झारखंड के दो मेडिकल कॉलेजों में MBBS सीटें बढ़ीं, केंद्र ने ₹225 करोड़ की दी मंजूरी
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने झारखंड के दो प्रमुख सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस सीटों की संख्या बढ़ाने की औपचारिक स्वीकृति दे दी है। राज्य के स्वास्थ्य विभाग की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस विस्तार के लिए केंद्र ने ₹225 करोड़ की राशि भी स्वीकृत की है, जिसमें केंद्र की हिस्सेदारी ₹135 करोड़ होगी। यह फैसला राज्य में चिकित्सा शिक्षा की पहुँच बढ़ाने और डॉक्टरों की कमी दूर करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
किन कॉलेजों में बढ़ीं कितनी सीटें
धनबाद स्थित शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (एसएनएमसीएच) में एमबीबीएस सीटों की संख्या 100 से बढ़ाकर 250 कर दी गई है, यानी यहाँ 150 नई सीटें जुड़ेंगी। वहीं, जमशेदपुर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज में भी सीटें बढ़ाने की स्वीकृति मिली है, हालाँकि स्वास्थ्य विभाग ने यहाँ की बढ़ी हुई सीटों का विस्तृत ब्यौरा अभी तक सार्वजनिक नहीं किया है।
पीजी सीटों में भी होगी वृद्धि
स्वास्थ्य विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि मेडिकल कॉलेजों में पोस्ट ग्रेजुएट (पीजी) सीटों में वृद्धि को भी केंद्र की मंजूरी मिली है। इससे राज्य में विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या बढ़ने की संभावना है, जो लंबे समय से ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की कमी का एक बड़ा कारण रही है।
सरकार की प्रतिक्रिया
राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि झारखंड लंबे समय से डॉक्टरों और मेडिकल सीटों की कमी की समस्या से जूझ रहा था। उनके अनुसार, सीटें बढ़ने से राज्य के छात्रों को मेडिकल शिक्षा के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भरता कम करनी पड़ेगी। स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने बताया कि अन्य सरकारी मेडिकल कॉलेजों में भी सीटें बढ़ाने की दिशा में काम जारी है और भविष्य में सुपर स्पेशियलिटी सीटों में भी वृद्धि की योजना है।
आम जनता पर असर
विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस विस्तार का सीधा असर सरकारी अस्पतालों की स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ेगा — खासकर ग्रामीण और दूरदराज इलाकों में, जहाँ डॉक्टरों की कमी एक पुरानी चुनौती रही है। मेडिकल शिक्षा के विस्तार से जहाँ छात्रों को अधिक अवसर मिलेंगे, वहीं राज्य में डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ने से मरीजों को बेहतर इलाज मिलने की उम्मीद भी जताई जा रही है।
आगे क्या होगा
राज्य सरकार इस प्रस्ताव को अब कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजेगी। कैबिनेट की स्वीकृति के बाद ही सीटों के विस्तार की प्रक्रिया आधिकारिक रूप से लागू होगी। गौरतलब है कि यह कदम ऐसे समय में आया है जब देशभर में मेडिकल सीटों की माँग और उपलब्धता के बीच की खाई को पाटने पर केंद्र सरकार का विशेष ज़ोर है।