बड़ा फैसला: झारखंड के 4 जिलों में ₹1,249 करोड़ से बनेंगे मेडिकल कॉलेज, PPP मोड पर होगा निर्माण
सारांश
Key Takeaways
- झारखंड के खूंटी, गिरिडीह, जामताड़ा और धनबाद में 4 नए मेडिकल कॉलेज स्थापित होंगे।
- कुल परियोजना लागत ₹1,249 करोड़ है; निर्माण PPP मोड पर होगा।
- केंद्र सरकार ₹464.23 करोड़ और राज्य सरकार ₹308.37 करोड़ अनुदान देगी।
- गिरिडीह के लिए सर्वाधिक ₹428 करोड़, खूंटी के लिए न्यूनतम ₹117 करोड़ निर्धारित।
- अर्नेस्ट एंड यंग को तकनीकी सलाहकार नियुक्त किया गया; टेंडर और निगरानी समितियां गठित।
- परियोजना वित्त वर्ष 2025-26 से 2030-31 के बीच पूरी होगी; खूंटी 4 साल और बाकी 5 साल में तैयार।
रांची, 24 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। झारखंड सरकार ने राज्य के चार जिलों — खूंटी, गिरिडीह, जामताड़ा और धनबाद — में नए मेडिकल कॉलेज स्थापित करने की योजना को अंतिम रूप दे दिया है। इन जिलों के सदर अस्पतालों को अपग्रेड कर मेडिकल कॉलेजों में तब्दील किया जाएगा और इस पूरी परियोजना पर कुल 1,249 करोड़ रुपये खर्च होंगे। यह निर्णय झारखंड में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।
PPP मोड पर होगा निर्माण, केंद्र-राज्य देंगे अनुदान
इन चारों मेडिकल कॉलेजों का निर्माण पीपीपी (प्राइवेट पब्लिक पार्टनरशिप) मॉडल के तहत किया जाएगा। इसमें केंद्र सरकार 464.23 करोड़ रुपये और राज्य सरकार 308.37 करोड़ रुपये का अनुदान प्रदान करेगी। शेष राशि टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से चयनित निजी एजेंसियां वहन करेंगी।
कॉलेजों के रख-रखाव और सुचारू संचालन के लिए अगले पांच वर्षों में 660.17 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च किए जाएंगे, जिसमें केंद्र, राज्य और निजी एजेंसी तीनों की साझेदारी होगी।
हर जिले के लिए अलग-अलग वित्तीय ढांचा
धनबाद मेडिकल कॉलेज के लिए निर्माण लागत का 30-30 प्रतिशत हिस्सा केंद्र और राज्य सरकार बराबर-बराबर देंगी। गिरिडीह और जामताड़ा के लिए केंद्र सरकार 40 प्रतिशत और राज्य सरकार अधिकतम 20 प्रतिशत तक अनुदान देगी।
खूंटी के मामले में केंद्र और राज्य दोनों मिलकर 40-40 प्रतिशत तक की लागत वहन करेंगे, जो इस जिले के लिए सर्वाधिक सरकारी सहयोग दर्शाता है। यह संभवतः खूंटी की आदिवासी-बहुल और पिछड़ी स्वास्थ्य अवसंरचना को देखते हुए किया गया विशेष प्रावधान है।
जिलेवार निर्माण लागत का विवरण
गिरिडीह मेडिकल कॉलेज के निर्माण पर लगभग 428 करोड़ रुपये खर्च होंगे, जो चारों में सबसे अधिक है। जामताड़ा और धनबाद के मेडिकल कॉलेजों पर प्रत्येक के लिए लगभग 352 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। खूंटी मेडिकल कॉलेज पर सबसे कम — करीब 117 करोड़ रुपये — खर्च होने का अनुमान है।
तकनीकी सलाहकार और निगरानी समितियां गठित
सरकार ने इस महत्वाकांक्षी योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए प्रतिष्ठित फर्म अर्नेस्ट एंड यंग को ट्रांजेक्शन एडवाइजर (तकनीकी सलाहकार) नियुक्त किया है। टेंडर प्रक्रिया, अनुदान वितरण और परियोजना की निगरानी के लिए अलग-अलग समितियां भी गठित की जा चुकी हैं।
मेडिकल कॉलेजों की फीस निर्धारण का अधिकार उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग की कमेटी को सौंपा गया है, ताकि शुल्क संरचना पारदर्शी और उचित रहे।
समयसीमा और परियोजना का विस्तार
समयसीमा के अनुसार, खूंटी मेडिकल कॉलेज चार वर्षों में तैयार हो जाएगा, जबकि धनबाद, गिरिडीह और जामताड़ा के कॉलेज पांच वर्षों में पूर्ण होंगे। राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 से 2030-31 तक इस परियोजना पर व्यय की स्वीकृति दे दी है।
गौरतलब है कि झारखंड में प्रति लाख जनसंख्या पर डॉक्टरों की संख्या राष्ट्रीय औसत से काफी कम है और ये चारों जिले स्वास्थ्य सेवाओं की दृष्टि से अत्यंत पिछड़े माने जाते हैं। ऐसे में इन मेडिकल कॉलेजों के खुलने से न केवल स्थानीय स्वास्थ्य सेवाएं सुधरेंगी, बल्कि हर वर्ष सैकड़ों नए डॉक्टर भी तैयार होंगे जो राज्य की स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूती देंगे।
यह परियोजना 2030-31 तक पूरी तरह क्रियाशील होने की उम्मीद है और इसके सफल क्रियान्वयन पर झारखंड के लाखों लोगों की स्वास्थ्य सेवाओं का भविष्य निर्भर करेगा।