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असम में 2031 तक 4,000 MBBS सीटें: CM हिमंता बिस्वा सरमा का बड़ा ऐलान, 32 नए मेडिकल कॉलेज बनेंगे

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असम में 2031 तक 4,000 MBBS सीटें: CM हिमंता बिस्वा सरमा का बड़ा ऐलान, 32 नए मेडिकल कॉलेज बनेंगे

सारांश

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने देवघर में एक अस्पताल उद्घाटन के मौके पर बड़ा ऐलान किया — 2031 तक राज्य में MBBS सीटें 4,000 होंगी, 32 नए मेडिकल कॉलेज बनेंगे, और 5,000 उप-स्वास्थ्य केंद्रों में दो-दो डॉक्टरों की तैनाती होगी। यह उस राज्य के लिए ऐतिहासिक बदलाव है, जहाँ दशकों तक सालाना सिर्फ 300 डॉक्टर तैयार होते थे।

मुख्य बातें

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने 2031 तक MBBS सीटें 4,000 करने का लक्ष्य घोषित किया।
राज्य में अभी 16 मेडिकल कॉलेज कार्यरत हैं; 32 और कॉलेज स्थापित करने की योजना है, जिनमें से 16 बन चुके हैं।
वार्षिक डॉक्टर उत्पादन 350 से बढ़कर 2,200 हो चुका है; लक्ष्य इसे और आगे ले जाना है।
नवीनतम राज्य बजट में 5,000 उप-स्वास्थ्य केंद्रों में से प्रत्येक में दो डॉक्टरों की तैनाती की घोषणा।
यह घोषणा झारखंड के देवघर में 750 बेड वाले बाबा बैद्यनाथ मेडिकल ट्रस्ट अस्पताल के उद्घाटन के दौरान हुई।

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने 23 सितंबर 2026 को घोषणा की कि राज्य सरकार 2031 तक एमबीबीएस सीटों की संख्या बढ़ाकर 4,000 करने की योजना पर काम कर रही है। यह घोषणा उन्होंने झारखंड के देवघर में 750 बेड वाले बाबा बैद्यनाथ मेडिकल ट्रस्ट अस्पताल के उद्घाटन समारोह में की। फिलहाल असम में 16 मेडिकल कॉलेज कार्यरत हैं और प्रतिवर्ष लगभग 2,200 डॉक्टर प्रशिक्षित होते हैं।

मेडिकल कॉलेजों का विस्तार

मुख्यमंत्री सरमा ने बताया कि राज्य सरकार की योजना पहले से कार्यरत एम्स और ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज के अतिरिक्त असम में 32 और मेडिकल कॉलेज स्थापित करने की है। इनमें से 16 मेडिकल कॉलेज पहले ही स्थापित किए जा चुके हैं। शेष 16 कॉलेजों की स्थापना आगामी वर्षों में की जाएगी।

यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में डॉक्टर-आबादी अनुपात को लेकर चिंताएँ बनी हुई हैं। असम जैसे राज्यों में ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा तक पहुँच अभी भी एक बड़ी चुनौती है।

दशकों से सीमित रहा ढाँचा

मुख्यमंत्री सरमा ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए बताया कि असम का पहला मेडिकल कॉलेज 1950 के दशक में, दूसरा 1960 के दशक में और तीसरा 1970 के दशक में स्थापित हुआ था। राज्य की लगभग 3.5 करोड़ की आबादी के बावजूद, लंबे समय तक केवल तीन मेडिकल कॉलेज थे और सालाना मात्र 300 डॉक्टर ही तैयार हो पाते थे।

गौरतलब है कि यह स्थिति स्वास्थ्य सेवा आवश्यकताओं के अनुपात में गंभीर डॉक्टर-कमी की ओर इशारा करती है। हाल के वर्षों में हुए विस्तार के बाद यह संख्या लगभग 350 से बढ़कर 2,200 प्रतिवर्ष हो गई है — जो एक उल्लेखनीय बदलाव है।

रोज़गार और स्वास्थ्य केंद्रों पर ज़ोर

सरमा ने स्पष्ट किया कि एमबीबीएस सीटें बढ़ाने के साथ-साथ प्रशिक्षित डॉक्टरों को रोज़गार के अवसर देने के उपाय भी किए जाएंगे। उन्होंने नवीनतम राज्य बजट का हवाला दिया, जिसमें असम के 5,000 उप-स्वास्थ्य केंद्रों में से प्रत्येक में दो डॉक्टरों की तैनाती की घोषणा की गई है।

यह कदम न केवल मेडिकल स्नातकों के लिए सरकारी रोज़गार के अवसर खोलेगा, बल्कि ग्रामीण और दूरदराज़ के क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवा पहुँच को भी मज़बूत करेगा।

आम जनता पर असर

2031 तक 4,000 एमबीबीएस सीटें उपलब्ध होने से असम में प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में नए डॉक्टर तैयार होंगे। इससे सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी घटेगी और राज्य के दूरदराज़ इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता बेहतर होने की उम्मीद है।

विशेषज्ञों के अनुसार, चिकित्सा शिक्षा के इस विस्तार का सीधा लाभ असम की ग्रामीण आबादी को मिलेगा, जो अब तक उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित रही है। आने वाले वर्षों में यह योजना किस हद तक ज़मीन पर उतरती है, यह देखना अहम होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली चुनौती गुणवत्ता और वितरण की है — सीटें बढ़ाना और प्रशिक्षित डॉक्टरों को ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुँचाना दो अलग-अलग बाधाएँ हैं। 5,000 उप-स्वास्थ्य केंद्रों में दो-दो डॉक्टरों की तैनाती का बजट प्रावधान एक सकारात्मक कदम है, पर यह भी देखना होगा कि ये नियुक्तियाँ कागज़ पर नहीं, ज़मीन पर होती हैं या नहीं। देश के कई राज्यों में मेडिकल सीटें बढ़ाने के बाद भी डॉक्टर शहरी इलाकों में ही केंद्रित रहे हैं। असम सरकार यदि रोज़गार और तैनाती की बाध्यता को नीतिगत ढाँचे से जोड़ पाती है, तो यह वाकई एक मॉडल बन सकता है।
RashtraPress
24 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

असम में 2031 तक MBBS सीटें 4,000 करने की योजना क्या है?
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने घोषणा की है कि असम 2031 तक अपनी MBBS सीटों की संख्या बढ़ाकर 4,000 करेगा। इसके लिए एम्स और ईएसआईसी के अतिरिक्त 32 नए मेडिकल कॉलेज स्थापित किए जाएंगे, जिनमें से 16 पहले ही कार्यरत हो चुके हैं।
अभी असम में कितने मेडिकल कॉलेज हैं और कितने डॉक्टर बनते हैं?
वर्तमान में असम में 16 मेडिकल कॉलेज हैं और प्रतिवर्ष लगभग 2,200 डॉक्टर प्रशिक्षित होते हैं। कुछ वर्ष पहले तक केवल तीन मेडिकल कॉलेज थे और सालाना महज 300-350 डॉक्टर ही तैयार हो पाते थे।
नए मेडिकल कॉलेजों से असम की आम जनता को क्या फायदा होगा?
अधिक मेडिकल कॉलेजों और MBBS सीटों से राज्य में डॉक्टरों की संख्या बढ़ेगी। इसके साथ ही 5,000 उप-स्वास्थ्य केंद्रों में प्रत्येक में दो डॉक्टरों की तैनाती से ग्रामीण और दूरदराज़ इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच बेहतर होने की उम्मीद है।
यह घोषणा कहाँ और कब की गई?
यह घोषणा 23 सितंबर 2026 को झारखंड के देवघर में 750 बेड वाले बाबा बैद्यनाथ मेडिकल ट्रस्ट अस्पताल के उद्घाटन समारोह में मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने की। इस अवसर पर उन्होंने असम की चिकित्सा शिक्षा की ऐतिहासिक कमज़ोरियों और भविष्य की योजनाओं का विस्तार से ब्यौरा दिया।
प्रशिक्षित डॉक्टरों के रोज़गार के लिए सरकार क्या कर रही है?
मुख्यमंत्री सरमा ने बताया कि MBBS सीटें बढ़ाने के साथ-साथ डॉक्टरों के लिए रोज़गार के अवसर भी सुनिश्चित किए जाएंगे। राज्य बजट में 5,000 उप-स्वास्थ्य केंद्रों में से हर एक में दो डॉक्टरों की तैनाती की घोषणा की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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