशेषज्ञता की खरीद-फरोख्त के आरोप न्यायिक प्रक्रिया में जनविश्वास को कमज़ोर करते हैं। असली परीक्षा यह होगी कि क्या जांच एजेंसियाँ पंजाब के वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंच पाती हैं या मामला केवल दो कॉन्ट्रैक्ट विशेषज्ञों तक सिमट कर रह जाता है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुरुग्राम पुलिस ने किस मामले में एफआईआर दर्ज की है?
गुरुग्राम पुलिस ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान से जुड़े विवादित वीडियो मामले में फर्जी फोरेंसिक रिपोर्ट तैयार करने के आरोप में अंकित और अरुण महेंद्रू के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। शिकायत फोरेंसिक विशेषज्ञ व वकील जसप्रीत सिंह ने की है।
भगवंत मान वीडियो विवाद क्या है?
लगभग छह महीने पहले सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया था जिसमें धार्मिक मर्यादा भंग करने का प्रयास दिखाया गया था। श्री अकाल तख्त साहिब ने इसकी जांच के बाद 15 जून को घोषणा की कि वीडियो एआई-जेनरेटेड नहीं बल्कि मूल है, जबकि पंजाब सरकार ने दावा किया कि वीडियो में दिखने वाला व्यक्ति मुख्यमंत्री भगवंत मान नहीं है।
फर्जी फोरेंसिक रिपोर्ट कैसे और कहाँ तैयार की गई?
शिकायतकर्ता जसप्रीत सिंह के अनुसार, 15 जून को अकाल तख्त की रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद पंजाब के एक पुलिस कमिश्नर और पुलिस कप्तान गुरुग्राम पहुंचे। एक फाइव स्टार होटल में अंकित और अरुण महेंद्रू ने 1,100 से अधिक कोणों की जांच का हवाला देते हुए एक विपरीत रिपोर्ट तैयार की, जिसे बाद में सार्वजनिक किया गया।
आरोपियों को कितनी रकम मिली?
जसप्रीत सिंह का आरोप है कि पंजाब सरकार के अधिकारियों ने उन्हें ₹10 लाख दिए। इसमें से फोरेंसिक विशेषज्ञ अंकित और अरुण महेंद्रू को कथित तौर पर ₹50,000-₹50,000 दिए गए।
इस मामले में अकाल तख्त की क्या भूमिका रही?
श्री अकाल तख्त साहिब ने स्वतंत्र रूप से वीडियो की फोरेंसिक जांच कराई और 15 जून को घोषणा की कि वीडियो एआई-जेनरेटेड नहीं है। यही निष्कर्ष इस पूरे विवाद की जड़ बना, क्योंकि इसके बाद पंजाब सरकार ने कथित तौर पर एक विपरीत रिपोर्ट तैयार करवाई।
राष्ट्र प्रेस
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