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भगवंत मान वीडियो विवाद: फर्जी फोरेंसिक रिपोर्ट के लिए ₹10 लाख की डील, गुरुग्राम में दो हिरासत में

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भगवंत मान वीडियो विवाद: फर्जी फोरेंसिक रिपोर्ट के लिए ₹10 लाख की डील, गुरुग्राम में दो हिरासत में

सारांश

भगवंत मान के कथित विवादित वीडियो को फर्जी साबित करने के लिए गुरुग्राम की एक निजी, गैर-मान्यता प्राप्त लैब से ₹10 लाख में फोरेंसिक रिपोर्ट तैयार कराने का आरोप है। पुलिस ने दो संदिग्धों को हिरासत में लिया है और डीपफेक निर्माण से लेकर प्रभावशाली व्यक्तियों की संभावित संलिप्तता तक जांच का दायरा बढ़ा दिया है।

मुख्य बातें

गुरुग्राम पुलिस ने 23 जून 2025 को भगवंत मान वीडियो विवाद में फर्जी फोरेंसिक रिपोर्ट मामले में एफआईआर दर्ज की।
हिरासत में लिए गए दोनों संदिग्धों की पहचान अंकित और अरुण के रूप में बताई जा रही है।
फर्जी फोरेंसिक रिपोर्ट के लिए कथित तौर पर ₹10 लाख की डील हुई — ₹2.5 लाख एक खाते में और ₹7.5 लाख दूसरे खाते में जमा।
संदिग्धों पर एआई-आधारित डीपफेक वीडियो बनाने और प्रसारित करने का भी आरोप है।
जांच में सामने आया कि संबंधित लैब के पास कोई सरकारी मान्यता नहीं थी।
पुलिस किसी प्रभावशाली व्यक्ति की संभावित संलिप्तता की भी जांच कर रही है।

गुरुग्राम पुलिस ने 23 जून 2025 को पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान से जुड़े कथित विवादित वीडियो मामले में नई कार्रवाई करते हुए दो संदिग्धों को हिरासत में लिया है। आरोप है कि इस वीडियो को फर्जी साबित करने के लिए गुरुग्राम की एक निजी लैब से कथित तौर पर मनमाफिक फोरेंसिक रिपोर्ट तैयार कराई गई, जिसके लिए करीब ₹10 लाख की डील हुई थी। पुलिस ने जसवीर नामक व्यक्ति की शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज की है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला उस कथित वीडियो से जुड़ा है, जिसे लेकर सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था अकाल तख्त ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को तलब किया था। उस समय मुख्यमंत्री की ओर से वीडियो को फर्जी बताया गया था। जांच में अब सामने आया है कि दोनों हिरासत में लिए गए व्यक्तियों पर एक पड़ोसी राज्य के मुख्यमंत्री का कथित एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) आधारित डीपफेक वीडियो बनाने और उसे प्रसारित करने का आरोप है।

गिरफ्तारी और आरोप

पुलिस ने जिन दो लोगों को हिरासत में लिया है, उनकी पहचान अंकित और अरुण के रूप में बताई जा रही है। यह कथित लेन-देन सेक्टर-29 थाना क्षेत्र के एक होटल में हुआ बताया जा रहा है। पुलिस के अनुसार, इस कथित डील में से ₹2.5 लाख एक बैंक खाते में और ₹7.5 लाख दूसरे खाते में जमा कराए गए। पुलिस दोनों संदिग्धों से पूछताछ कर रही है, हालांकि अभी तक कोई आधिकारिक विस्तृत बयान जारी नहीं किया गया है।

फोरेंसिक रिपोर्ट की वैधता पर सवाल

जांच में यह भी सामने आया है कि संबंधित व्यक्तियों के पास डिजिटल फोरेंसिक विश्लेषण के लिए कोई सरकारी मान्यता प्राप्त या अधिकृत लैब नहीं थी। पुलिस वीडियो की वास्तविकता की जांच के लिए उसे स्वतंत्र फोरेंसिक परीक्षण के लिए भेज रही है। गौरतलब है कि बिना मान्यता प्राप्त लैब की रिपोर्ट को कानूनी दृष्टि से वैध नहीं माना जाता।

जांच का दायरा

अधिकारियों के अनुसार, पुलिस इस मामले में किसी प्रभावशाली व्यक्ति की संभावित संलिप्तता की भी जांच कर रही है। डिजिटल गतिविधियों, वित्तीय लेन-देन और तैयार की गई फोरेंसिक रिपोर्ट की प्रमाणिकता की विस्तृत जांच चल रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी।

आगे क्या होगा

यह मामला डीपफेक तकनीक के राजनीतिक दुरुपयोग और फोरेंसिक प्रक्रियाओं की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। जांच के नतीजे न केवल इस विशेष मामले की दिशा तय करेंगे, बल्कि डिजिटल साक्ष्यों की कानूनी स्वीकार्यता के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण मिसाल भी स्थापित कर सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो डिजिटल साक्ष्य की न्यायिक स्वीकार्यता का पूरा ढाँचा खतरे में पड़ जाता है। अकाल तख्त जैसी धार्मिक संस्था की संलिप्तता इस मामले को धार्मिक-राजनीतिक आयाम देती है जिसे मुख्यधारा की कवरेज अक्सर नज़रअंदाज़ करती है। असली परीक्षा यह होगी कि क्या पुलिस जांच उस 'प्रभावशाली व्यक्ति' तक पहुँच पाती है जिसका संकेत अधिकारी दे रहे हैं, या यह मामला केवल दो छोटे संदिग्धों तक सिमट कर रह जाता है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवंत मान वीडियो विवाद में फर्जी फोरेंसिक रिपोर्ट का मामला क्या है?
आरोप है कि पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान से जुड़े कथित विवादित वीडियो को फर्जी साबित करने के लिए गुरुग्राम की एक गैर-मान्यता प्राप्त निजी लैब से ₹10 लाख में फोरेंसिक रिपोर्ट तैयार कराई गई। गुरुग्राम पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर दो संदिग्धों — अंकित और अरुण — को हिरासत में लिया है।
अकाल तख्त का इस मामले से क्या संबंध है?
सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था अकाल तख्त ने इसी कथित वीडियो के आधार पर मुख्यमंत्री भगवंत मान को तलब किया था। उस समय मान की ओर से वीडियो को फर्जी बताया गया था, और अब आरोप है कि उस दावे को साबित करने के लिए ही यह कथित फर्जी फोरेंसिक रिपोर्ट तैयार कराई गई।
गुरुग्राम में हिरासत में लिए गए दोनों संदिग्धों पर क्या आरोप हैं?
अंकित और अरुण पर एआई-आधारित डीपफेक वीडियो बनाने, उसे प्रसारित करने और बिना सरकारी मान्यता के फोरेंसिक रिपोर्ट तैयार करने का आरोप है। कथित ₹10 लाख की डील में से ₹2.5 लाख एक बैंक खाते में और ₹7.5 लाख दूसरे खाते में जमा कराए गए बताए जा रहे हैं।
क्या इस मामले में किसी बड़े व्यक्ति की संलिप्तता की जांच हो रही है?
हाँ, पुलिस अधिकारियों के अनुसार जांच में किसी प्रभावशाली व्यक्ति की संभावित संलिप्तता की भी जांच की जा रही है। हालांकि अभी तक किसी नाम का खुलासा नहीं किया गया है और जांच जारी है।
डीपफेक वीडियो मामले में पुलिस आगे क्या कदम उठाएगी?
पुलिस वीडियो को स्वतंत्र फोरेंसिक परीक्षण के लिए भेज रही है और डिजिटल गतिविधियों तथा वित्तीय लेन-देन की विस्तृत जांच कर रही है। अधिकारियों के अनुसार, जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी।
राष्ट्र प्रेस
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